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9 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी श्रम विभाग ने Cognizant, Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Wipro, HCL Technologies और Capgemini सहित प्रमुख आईटी कंपनियों को Permanent Labor Certification (PERM) कार्यक्रम से निलंबित कर दिया है। अमेरिकी टेक कंपनियों Microsoft और Adobe पर भी कार्रवाई की गई है। इस कदम से इन कंपनियों के माध्यम से अमेरिका में स्थायी निवास पाने की प्रक्रिया में जुटे भारतीय पेशेवरों को देरी का सामना करना पड़ सकता है। <Cite refs={[“turn989712search0″,”turn989712search3″,”turn989712search6”]}/>

अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि कुछ कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के दौरान ऐसी प्रथाओं का इस्तेमाल किया, जिनसे अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसर प्रभावित हुए। प्रशासन ने वीजा और श्रम प्रमाणन प्रणाली में कथित गड़बड़ियों की जांच के बीच यह कदम उठाया है। हालांकि, ये आरोप हैं और इन्हें संबंधित कंपनियों के खिलाफ अंतिम रूप से साबित हुए निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। <Cite refs={[“turn989712search1″,”turn989712search8”]}/>

क्या है PERM कार्यक्रम?

PERM यानी Permanent Labor Certification अमेरिका में रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके तहत नियोक्ता को आम तौर पर यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है और विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन तथा कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

श्रम विभाग से प्रमाणन मिलने के बाद नियोक्ता ग्रीन कार्ड की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है। इस प्रक्रिया में देरी होने से विदेशी कर्मचारी के स्थायी निवास के आवेदन की समय-सीमा भी प्रभावित हो सकती है। <Cite refs={[“turn989712search0″,”turn989712search3”]}/>

अमेरिकी प्रशासन की ताजा कार्रवाई के तहत संबंधित कंपनियों के लिए नए PERM आवेदन स्वीकार करने और लंबित आवेदनों की प्रक्रिया रोकने की बात कही गई है। इसका मतलब यह है कि प्रभावित कंपनियों के उन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया आगे बढ़ने में बाधा आ सकती है, जिनके आवेदन अभी PERM चरण तक पहुंचे नहीं हैं या जिनके आवेदन इसी चरण में लंबित हैं। <Cite refs={[“turn989712search3″,”turn989712search6”]}/>

ट्रंप प्रशासन ने क्यों की कार्रवाई?

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और श्रम विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार विदेशी श्रम कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग पर सख्ती करना चाहती है। प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियों ने विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए ऐसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया, जिनसे अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसरों को नुकसान पहुंच सकता है।

श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने प्रमुख आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों के खिलाफ निलंबन की घोषणा की। इस कार्रवाई को ट्रंप प्रशासन की उस व्यापक नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत अमेरिकी नागरिकों को रोजगार में प्राथमिकता देने और विदेशी कर्मचारियों से संबंधित कार्यक्रमों की जांच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। <Cite refs={[“turn989712search1″,”turn989712search8”]}/>

प्रशासन ने कथित धोखाधड़ी, वेतन संबंधी अनियमितताओं और अमेरिकी कर्मचारियों के संभावित विस्थापन जैसे मुद्दे उठाए हैं। लेकिन इन आरोपों की जांच और कानूनी प्रक्रिया का परिणाम अलग विषय है। संबंधित कंपनियों पर कार्रवाई को अपने आप में प्रत्येक आरोप का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।

भारतीय आईटी पेशेवरों पर क्या पड़ेगा असर?

इस फैसले का असर खास तौर पर उन भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है, जो H-1B वर्क वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं और अपनी कंपनी के माध्यम से रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

यदि किसी कर्मचारी के लिए PERM आवेदन अभी दाखिल नहीं हुआ है, तो निलंबन जारी रहने के दौरान उसकी प्रक्रिया शुरू करने में देरी हो सकती है। इससे रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड की कतार में उसकी स्थिति तय करने वाली प्राथमिकता तारीख यानी priority date हासिल करने में भी देर हो सकती है। <Cite refs={[“turn989712search0″,”turn989712search3”]}/>

भारत के नागरिकों के लिए यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि रोजगार-आधारित अमेरिकी ग्रीन कार्ड की मांग उपलब्ध संख्या से काफी अधिक है। पहले से लंबी प्रतीक्षा अवधि के कारण प्रक्रिया के किसी एक चरण में रुकावट भी आवेदकों की योजनाओं को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि, इसका असर हर भारतीय आईटी कर्मचारी पर एक जैसा नहीं होगा। कर्मचारी की मौजूदा इमिग्रेशन स्थिति, आवेदन किस चरण में है और उस पर लागू नियमों के आधार पर परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं।

क्या H-1B वीजा भी रद्द हो जाएगा?

