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27 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो): देश में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ने के बीच भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने कहा है कि इस व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार निवेश की जरूरत है। उन्होंने चुनिंदा UPI मर्चेंट लेनदेन पर न्यूनतम मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का समर्थन किया है। उनके मुताबिक, इससे बैंकों को तकनीकी ढांचे, कंप्यूटिंग क्षमता और धोखाधड़ी रोकने वाली प्रणालियों पर होने वाले खर्च को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

शेट्टी ने यह बात 26 अक्टूबर को मुंबई में आयोजित Business Standard BFSI Insight Summit 2026 के दौरान कही। उन्होंने बताया कि SBI अकेले UPI के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 40 करोड़ वित्तीय और गैर-वित्तीय लेनदेन संभालता है। इतने बड़े स्तर पर लेनदेन को सुरक्षित और सुचारु बनाए रखने के लिए बैंक को लगातार तकनीकी क्षमता बढ़ानी पड़ती है।

क्या है MDR और क्यों हो रही है चर्चा?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से लेनदेन की प्रोसेसिंग के लिए लिया जाता है। यह रकम भुगतान प्रक्रिया में शामिल बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं के बीच बांटी जा सकती है। SBI चेयरमैन के अनुसार, UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बैंकों को सर्वर क्षमता, साइबर सुरक्षा, रियल-टाइम निगरानी और धोखाधड़ी के जोखिमों से निपटने के लिए अधिक संसाधन लगाने पड़ रहे हैं।

शेट्टी ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में लगभग 98 प्रतिशत लेनदेन पर MDR नहीं लगेगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P लेनदेन को भी शुल्क से बाहर रखने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन से सीमित राजस्व जुटाकर डिजिटल भुगतान प्रणाली में आवश्यक निवेश को समर्थन देना है।

ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इस पर जोर

MDR को लेकर एक प्रमुख चिंता यह है कि कहीं व्यापारी इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डाल दें। इस सवाल पर शेट्टी ने कहा कि उपभोक्ताओं को अतिरिक्त शुल्क से बचाने के लिए सुरक्षा उपाय जरूरी हैं। उन्होंने व्यापारियों के साथ सेवा-स्तर समझौतों को मजबूत करने, शिकायत निवारण व्यवस्था बेहतर बनाने और लेनदेन की निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया।

उन्होंने यह भी बताया कि SBI, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI), व्यापारियों और मर्चेंट एक्वायरर्स के साथ मिलकर ऐसा मॉडल तैयार करने पर काम कर रहा है, जिससे MDR की लागत ग्राहकों तक पहुंचने से रोकी जा सके।

चुनिंदा बड़े लेनदेन पर शुल्क की चर्चा

रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित शुल्क ढांचे में ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR और अधिकतम ₹300 की सीमा का प्रावधान है। कुछ श्रेणियों, जैसे बिल भुगतान, ईंधन और शिक्षा, के लिए अलग निश्चित शुल्क का उल्लेख किया गया है। हालांकि, NPCI ने इस व्यवस्था को लागू करने की तारीख दिवाली के बाद तक टालने की जानकारी दी थी और संशोधित तारीख की घोषणा बाकी बताई गई।

इस मुद्दे पर अंतिम व्यवस्था और उसके क्रियान्वयन की शर्तें महत्वपूर्ण होंगी। शुल्क से जुड़ी स्पष्ट जानकारी, छोटे व्यापारियों के लिए उचित सुरक्षा और ग्राहकों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई डिजिटल भुगतान में भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी होगी।

डिजिटल भुगतान व्यवस्था के सामने नई चुनौती

UPI ने भारत में रोजमर्रा के भुगतान को आसान बनाया है, लेकिन लेनदेन की बढ़ती संख्या के साथ प्रणाली को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखना भी चुनौती बन रहा है। बैंकों का तर्क है कि तकनीकी ढांचे और जोखिम प्रबंधन पर होने वाले खर्च के लिए टिकाऊ वित्तीय मॉडल आवश्यक है। दूसरी ओर, उपयोगकर्ताओं और व्यापारियों के लिए कम लागत और सहज भुगतान व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

ऐसे में न्यूनतम MDR पर बहस का केंद्र यही है कि भुगतान प्रणाली में निवेश के लिए संसाधन कैसे जुटाए जाएं, जबकि आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। आने वाले समय में शुल्क की अंतिम शर्तें और ग्राहकों की सुरक्षा के लिए लागू किए जाने वाले उपाय इस व्यवस्था के प्रभाव को तय करेंगे।

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