9 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): भारत में ट्रैप शूटिंग की बढ़ती सफलता के बीच राष्ट्रीय टीम के विदेशी कोच और लंदन ओलंपिक 2012 के स्वर्ण पदक विजेता पीटर विल्सन ने देश में शूटिंग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि भारत में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन अधिक से अधिक युवाओं को इस खेल से जोड़ने के लिए देशभर में आधुनिक शूटिंग रेंज और प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित करनी होंगी। <Cite refs={[“turn211043search0″,”turn211043search5”]}/>
विल्सन के अनुसार, यदि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करना चाहता है और भविष्य में ओलंपिक पदक जीतने की अपनी संभावनाओं को मजबूत करना चाहता है, तो प्रतिभा की पहचान करने के साथ-साथ उसे विकसित करने के लिए व्यवस्थित अवसर भी उपलब्ध कराने होंगे।
एशियन गेम्स में भारतीय ट्रैप निशानेबाजों की सफलता
भारत के ट्रैप शूटिंग खिलाड़ियों ने 2026 एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया। नीरू धांडा ने महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। वह एशियन गेम्स में इस स्पर्धा में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
नीरू ने फाइनल में 30 में से 28 निशाने साधे और चीन की सुन युनोंग को पीछे छोड़कर स्वर्ण पदक हासिल किया। इस उपलब्धि ने भारतीय ट्रैप शूटिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। <Cite refs={[“turn211043search8″,”turn211043search9”]}/>
नीरू की सफलता से पहले भी भारतीय निशानेबाजों ने इस खेल में अपनी क्षमता दिखाई थी। उन्होंने जुलाई 2026 में इटली के लोनाटो में आयोजित ISSF शॉटगन विश्व कप में महिलाओं की ट्रैप स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता था। वह इस प्रतियोगिता में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। <Cite refs={[“turn211043search4″,”turn211043search10”]}/>
इन उपलब्धियों ने यह उम्मीद बढ़ाई है कि भारत ट्रैप शूटिंग में भी उन देशों को चुनौती दे सकता है जिनकी इस खेल में लंबे समय से मजबूत परंपरा रही है।
प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए सुविधाओं का विस्तार जरूरी
विल्सन का मानना है कि भारत में शूटिंग के लिए उपलब्ध सुविधाओं का विस्तार करना महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से ही सही प्रशिक्षण, अभ्यास और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के अवसर मिलने चाहिए।
भारत में एयर राइफल और एयर पिस्टल जैसे खेलों में प्रवेश के अवसर अपेक्षाकृत अधिक सुलभ हैं, जबकि शॉटगन शूटिंग के लिए विशेष रेंज, उपकरण और प्रशिक्षण की जरूरत होती है। इससे कई संभावित खिलाड़ियों के लिए इस खेल में प्रवेश करना मुश्किल हो सकता है।
विल्सन ने कहा है कि देश में ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जो नए खिलाड़ियों को शुरुआती प्रशिक्षण से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने में मदद करे। उनके अनुसार, सरकार, खेल संस्थाओं और राष्ट्रीय राइफल संघ के बीच बेहतर समन्वय से इस दिशा में प्रगति की जा सकती है। <Cite refs={[“turn211043search5″,”turn211043search11”]}/>
यूरोपीय देशों से सीखने की जरूरत
विल्सन ने शूटिंग में मजबूत परंपरा रखने वाले देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि बेहतर सुविधाएं खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास और प्रतिस्पर्धा का अवसर देती हैं। इटली, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में शॉटगन शूटिंग का लंबा इतिहास रहा है और वहां उपलब्ध प्रशिक्षण ढांचा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने में मदद करता है। <Cite refs={[“turn211043search0″,”turn211043search11”]}/>
भारत में भी यदि अधिक शूटिंग रेंज बनाई जाती हैं और उन्हें खिलाड़ियों के लिए सुलभ बनाया जाता है, तो छोटे शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, केवल सुविधाएं बनाना पर्याप्त नहीं होगा। खिलाड़ियों को योग्य कोच, आधुनिक उपकरण, फिटनेस प्रशिक्षण, पोषण संबंधी मार्गदर्शन और मानसिक तैयारी की सुविधा भी उपलब्ध करानी होगी।
नीरू धांडा और अन्य खिलाड़ियों से बढ़ी उम्मीदें
विल्सन ने भारतीय निशानेबाजों की तकनीकी क्षमता और मेहनत की सराहना की है। नीरू धांडा की हालिया उपलब्धियों ने टीम में आत्मविश्वास बढ़ाया है। वहीं, भारतीय ट्रैप टीम के अन्य खिलाड़ियों से भी लगातार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
विल्सन के प्रशिक्षण दृष्टिकोण में तकनीक के साथ-साथ खिलाड़ी की फिटनेस, पोषण और मानसिक तैयारी को भी महत्व दिया जाता है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने के लिए खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करना जरूरी है। <Cite refs={[“turn211043search4″,”turn211043search8”]}/>
ओलंपिक की तैयारी पर नजर
भारत का अगला बड़ा लक्ष्य लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 में बेहतर प्रदर्शन करना है। इसके लिए खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव, निरंतर अभ्यास और उच्च स्तर का प्रशिक्षण देना महत्वपूर्ण होगा।
विल्सन के मुताबिक, किसी एक प्रतियोगिता में पदक जीतना महत्वपूर्ण है, लेकिन स्थायी सफलता के लिए मजबूत प्रणाली बनाना जरूरी है। प्रतिभा की पहचान, सुविधाओं का विस्तार और खिलाड़ियों को लंबे समय तक सहयोग देना इस प्रक्रिया के अहम हिस्से हैं। <Cite refs={[“turn211043search4″,”turn211043search5”]}/>
देशभर में सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत
पीटर विल्सन का संदेश स्पष्ट है कि भारत में ट्रैप शूटिंग की सफलता को आगे बढ़ाने के लिए अधिक खिलाड़ियों को इस खेल से जोड़ना होगा। इसके लिए केवल राष्ट्रीय स्तर के प्रतिभाशाली निशानेबाजों पर निर्भर रहने के बजाय देश के विभिन्न हिस्सों में प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित करनी होंगी।
यदि शुरुआती स्तर पर खिलाड़ियों को अभ्यास के बेहतर अवसर मिलते हैं, तो भविष्य में भारतीय टीम के पास अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए बड़ा और मजबूत प्रतिभा आधार तैयार हो सकता है। नीरू धांडा की उपलब्धियां इस दिशा में उत्साह बढ़ाती हैं, लेकिन लगातार सफलता के लिए बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण व्यवस्था में दीर्घकालिक निवेश जरूरी रहेगा।
