5 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): भारत और जापान के बीच आर्थिक संबंध अब पारंपरिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से आगे बढ़कर सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष और अन्य हाई-टेक क्षेत्रों तक तेजी से विस्तार कर रहे हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइकोनॉमिक्स के निदेशक कज़ुतो सुज़ुकी ने कहा है कि भारत के उभरते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में जापानी कंपनियों के लिए सहयोग और निवेश के नए अवसर बन रहे हैं।
सुज़ुकी ने 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव के दौरान ANI से बातचीत में कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ उभरती प्रौद्योगिकियों तक पहुंच रही है। उन्होंने खास तौर पर सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बढ़ रहा जापानी जुड़ाव
भारत अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षमता विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी बीच जापानी कंपनियां भारतीय कंपनियों के साथ संभावित सहयोग तलाश रही हैं।
सुज़ुकी के अनुसार, जापान भारत में सेमीकंडक्टर से जुड़े कारोबारी अवसरों को लेकर टाटा सेमीकंडक्टर और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियों से संपर्क कर रहा है। उन्होंने गुजरात में सेमीकंडक्टर फैक्ट्री विकसित करने की संभावनाओं को दोनों देशों के बीच हाई-टेक सहयोग के बढ़ते अवसर के रूप में रेखांकित किया।
यह सहयोग केवल एक-दो परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। जापान के पास सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों, विशेष रसायनों और उन्नत सामग्री के क्षेत्र में महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षमता है, जबकि भारत के पास बड़ा बाजार, इंजीनियरिंग प्रतिभा और तेजी से बढ़ता इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम है।
इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइकोनॉमिक्स ने भी भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में जापान के लिए उपकरण, सामग्री और सप्लाई चेन से जुड़े अवसरों को महत्वपूर्ण बताया है।
गुजरात बन रहा है चिप मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र
भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति में गुजरात की भूमिका लगातार बढ़ रही है। राज्य में चिप असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग से जुड़ी परियोजनाएं आकार ले रही हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइकोनॉमिक्स के एक विश्लेषण के अनुसार, भारत सरकार की सेमीकंडक्टर नीति अब केवल फैब्रिकेशन प्लांट स्थापित करने तक सीमित नहीं है। इसका फोकस उपकरण, सामग्री, चिप डिजाइन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और पूरी सप्लाई चेन तैयार करने पर भी है।
ऐसे में जापान की कंपनियों के लिए भारत में निवेश के संभावित क्षेत्र और व्यापक हो सकते हैं। भारत के लिए इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि देश इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सहयोग का विस्तार
सेमीकंडक्टर के अलावा अंतरिक्ष क्षेत्र भी भारत-जापान तकनीकी साझेदारी का अहम हिस्सा बन रहा है। सुज़ुकी ने कहा कि दोनों देश सैटेलाइट परियोजनाओं और चंद्रमा की खोज से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं।
भारत और जापान की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच LUPEX यानी Lunar Polar Exploration Mission को लेकर सहयोग पहले से जारी है। इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र का अध्ययन करना है।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की बढ़ती क्षमताओं और जापान की तकनीकी विशेषज्ञता के बीच सहयोग से भविष्य में संयुक्त अंतरिक्ष अनुसंधान और तकनीकी परियोजनाओं के लिए संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल भी अहम कड़ी
सुज़ुकी ने भारत-जापान आर्थिक संबंधों में मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, इस परियोजना की सफलता दोनों देशों के बीच भविष्य के बड़े सहयोग के लिए एक तरह का ‘आइसब्रेकर’ साबित हो सकती है।
हाई-स्पीड रेल परियोजना भारत में जापानी तकनीक और वित्तीय सहयोग की प्रमुख मिसाल है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच मेट्रो, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक सहयोग के कई अन्य क्षेत्र भी हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइकोनॉमिक्स के जुलाई 2026 के विश्लेषण के मुताबिक, भारत-जापान संबंध अब व्यापक आर्थिक सहयोग से आगे बढ़कर औद्योगिक और सप्लाई-चेन एकीकरण की दिशा में जा रहे हैं। दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, ICT, स्वच्छ ऊर्जा और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर भी जोर दिया है।
हाइब्रिड वाहनों पर भी जापान का जोर
सुज़ुकी ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भी जापान की रणनीति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जापान ने इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में हाइब्रिड वाहनों पर अधिक ध्यान दिया है और भारत में चार्जिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को देखते हुए हाइब्रिड वाहन आने वाले वर्षों में कार्बन उत्सर्जन कम करने का एक विकल्प हो सकते हैं।
हालांकि, यह सुज़ुकी का विश्लेषण है और इसे भारत की आधिकारिक ऑटो नीति या बाजार पूर्वानुमान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
व्यापारिक संबंध भी बढ़ रहे
भारत और जापान के बीच हाई-टेक सहयोग ऐसे समय में बढ़ रहा है जब दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार भी महत्वपूर्ण स्तर पर है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत-जापान द्विपक्षीय व्यापार 27.47 अरब डॉलर रहा। इसमें जापान का भारत को निर्यात 21.43 अरब डॉलर और भारत का जापान को निर्यात 6.04 अरब डॉलर रहा।
बढ़ते व्यापार के साथ हाई-टेक निवेश और सप्लाई चेन सहयोग दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नया आयाम दे सकते हैं।
हाई-टेक साझेदारी का अगला चरण
भारत और जापान के बीच सहयोग अब केवल रेल, मेट्रो और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं तक सीमित नहीं रह गया है। सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों की आर्थिक और तकनीकी प्राथमिकताओं को जोड़ रहा है।
भारत के लिए जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और औद्योगिक सप्लाई चेन तक पहुंच महत्वपूर्ण हो सकती है, जबकि जापानी कंपनियों के लिए भारत का बड़ा बाजार और तेजी से विकसित होता तकनीकी इकोसिस्टम नए कारोबारी अवसर पैदा कर रहा है।
आने वाले वर्षों में यह साझेदारी कितनी गहराई तक जाती है, इसका आकलन खास तौर पर सेमीकंडक्टर परियोजनाओं, अंतरिक्ष मिशनों और वास्तविक औद्योगिक निवेश की प्रगति से किया जाएगा।
