12 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) और ऑटिज्म को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच एक सरकारी समीक्षा में इनके जरूरत से ज्यादा निदान (Over-diagnosis) की आशंका जताई गई है। समीक्षा में इस बात पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई है कि इन स्थितियों की पहचान करते समय वैज्ञानिक मानकों, विशेषज्ञों के आकलन और प्रत्येक व्यक्ति की जरूरतों को उचित महत्व दिया जाए।
ADHD और ऑटिज्म न्यूरोडेवलपमेंटल स्थितियां हैं, जो व्यक्ति के मस्तिष्क के विकास, व्यवहार, संचार, ध्यान और रोजमर्रा की गतिविधियों को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर सकती हैं। इनकी पहचान में वृद्धि होने के पीछे जागरूकता बढ़ना, बेहतर जांच सुविधाएं और पहले पहचान में न आ पाने वाले मामलों का सामने आना भी संभावित कारण हैं।
हालांकि, निदान की संख्या बढ़ने का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि गलत निदान भी बढ़ रहे हैं। इस अंतर को समझना जरूरी है।
क्या है ADHD और ऑटिज्म?
ADHD एक न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को ध्यान केंद्रित करने, आवेगों को नियंत्रित करने या अत्यधिक सक्रियता से जुड़ी कठिनाइयां हो सकती हैं। इसके लक्षण बच्चों के साथ-साथ वयस्कों में भी दिखाई दे सकते हैं।
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) व्यक्ति के सामाजिक संचार, बातचीत और व्यवहार के कुछ पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम में शामिल लोगों की क्षमताएं, अनुभव और सहायता की जरूरतें एक-दूसरे से काफी अलग हो सकती हैं।
दोनों स्थितियों के लक्षण कुछ अन्य परिस्थितियों से मिलते-जुलते हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, नींद की समस्या, चिंता, तनाव या सीखने से जुड़ी कठिनाइयां भी ध्यान और व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए सही निदान के लिए विस्तृत मूल्यांकन महत्वपूर्ण है।
जरूरत से ज्यादा निदान को लेकर चिंता क्यों?
किसी स्थिति का जरूरत से ज्यादा निदान तब कहा जा सकता है, जब ऐसे व्यक्ति को भी बीमारी या विकार का निदान दे दिया जाए जिसे संबंधित मानकों के अनुसार इसकी पुष्टि नहीं होती, या जब निदान से वास्तविक लाभ की तुलना में नुकसान की आशंका अधिक हो।
ADHD और ऑटिज्म के मामले में केवल एक व्यवहार, ऑनलाइन प्रश्नावली या संक्षिप्त जांच के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। विशेषज्ञ आमतौर पर व्यक्ति के विकास संबंधी इतिहास, अलग-अलग परिस्थितियों में दिखाई देने वाले लक्षणों और दैनिक जीवन पर उनके प्रभाव का आकलन करते हैं।
सरकारी समीक्षा से जुड़ी चिंता का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि निदान की प्रक्रिया विश्वसनीय हो और जरूरतमंद लोगों को समय पर सही सहायता मिल सके।
गलत निदान से क्या हो सकती हैं समस्याएं?
यदि किसी व्यक्ति का गलत निदान हो जाता है, तो उसे ऐसी सहायता या उपचार मिल सकता है जिसकी उसे जरूरत नहीं है। इससे समय, संसाधनों और स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। कुछ मामलों में वास्तविक समस्या की पहचान में भी देरी हो सकती है।
दूसरी ओर, यदि ADHD या ऑटिज्म से प्रभावित व्यक्ति का निदान नहीं हो पाता, तो उसे शिक्षा, रोजगार, सामाजिक संबंधों और रोजमर्रा के जीवन में आवश्यक सहायता मिलने में कठिनाई हो सकती है।
इसलिए चुनौती केवल अनावश्यक निदान को रोकने की नहीं, बल्कि सही निदान और उचित सहायता के बीच संतुलन बनाए रखने की भी है।
विशेषज्ञ मूल्यांकन क्यों जरूरी है?
ADHD और ऑटिज्म की पहचान प्रशिक्षित स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार की जानी चाहिए। मूल्यांकन में व्यक्ति के लक्षणों की अवधि, विकास संबंधी इतिहास, विभिन्न परिस्थितियों में उनके प्रभाव और अन्य संभावित कारणों पर विचार किया जाता है।
माता-पिता, शिक्षकों और परिवार के सदस्यों से मिली जानकारी भी विशेष रूप से बच्चों के मूल्यांकन में उपयोगी हो सकती है। हालांकि, किसी एक व्यक्ति की राय को अकेले अंतिम निदान का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
इसके साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य और न्यूरोडेवलपमेंटल सेवाओं तक पहुंच आसान बनाना भी जरूरी है, ताकि जिन लोगों को सहायता की आवश्यकता है, वे लंबे इंतजार के बिना उचित मूल्यांकन करा सकें।
जागरूकता और वैज्ञानिक जांच के बीच संतुलन जरूरी
ADHD और ऑटिज्म के बारे में बढ़ती जागरूकता से उन लोगों को मदद मिल सकती है, जिनकी समस्याओं को पहले समझा नहीं जाता था। लेकिन जागरूकता के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि सामान्य व्यवहार, अस्थायी कठिनाइयों और वास्तविक न्यूरोडेवलपमेंटल स्थितियों के बीच अंतर सही ढंग से पहचाना जाए।
कुल मिलाकर, सरकारी समीक्षा से जुड़ी चिंता इस बात को रेखांकित करती है कि ADHD और ऑटिज्म के निदान में वैज्ञानिक मानकों, प्रशिक्षित विशेषज्ञों और व्यक्ति की वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सही प्रक्रिया से अनावश्यक निदान के जोखिम को कम करने के साथ उन लोगों को भी समय पर सहायता दी जा सकती है जिन्हें इसकी जरूरत है।
