29 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो): भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तेल की खरीद राष्ट्रीय हित के आधार पर की जाती है। मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया पूर्व विदेश सचिव और भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन श्रृंगला के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने बताया था कि अमेरिका ने अलग-अलग समय पर भारत से ईरान, वेनेजुएला और रूस से तेल खरीद घटाने का दबाव बनाया था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को नई दिल्ली में कहा कि भारतीय कंपनियां विदेश से ऊर्जा आयात का फैसला करते समय व्यावसायिक परिस्थितियों, बाजार की स्थिति, तकनीकी जरूरतों और वैश्विक हालात का आकलन करती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित से जुड़ी है।
जायसवाल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब श्रृंगला के बयान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भारत ने अमेरिकी दबाव के सामने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता किया। वहीं, श्रृंगला ने कांग्रेस पर उनके बयान को संदर्भ से अलग करके पेश करने का आरोप लगाया है।
श्रृंगला ने क्या कहा था?
श्रृंगला ने अक्टूबर में एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री केविन रुड के साथ चर्चा के दौरान भारत की ऊर्जा खरीद से जुड़े अनुभव साझा किए थे। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने पहले ईरानी तेल की खरीद कम करने और बाद में रूसी तेल की खरीद घटाने के लिए भारत से बातचीत की थी।
श्रृंगला के अनुसार, ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के दौरान भारत को कुछ समय तक छूट मिली थी, क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतें ईरानी कच्चे तेल से जुड़ी थीं और भारतीय रिफाइनरियों की तकनीकी आवश्यकताएं भी इसमें महत्वपूर्ण थीं। उन्होंने कहा कि बाद में यह छूट समाप्त हो गई और भारत ने ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया।
उन्होंने वेनेजुएला से तेल खरीद के मामले का भी उल्लेख किया और कहा कि वहां ऊर्जा क्षेत्र में भारतीय निवेश होने के बावजूद भारत से खरीद रोकने को कहा गया था। इसके बाद रूस से तेल खरीद को लेकर भी दबाव की बात सामने आई।
रूसी तेल बंद करने से वैश्विक कीमतों पर असर की चेतावनी
श्रृंगला ने रूसी तेल के आयात को अचानक रोकने के संभावित परिणामों पर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, भारत की ओर से बड़ी मात्रा में रूसी तेल की खरीद बंद होने से वैश्विक बाजार में आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने, भारत में महंगाई पर दबाव पड़ने और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होने का जोखिम है।
उन्होंने कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ तेल की आपूर्ति के स्रोतों में विविधता बनाए रखने की जरूरत है। उनके अनुसार, भारत ने अमेरिका के अलावा नाइजीरिया, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, गुयाना और अन्य देशों से भी ऊर्जा खरीद के विकल्प विकसित किए हैं।
कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बहस
श्रृंगला के बयान के बाद कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्र सरकार की ऊर्जा नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के दबाव में भारत को अपनी तेल खरीद नीति में बदलाव करना पड़ा और इससे देश की रणनीतिक स्वायत्तता पर सवाल उठते हैं।
दूसरी ओर, श्रृंगला ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनके बयान को संदर्भ से अलग करके राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित को भारत की विदेश नीति का प्रमुख आधार बताया।
ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का जोर
विदेश मंत्रालय की ताजा प्रतिक्रिया में किसी विशेष देश से तेल खरीदने या रोकने के फैसले पर सीधे टिप्पणी नहीं की गई। मंत्रालय ने इसके बजाय भारतीय कंपनियों की निर्णय प्रक्रिया और राष्ट्रीय हित पर जोर दिया। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की बड़ी ऊर्जा जरूरतें आयात के माध्यम से पूरी होती हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों तथा आपूर्ति में बदलाव का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
फिलहाल मंत्रालय के बयान से यह स्पष्ट होता है कि भारत अपनी ऊर्जा खरीद को बाजार की परिस्थितियों, तकनीकी जरूरतों और व्यापक वैश्विक हालात के आधार पर देखता है। अमेरिका के दबाव और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच तेल आयात नीति आने वाले समय में भी चर्चा का विषय बनी रह सकती है।
