19 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : मुंबई के जुहू इलाके में रविवार शाम बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई गोलीबारी ने फिल्म इंडस्ट्री की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। अभिनेता इस हमले में गोली लगने से सुरक्षित बच गए, लेकिन उनके ड्राइवर और पास मौजूद एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की खबर है। घटना के बाद मुंबई पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इस वारदात ने बॉलीवुड और संगठित अपराध के बीच उस पुराने दौर की यादें भी ताजा कर दी हैं, जब फिल्मी हस्तियों को धमकियां देने, फिरौती मांगने और गोलीबारी के जरिए दबाव बनाने की घटनाएं सामने आती थीं।
जुहू में कैसे हुई गोलीबारी?
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घटना रविवार, 18 अक्टूबर की शाम करीब सात बजे जुहू के पुष्पा नरसी पार्क, जिसे जमनाबाई नर्सरी के नाम से भी जाना जाता है, के पास हुई। टाइगर श्रॉफ एक कार्यक्रम के बाद वहां से निकल रहे थे, तभी मोटरसाइकिल पर आए हमलावरों ने उनकी कार को निशाना बनाकर गोलियां चलाईं।
रिपोर्टों के मुताबिक, कार पर सात राउंड तक फायरिंग की गई। हालांकि, कुछ शुरुआती रिपोर्टों में गोलियों की संख्या अलग बताई गई है। टाइगर को गोली लगने की सूचना नहीं है। उनके ड्राइवर को हाथ में गोली लगी, जबकि मौके पर मौजूद एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संदिग्ध हमलावरों की तस्वीरें सामने आई हैं और वारदात के बाद मोटरसाइकिल को अंधेरी पश्चिम रेलवे स्टेशन के पास छोड़े जाने की जानकारी मिली है। जांच एजेंसियां हमलावरों की पहचान, उनके भागने के रास्ते और हमले के संभावित मकसद का पता लगाने में जुटी हैं।
लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के नाम से जिम्मेदारी का दावा
घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक संदेश सामने आया, जिसमें कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े लोगों ने गोलीबारी की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। रिपोर्टों में अनिल पंडित और हरमन संधू के नाम सामने आए हैं। कुछ संदेशों में अभिनेता सलमान खान से जुड़े लोगों के साथ काम करने को लेकर धमकी दिए जाने की बात भी कही गई है।
हालांकि, किसी गिरोह के नाम से जिम्मेदारी लेने वाला सोशल मीडिया संदेश अपने आप में उसकी संलिप्तता का प्रमाण नहीं होता। पुलिस को यह सत्यापित करना होगा कि संदेश वास्तविक है या नहीं, उसमें नामित व्यक्तियों की भूमिका क्या है और गोलीबारी के पीछे असल वजह क्या थी। फिलहाल कथित गिरोह की भूमिका को जांच के निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
बॉलीवुड और अंडरवर्ल्ड का पुराना संबंध
मुंबई के अंडरवर्ल्ड और हिंदी फिल्म उद्योग के बीच संबंधों का इतिहास कई दशक पुराना है। 1960 और 1970 के दशक में कुछ अपराध जगत से जुड़े लोगों के फिल्मी हस्तियों के साथ संपर्क और फिल्म कारोबार में वित्तीय भागीदारी की खबरें सामने आती रही थीं। बाद के वर्षों में यह संबंध कई मामलों में धमकियों, जबरन वसूली और हिंसा से जुड़ गया।
1980 और 1990 के दशक में फिल्म निर्माण, वितरण अधिकारों और कलाकारों से जुड़े फैसलों पर आपराधिक नेटवर्क के दबाव की खबरें व्यापक रूप से चर्चा में रहीं। फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को फोन पर धमकियां देने, सुरक्षा की मांग करने और पुलिस से संपर्क करने की घटनाएं सामने आईं। कुछ मामलों में हमले भी हुए, जिनका असर पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर पड़ा।
1997 में संगीत कंपनी टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की हत्या ने फिल्म और संगीत उद्योग को गहरा झटका दिया था। इसके बाद भी फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आईं। निर्देशक राकेश रोशन 2000 में गोलीबारी में घायल हुए थे और उस दौर में फिल्म जगत से जुड़े कई लोगों ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग की थी। इन घटनाओं ने स्पष्ट किया कि संगठित अपराध का प्रभाव केवल आर्थिक वसूली तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका इस्तेमाल डर पैदा करने के लिए भी किया जाता था।
हाल के वर्षों में फिर बढ़ी चिंता
बॉलीवुड हस्तियों के खिलाफ धमकियों और गोलीबारी की घटनाएं हाल के वर्षों में भी सामने आई हैं। अप्रैल 2024 में अभिनेता सलमान खान के बांद्रा स्थित आवास के बाहर गोलीबारी हुई थी। इसके बाद फिल्म उद्योग से जुड़े अन्य लोगों और कारोबारों के आसपास सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी। 2025 और 2026 में कुछ अन्य चर्चित हस्तियों से संबंधित गोलीबारी और धमकी के मामलों ने इस बहस को फिर तेज किया। <Cite refs={[“turn507375search0″,”turn507375search9”]}/>
हालांकि, हर घटना को एक ही आपराधिक नेटवर्क से जोड़ना जांच के बिना उचित नहीं है। प्रत्येक मामले में हमले का मकसद, आरोपियों की पहचान और कथित गिरोहों की भूमिका अलग-अलग साक्ष्यों के आधार पर स्थापित की जानी चाहिए।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई गोलीबारी ने सार्वजनिक स्थानों पर मशहूर हस्तियों की सुरक्षा और पुलिस की त्वरित कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए हैं। घटना के समय आसपास लोगों की मौजूदगी और हमलावरों का वहां से निकल जाना जांच के अहम पहलू हैं। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हमले की पहले से योजना बनाई गई थी या नहीं।
फिल्म इंडस्ट्री के लिए यह घटना एक बार फिर सुरक्षा प्रोटोकॉल मजबूत करने की जरूरत को सामने लाती है। कलाकारों, उनके कर्मचारियों और सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
फिलहाल जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि टाइगर श्रॉफ की कार को निशाना बनाने के पीछे कौन था और उसका मकसद क्या था। पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्य ही इन सवालों का विश्वसनीय जवाब दे सकेंगे। इस घटना ने भले ही बॉलीवुड के पुराने अंडरवर्ल्ड दौर की यादें ताजा कर दी हों, लेकिन मौजूदा मामले में जिम्मेदारी और मकसद का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही किया जा सकता है।
