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5 नवंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो): दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर होता जा रहा है। हवा की गुणवत्ता ‘वेरी पुअर’ श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 2 नवंबर से पूरे दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी GRAP-II को लागू कर दिया है। इसका उद्देश्य धूल, वाहनों और अन्य प्रदूषण स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना और हवा की गुणवत्ता को और बिगड़ने से रोकना है।

CAQM के मुताबिक, दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 31 अक्टूबर को 117 था, जो 1 नवंबर को बढ़कर 261 और 2 नवंबर को 324 पहुंच गया। इसके बाद वायु गुणवत्ता ‘वेरी पुअर’ श्रेणी में आ गई। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और हवा की कम गति के कारण प्रदूषकों के फैलने की रफ्तार धीमी हो गई, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ा।

GRAP-II का मतलब क्या है?

GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान प्रदूषण नियंत्रण के लिए तैयार की गई चरणबद्ध व्यवस्था है। इसमें दिल्ली के औसत AQI के आधार पर अलग-अलग स्तरों पर पाबंदियां और एहतियाती कदम लागू किए जाते हैं।

  • GRAP-I: AQI 201 से 300, यानी खराब श्रेणी।
  • GRAP-II: AQI 301 से 400, यानी बहुत खराब श्रेणी।
  • GRAP-III: AQI 401 से 450, यानी गंभीर श्रेणी।
  • GRAP-IV: AQI 450 से अधिक, यानी गंभीर से भी अधिक श्रेणी।

GRAP-II लागू होने का अर्थ है कि पहले चरण के उपाय भी जारी रहेंगे और उनके साथ अतिरिक्त प्रतिबंध लागू होंगे। इसका मकसद प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण करना है, न कि केवल लोगों को घरों के अंदर रहने की सलाह देना।

सड़कों की सफाई और निर्माण स्थलों पर सख्ती

GRAP-II के तहत सड़कों पर धूल कम करने के लिए मशीनों से नियमित सफाई, पानी का छिड़काव और जरूरत के अनुसार डस्ट सप्रेसेंट का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। प्रदूषण वाले प्रमुख स्थानों और यातायात जाम वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

निर्माण और तोड़फोड़ वाली जगहों पर धूल नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाएगा। निर्माण सामग्री को खुले में रखने, मलबा फैलाने और धूल उड़ने जैसी गतिविधियों पर कार्रवाई की जा सकती है। कचरे और निर्माण मलबे का नियमित उठान सुनिश्चित करने के साथ खुले में कचरा जलाने पर भी रोक को प्रभावी बनाया जाएगा।

होटलों, रेस्तरां और खुले भोजनालयों को तंदूर में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल से बचने तथा बिजली या गैस आधारित विकल्प अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। डीजल जनरेटर के इस्तेमाल को भी निर्धारित नियमों के तहत नियंत्रित किया जाएगा।

वाहन चालकों और दफ्तरों के लिए क्या बदलेगा?

वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ट्रैफिक पुलिस को प्रमुख सड़कों और चौराहों पर जाम नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की जांच तेज होगी और अधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुराने वाहनों से जुड़े मौजूदा नियमों का भी सख्ती से पालन कराया जाएगा।

सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए मेट्रो, रैपिड रेल और सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक बसों की सेवाएं बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। कार्यालयों को कर्मचारियों के लिए साझा परिवहन की व्यवस्था करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। पार्किंग शुल्क बढ़ाने का उद्देश्य निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करना है। सार्वजनिक और नगर निकाय कार्यालयों के समय में भी जरूरत के अनुसार बदलाव किया जा सकता है।

5 से 20 नवंबर तक अतिरिक्त एहतियाती कदम

GRAP-II के अलावा CAQM ने 5 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक कुछ अलग एहतियाती उपाय भी निर्धारित किए हैं। इनके तहत दिल्ली और गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद तथा गौतम बुद्ध नगर में सरकारी और निजी कार्यालयों को अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ कार्यालय से काम कराने तथा शेष कर्मचारियों को घर से काम करने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।

इसी अवधि में पूरे NCR में धूल पैदा करने वाली निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर प्रतिबंध भी लागू रहेगा। हालांकि रेलवे, मेट्रो, हवाई अड्डों, अस्पतालों, जलापूर्ति, स्वच्छता, राष्ट्रीय सुरक्षा और कुछ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परियोजनाओं को निर्धारित छूट दी गई है। ये निर्देश GRAP-II के सामान्य प्रावधानों से अलग हैं और इन्हें उसी के साथ समझना जरूरी है।

प्रदूषण से सेहत को क्या नुकसान हो सकता है?

AQI के 301 से 400 के बीच पहुंचने का अर्थ है कि हवा बहुत खराब है। इस स्तर पर लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

PM2.5 जैसे बेहद महीन कण सांस के जरिए फेफड़ों के अंदर तक पहुंच सकते हैं। इनके संपर्क में आने से खांसी, गले में जलन, सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और सीने में भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से हृदय और फेफड़ों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को अधिक जोखिम रहता है। प्रदूषण के दिनों में बच्चों को खुले मैदान में लंबे समय तक खेलने से बचाना और बुजुर्गों की बाहरी गतिविधियां सीमित रखना उपयोगी हो सकता है।

अपनी सेहत सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप प्रदूषण के स्तर को देखते हुए कुछ सावधानियां अपनाई जा सकती हैं:

  1. AQI बहुत खराब होने पर सुबह और शाम की लंबी आउटडोर वॉक या दौड़ से बचें।
  2. बाहर जाना जरूरी हो तो अच्छी फिटिंग वाला N95 या समकक्ष मास्क इस्तेमाल करें।
  3. घर और वाहन में खिड़कियां बंद रखें, खासकर प्रदूषण अधिक होने के समय।
  4. अस्थमा या अन्य सांस संबंधी बीमारी वाले लोग अपनी निर्धारित दवाएं और इनहेलर उपलब्ध रखें।
  5. घर में धूम्रपान, कचरा जलाने और अगरबत्ती या अन्य धुआं पैदा करने वाली गतिविधियों से बचें।
  6. बाहर से आने के बाद चेहरा और हाथ साफ करें तथा आंखों में जलन होने पर साफ पानी से धोएं।
  7. सांस लेने में अधिक परेशानी, सीने में दर्द या लगातार खांसी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।

क्या GRAP-II से प्रदूषण कम होगा?

GRAP-II के तहत उठाए गए कदम सड़क की धूल, वाहनों के उत्सर्जन और अन्य स्थानीय प्रदूषण स्रोतों को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि इनका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित एजेंसियां नियमों को कितनी प्रभावी तरीके से लागू करती हैं। मौसम, हवा की गति, तापमान और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला प्रदूषण भी दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

इसलिए केवल प्रतिबंध लागू करना पर्याप्त नहीं होगा। नियमित निगरानी, नियमों का पालन, सार्वजनिक परिवहन का बेहतर इस्तेमाल और प्रदूषण के स्थायी स्रोतों पर नियंत्रण जरूरी है। नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। प्रदूषण से बचाव के लिए व्यक्तिगत सावधानियों के साथ प्रशासन और समाज को मिलकर काम करना होगा।

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