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13जून(ईटानगर): पेमा खांडू लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। वह आज सुबह 11 बजे राजभवन में सीएम पद की शपथ लेंगे। उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा ईटानगर पहुंचे हैं। खांडू को बुधवार को यहां एक बैठक में भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया। भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षकों- रविशंकर प्रसाद और तरूण चुग ने इस बैठक में हिस्सा लिया। सूत्रों के अनुसार खांडू बाद में सरकार गठन का दावा पेश करेंगे

भाजपा ने कितनी सीटें जीती थी?

सत्तारूढ़ भाजपा ने 60 सदस्यीय विधानसभा में 46 सीटें जीती थीं, जबकि एनपीपी ने 5, NCP ने तीन, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) ने दो सीटें जीती थीं। वहीं कांग्रेस ने एक सीट और निर्दलीय उम्मीदवारों ने तीन सीटों पर जीत हासिल की थी। अरुणाचल प्रदेश की दोनों लोकसभा सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है। बता दें कि यहां लोकसभा चुनाव 19 अप्रैल को राज्य में विधानसभा चुनावों के साथ ही हुए थे।

जानें पेमा खांडू के बारे में

खेल और संगीत के शौकीन पेमा खांडू पिछले कुछ वर्षों में अरुणाचल प्रदेश में एक बड़े नेता के रूप में उभरे हैं, विशेषकर 2016 में पैदा हुए उस संवैधानिक संकट के बाद जिसके कारण राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा था। खांडू कुशल चुनावी रणनीतिकार के रूप में अपनी छवि बनाने में भी सफल रहे हैं। अपनी रणनीति की बदौलत ही उन्होंने इस पूर्वोत्तर राज्य में कमल (भाजपा का चुनाव चिह्न) फिर से खिलाया है। भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करते हुए रविवार को 60 सदस्यीय विधानसभा में 46 सीट जीतकर बहुमत हासिल कर लिया।

पिता का हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुआ था निधन

खांडू की राजनीतिक यात्रा एक व्यक्तिगत त्रासदी के बीच शुरू हुई। उनके पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दोर्जी खांडू का 2011 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन हो गया था। पेमा खांडू वर्ष 2000 में कांग्रेस में शामिल हुए और विभिन्न पदों पर रहे। वह जून 2011 में अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र मुक्तो से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में विधानसभा उपचुनाव में निर्विरोध चुने गए। पेमा खांडू मुख्यमंत्री नबाम तुकी की सरकार में जल संसाधन विकास और पर्यटन मंत्री बने थे। जनवरी 2016 में उस संवैधानिक संकट के बाद उनके नेतृत्व का दायरा तेजी से बढ़ा था, जब राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। जब केंद्र का शासन हटा तो वह भाजपा समर्थित कलिखो पुल के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बने। यह सरकार हालांकि कुछ ही समय चली

Bharat Baani Bureau

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