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। PERM कार्यक्रम से निलंबन का मतलब यह नहीं है कि संबंधित कंपनियों के सभी कर्मचारियों के H-1B वीजा अपने आप रद्द हो गए हैं।

H-1B अमेरिका में विशेष कौशल वाले पेशों में काम करने के लिए दिया जाने वाला अस्थायी गैर-आप्रवासी वीजा है। इसके विपरीत, PERM रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके जरिए विदेशी कर्मचारी स्थायी निवास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। दोनों की कानूनी प्रक्रियाएं अलग हैं। <Cite refs={[“turn989712search0″,”turn989712search3”]}/>

फिर भी, कुछ H-1B कर्मचारियों के लिए अप्रत्यक्ष जोखिम पैदा हो सकता है। अमेरिकी नियमों के तहत, निर्धारित शर्तें पूरी होने पर ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में समय पर कदम उठाने वाले कुछ कर्मचारी अपने H-1B प्रवास की सामान्य छह वर्ष की सीमा के बाद भी विस्तार पाने के पात्र हो सकते हैं। यदि PERM प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पाती, तो ऐसे कर्मचारियों के लिए आगे की योजना बनाना अधिक जटिल हो सकता है। <Cite refs={[“turn989712search1″,”turn989712search3”]}/>

इसलिए प्रभावित कर्मचारियों को अपनी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार योग्य अमेरिकी इमिग्रेशन वकील से सलाह लेनी चाहिए।

क्या सभी लंबित ग्रीन कार्ड आवेदन प्रभावित होंगे?

नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, कार्रवाई विशेष रूप से संबंधित कंपनियों के PERM श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से जुड़ी है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका में हर रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड आवेदन या सभी कंपनियों के कर्मचारियों की प्रक्रिया रोक दी गई है।

जिन कर्मचारियों के आवेदन पहले ही PERM चरण से आगे बढ़ चुके हैं, उनकी स्थिति उन लोगों से अलग हो सकती है जिनके लिए अभी श्रम प्रमाणन दाखिल होना बाकी है। वास्तविक असर संबंधित आदेश की शर्तों, आवेदन की स्थिति और लागू इमिग्रेशन नियमों पर निर्भर करेगा। <Cite refs={[“turn989712search1″,”turn989712search3”]}/>

कंपनियों पर कार्रवाई का व्यापक महत्व

यह कदम अमेरिकी टेक्नोलॉजी और आईटी सेवा क्षेत्र में विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति पर बढ़ती सरकारी निगरानी को दर्शाता है। भारतीय कंपनियां लंबे समय से अमेरिका में तकनीकी सेवाएं देती रही हैं और उनके कई कर्मचारी अस्थायी वर्क वीजा या रोजगार-आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया के माध्यम से वहां काम करते हैं।

फिलहाल निलंबन की अवधि और जांच के अंतिम परिणाम महत्वपूर्ण होंगे। यह भी देखना होगा कि संबंधित कंपनियां प्रशासनिक कार्रवाई को किस तरह चुनौती देती हैं या जांच में उठाए गए मुद्दों का जवाब कैसे देती हैं।

भारतीय कर्मचारियों को अभी क्या करना चाहिए?

प्रभावित कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को सबसे पहले अपनी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का वर्तमान चरण पता करना चाहिए। उन्हें कंपनी की इमिग्रेशन टीम से लिखित जानकारी लेनी चाहिए कि उनका PERM आवेदन दाखिल हुआ है या नहीं और निलंबन का उनकी व्यक्तिगत फाइल पर क्या असर पड़ सकता है।

H-1B की वैधता समाप्त होने के करीब पहुंच रहे कर्मचारियों को विशेष रूप से समय रहते कानूनी सलाह लेनी चाहिए। केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर नौकरी छोड़ना, अमेरिका से बाहर जाने का निर्णय लेना या यह मान लेना कि वीजा रद्द हो गया है, उचित नहीं होगा।

निष्कर्ष: अमेरिका की इस कार्रवाई से Cognizant, Infosys, TCS, Wipro, HCL Technologies और Capgemini सहित कई आईटी कंपनियों के माध्यम से ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। Microsoft और Adobe भी कार्रवाई के दायरे में हैं। लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव प्रत्येक कर्मचारी की इमिग्रेशन स्थिति और PERM आवेदन के चरण पर निर्भर करेगा। फिलहाल इसे सभी H-1B वीजा या सभी ग्रीन कार्ड पर लागू पूर्ण प्रतिबंध के रूप में समझना सही नहीं है।

Bharat Baani Bureau

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