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4 नवंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो)। दिवाली का त्योहार मिठाइयों के बिना अधूरा माना जाता है। बाजारों में काजू कतली, बेसन के लड्डू, बर्फी, रसगुल्ले, गुलाब जामुन और जलेबी जैसी मिठाइयों की भरमार रहती है। त्योहार के दौरान परिवार और दोस्तों के साथ मिठाइयों का आनंद लेना आम बात है, लेकिन इनके साथ आने वाली अतिरिक्त चीनी, कैलोरी और वसा को नजरअंदाज करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

अक्सर सवाल उठता है कि दिवाली के मिठाई के डिब्बे में कौन-सी मिठाई अपेक्षाकृत कम नुकसानदेह है। इसका जवाब केवल मिठाई के नाम पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उसकी सामग्री, बनाने के तरीके, मात्रा और उसमें इस्तेमाल की गई चीनी तथा घी की मात्रा भी अहम होती है।

काजू कतली या बेसन का लड्डू?

काजू कतली मुख्य रूप से काजू और चीनी से तैयार होती है। काजू में असंतृप्त वसा, कुछ प्रोटीन और खनिज पाए जाते हैं, लेकिन मिठाई में मिलाई गई चीनी इसकी कुल कैलोरी बढ़ा देती है। इसलिए इसे पौष्टिक मेवा समझकर अधिक मात्रा में खाना सही नहीं है।

दूसरी ओर बेसन का लड्डू बेसन, घी और चीनी से बनाया जाता है। बेसन में प्रोटीन और फाइबर की कुछ मात्रा होती है, लेकिन घी और चीनी के कारण इसकी ऊर्जा मात्रा भी अधिक हो सकती है। यदि लड्डू छोटे आकार का हो और उसमें चीनी तथा घी सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया गया हो, तो इसे नियंत्रित मात्रा में खाया जा सकता है।

रसगुल्ला और गुलाब जामुन में क्या अंतर?

रसगुल्ला आमतौर पर छेना और चीनी की चाशनी से बनता है। इसमें पानी की मात्रा अधिक होने के कारण समान वजन के कुछ अन्य घनी मिठाइयों की तुलना में कैलोरी कम हो सकती है। हालांकि, यह भी चीनी से भरपूर होता है और इसे कम मीठा या बिना अतिरिक्त चाशनी के लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।

गुलाब जामुन मैदे और खोया या दूध के ठोस पदार्थों से तैयार किया जाता है। इसे तलने के बाद चाशनी में डुबोया जाता है। इस प्रक्रिया के कारण इसमें वसा और चीनी दोनों की मात्रा बढ़ सकती है। इसलिए रोजमर्रा के खानपान में इसे सीमित रखना उचित है।

जलेबी और बर्फी से कितनी सावधानी जरूरी?

जलेबी मैदे के घोल को तेल या घी में तलकर चाशनी में डुबोकर बनाई जाती है। इसमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, चीनी और तलने से आई वसा का संयोजन होता है। इसी वजह से इसे नियमित रूप से या बड़ी मात्रा में खाना उचित नहीं माना जाता।

बर्फी की पोषण संरचना उसकी सामग्री पर निर्भर करती है। खोया, नारियल, काजू या अन्य मेवों से बनी बर्फी में अलग-अलग मात्रा में प्रोटीन, वसा और चीनी हो सकती है। मेवे वाली बर्फी में कुछ उपयोगी पोषक तत्व मिलते हैं, लेकिन अतिरिक्त चीनी और कैलोरी का ध्यान रखना जरूरी है।

मिठाई चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान

किसी एक मिठाई को सभी लोगों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प नहीं कहा जा सकता। फिर भी कुछ आदतें त्योहार के दौरान अतिरिक्त चीनी और कैलोरी का सेवन कम करने में मदद कर सकती हैं।

  • छोटी मात्रा चुनें: एक बार में छोटा टुकड़ा या छोटी सर्विंग लें।
  • कम चाशनी वाली मिठाई लें: रसगुल्ले या गुलाब जामुन जैसी मिठाइयों में अतिरिक्त चाशनी कम कर सकते हैं।
  • मेवे वाली मिठाई सीमित मात्रा में खाएं: काजू और बादाम जैसे मेवों में उपयोगी पोषक तत्व होते हैं, लेकिन वे कैलोरी से भरपूर भी हैं।
  • तली हुई मिठाइयां कम खाएं: जलेबी और गुलाब जामुन जैसी मिठाइयों का सेवन सीमित रखें।
  • लेबल जरूर पढ़ें: पैक्ड मिठाई खरीदते समय चीनी, संतृप्त वसा और प्रति सर्विंग कैलोरी की जानकारी देखें।
  • मिठाई के साथ मीठे पेय से बचें: शरबत, कोल्ड ड्रिंक और मीठी चाय के साथ मिठाई खाने से कुल चीनी का सेवन बढ़ जाता है।

डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोग रहें सतर्क

डायबिटीज से पीड़ित लोगों को मिठाइयों की मात्रा और समय को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। मिठाई खाने के बाद रक्त शर्करा बढ़ सकती है। ऐसे लोगों को अपने डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार भोजन योजना बनानी चाहिए। केवल चीनी की जगह गुड़ या शहद इस्तेमाल करने से मिठाई अपने आप सुरक्षित नहीं हो जाती, क्योंकि इनसे भी रक्त शर्करा प्रभावित हो सकती है।

इसी तरह वजन नियंत्रित करने वाले लोगों को भी मिठाई की मात्रा पर ध्यान देना चाहिए। त्योहार के दौरान भोजन के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित खानपान बनाए रखना उपयोगी है।

तो कौन-सी मिठाई है अपेक्षाकृत बेहतर?

यदि कम मात्रा, कम चाशनी और सीमित चीनी को प्राथमिकता दी जाए तो कुछ विकल्प दूसरों की तुलना में बेहतर हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, कम मीठा रसगुल्ला या सीमित चीनी और घी से बनी छोटी मात्रा में बेसन की मिठाई चुनी जा सकती है। लेकिन किसी भी मिठाई को पूरी तरह स्वास्थ्यवर्धक मानना सही नहीं होगा।

दिवाली का आनंद मिठाइयों से जरूर बढ़ता है, लेकिन सेहत का ध्यान रखते हुए मात्रा नियंत्रित रखना सबसे महत्वपूर्ण है। त्योहार का असली स्वाद तभी बना रहेगा, जब खुशियों के साथ स्वास्थ्य का संतुलन भी कायम रहे।

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