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8 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अभिनेता ने गुरुवार सुबह गोवा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था। अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने भी निधन की पुष्टि की।

महाराष्ट्र सरकार ने अभिनेता के सिनेमा और रंगमंच में योगदान को देखते हुए उनके अंतिम संस्कार को राजकीय सम्मान के साथ कराने का फैसला किया है। उनका अंतिम संस्कार पुणे के पास डोंजे स्थित उनके फार्महाउस में किया जाएगा।

गोवा स्थित घर में बिगड़ी तबीयत

रिपोर्टों के मुताबिक, नाना पाटेकर को गुरुवार तड़के अचानक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हुई। वह गोवा के डोना पाउला स्थित अपने घर में थे। करीब 2:30 बजे उन्होंने एक मित्र को अपनी तबीयत खराब होने की जानकारी भी दी थी। बाद में उन्हें घर पर बेहोश पाया गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

अस्पताल में चिकित्सकों ने करीब 45 मिनट तक लगातार CPR किया। इसके बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और करीब सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक मृत्यु का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया है।

महाराष्ट्र सरकार देगी राजकीय सम्मान

नाना पाटेकर के निधन के बाद महाराष्ट्र सरकार ने उनके अंतिम संस्कार को पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ कराने का निर्णय लिया। महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि यह फैसला अभिनेता के मराठी और हिंदी सिनेमा तथा रंगमंच में महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए लिया गया है।

आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम संस्कार डोंजे में गुरुवार शाम किया जाना है। उनका यह फार्महाउस उनके लिए विशेष महत्व रखता था।

पांच दशक से ज्यादा लंबा रहा फिल्मी सफर

नाना पाटेकर का वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने 1970 के दशक के अंत में फिल्मों में कदम रखा और आगे चलकर हिंदी तथा मराठी सिनेमा के सबसे अलग पहचान रखने वाले अभिनेताओं में शामिल हुए।

उनका फिल्मी सफर करीब पांच दशक तक चला। उन्होंने गंभीर भूमिकाओं से लेकर एक्शन, सामाजिक फिल्मों और कॉमेडी तक अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।

उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अपहरण’, ‘अब तक छप्पन’, ‘राजनीति’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्में शामिल हैं।

उनकी दमदार आवाज, तीखे संवाद बोलने की शैली और किरदारों में गहराई लाने की क्षमता उनकी पहचान बन गई थी।

‘क्रांतिवीर’ और ‘परिंदा’ ने दिलाई खास पहचान

नाना पाटेकर को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। ‘परिंदा’ में उनके अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। ‘क्रांतिवीर’ में उनकी भूमिका ने भी उन्हें व्यापक लोकप्रियता दिलाई और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

इसके अलावा ‘अग्निसाक्षी’ के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इस तरह वह तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पाने वाले अभिनेताओं में शामिल रहे।

मराठी सिनेमा में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली।

‘वेलकम’ के उदय शेट्टी से नई पीढ़ी में भी लोकप्रिय

नाना पाटेकर की लोकप्रियता केवल गंभीर और पुरस्कार विजेता भूमिकाओं तक सीमित नहीं रही। फिल्म ‘वेलकम’ में उनके किरदार उदय शेट्टी ने उन्हें युवा दर्शकों के बीच भी बेहद लोकप्रिय बना दिया।

उनकी संवाद अदायगी और कॉमिक टाइमिंग ने इस किरदार को हिंदी सिनेमा के यादगार हास्य पात्रों में शामिल कर दिया। यही वजह रही कि अलग-अलग पीढ़ियों के दर्शक उनके अभिनय से जुड़े रहे।

रंगमंच से शुरू हुई थी पहचान

फिल्मों में आने से पहले नाना पाटेकर ने मराठी रंगमंच से अपनी पहचान बनाई थी। थिएटर ने उनके अभिनय की शैली और संवाद अदायगी को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बाद में उन्होंने निर्देशन में भी हाथ आजमाया और ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ जैसी फिल्म बनाई। सेना और सैनिकों की जिंदगी पर आधारित इस फिल्म में उन्होंने अभिनय के साथ निर्देशन भी किया था।

सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे

नाना पाटेकर केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर भी काम किया। Naam Foundation के जरिए उन्होंने महाराष्ट्र में जल संरक्षण और किसानों की सहायता से जुड़े कार्यों में योगदान दिया।

उनके सामाजिक कार्यों को भी उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता रहा है।

पद्म श्री से भी सम्मानित

सिनेमा और कला के क्षेत्र में उनके योगदान को भारत सरकार ने भी सम्मानित किया। नाना पाटेकर को 2013 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उनके अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के अलावा कई अन्य पुरस्कार भी मिले।

अंतिम फिल्म और आखिरी सार्वजनिक उपस्थिति

नाना पाटेकर हाल के वर्षों में भी फिल्मों में सक्रिय रहे। उनकी अंतिम फिल्मों में ‘Subedaar’ का नाम शामिल है, जिसमें उन्होंने अनिल कपूर के साथ काम किया था।

निधन से कुछ दिन पहले, 4 अक्टूबर को वह गोवा के डोना पाउला में आयोजित एक कार्यक्रम में नजर आए थे। यह उनकी आखिरी सार्वजनिक उपस्थिति बनी।

भारतीय सिनेमा ने खोया अलग अंदाज वाला कलाकार

नाना पाटेकर का निधन हिंदी और मराठी सिनेमा के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है। करीब पांच दशक के करियर में उन्होंने ऐसे किरदार निभाए जिनमें उनकी आवाज, भाव-भंगिमा और संवाद अदायगी ने उन्हें बाकी कलाकारों से अलग पहचान दी।

गंभीर भूमिकाओं से लेकर कॉमेडी तक, थिएटर से फिल्मों और अभिनय से सामाजिक कार्यों तक नाना पाटेकर की यात्रा बहुआयामी रही। उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया जिसकी अभिनय शैली और संवाद बोलने का अंदाज लंबे समय तक दर्शकों की स्मृति में बना रहेगा।

Bharat Baani Bureau

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