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27 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : जापान ने भारत को एक ‘बेहद महत्वपूर्ण देश’ बताते हुए दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरणों और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। जापान की नई रक्षा श्वेतपत्र रिपोर्ट में भारत की भौगोलिक स्थिति, बढ़ती आर्थिक ताकत और सैन्य क्षमताओं को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया है। रिपोर्ट में भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के तहत रक्षा तकनीक सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों का अहम स्तंभ बताया गया है।

जापान की 616 पन्नों की वार्षिक रक्षा रिपोर्ट सोमवार को जारी की गई। इसमें कहा गया है कि भारत प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों के निकट स्थित है और मलक्का जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों के आसपास उसकी रणनीतिक स्थिति उसे क्षेत्रीय सुरक्षा में अहम भूमिका देती है। रिपोर्ट ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बताते हुए दक्षिण एशिया में उसके प्रभाव का भी उल्लेख किया।

रक्षा उपकरणों और तकनीक के हस्तांतरण पर जोर

जापान ने कहा है कि वह भारत के साथ रक्षा उपकरणों और तकनीक में सहयोग को महत्वपूर्ण मानता है। रिपोर्ट के अनुसार, जापान सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच समन्वय बढ़ाकर रक्षा उपकरणों और तकनीक के उपयुक्त अंतरराष्ट्रीय हस्तांतरण को प्रोत्साहित करेगा।

जापान लंबे समय तक रक्षा निर्यात पर कड़े प्रतिबंधों के लिए जाना जाता रहा है। वर्ष 2014 में उसने अपने रक्षा निर्यात ढांचे में ढील दी थी, हालांकि रक्षा तकनीक के हस्तांतरण पर अब भी कई नियंत्रण लागू हैं। भारत के साथ सहयोग बढ़ाने का संकेत जापान की रक्षा नीति में हो रहे बदलावों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारियों को मजबूत करने के प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

यूनिकॉर्न एंटीना परियोजना बनी सहयोग का प्रतीक

भारत और जापान के बीच रक्षा तकनीक सहयोग का प्रमुख उदाहरण यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना सिस्टम यानी ‘यूनिकॉर्न’ परियोजना है। यह एकीकृत संचार एंटीना प्रणाली जापान की मोगामी श्रेणी की युद्धपोतों पर इस्तेमाल की जाती है।

नवंबर 2024 में दोनों देशों ने इस प्रणाली के हस्तांतरण से संबंधित समझौता किया था। इसके बाद से इसके कार्यान्वयन की दिशा में समन्वय जारी है। जापान की रक्षा रिपोर्ट में इस परियोजना को द्विपक्षीय रक्षा उपकरण और तकनीक सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में रेखांकित किया गया है।

भारत के लिए ऐसी परियोजनाएं आधुनिक रक्षा प्रणालियों तक पहुंच और घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने का अवसर प्रदान कर सकती हैं। वहीं जापान के लिए भारत के साथ साझेदारी क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग और रक्षा उद्योगों के बीच संबंधों को विस्तार देने का माध्यम है।

डीआरडीओ और जापान की एजेंसी के बीच सहयोग

रिपोर्ट में भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और जापान की अधिग्रहण, प्रौद्योगिकी एवं लॉजिस्टिक्स एजेंसी (एटीएलए) के बीच सहयोग का भी उल्लेख किया गया है। दोनों पक्ष आधुनिक रक्षा तकनीकों के अनुसंधान और विकास में संभावित सहयोग के क्षेत्रों पर काम कर रहे हैं।

अगस्त 2026 में भारत और जापान के रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान दोनों देशों ने रक्षा अनुसंधान, तकनीकी सहयोग और रक्षा उद्योगों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई थी। दोनों पक्षों ने नौसैनिक जहाज निर्माण, डिजाइन, समुद्री सुरक्षा और जहाजों के रखरखाव जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की थी।

भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत जापानी तकनीकी विशेषज्ञता और भारतीय उत्पादन क्षमता को जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। इससे भविष्य में संयुक्त विकास और उत्पादन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, हालांकि किसी भी नई परियोजना का वास्तविक स्वरूप संबंधित समझौतों और तकनीकी जरूरतों पर निर्भर करेगा।

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