नई दिल्ली 09 सितम्बर 2024 . एक ओवर में कैसे मैच बदल सकता है, इसकी सबसे ताजा मिसाल दिल्ली प्रीमियर लीग (डीपीएल) के फाइनल में देखने को मिलती है. अगर इस मैच का सार एक लाइन में पूछा जाए तो कहा जा सकता है कि आयुष बदोनी की गलती का मयंक रावत ने ऐसा फायदा उठाया कि इतिहास बन गया. मयंक रावत ने मैच में 78 रन की बेशकीमती पारी खेली और अपनी टीम ईस्ट दिल्ली राइडर्स को चैंपियन बना दिया.

दिल्ली प्रीमियर लीग (डीपीएल) के फाइनल की सबसे बड़ी गलती आयुष बदोनी ने की. कॉमेंटेटर की मानें तो आयुष ने गलती नहीं की, बल्कि उन्होंने कुल्हाड़ी पर पैर ही मार दिया. सारा किस्सा विस्तार से जानते हैं. दरअसल, रविवार को ईस्ट दिल्ली राइडर्स और साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स के बीच फाइनल खेला गया. ईस्ट दिल्ली की टीम ने पहले बैटिंग करते हुए 19 ओवर में 9 विकेट पर 153 रन बनाए थे. उस वक्त लग रहा था कि टीम 170 रन पार नहीं कर पाएगी. तभी साउथ दिल्ली के कप्तान आयुष बदोनी ने ऐसा फैसला लिया, जिसने गेम का मोमेंटम चेंज कर दिया.

आयुष बदोनी 20वां ओवर करने खुद आ गए. सब जानते हैं कि आयुष की गिनती ऑलराउंडर्स में भी नहीं होती. वे एक पार्टटाइम बॉलर हैं, जिनका आखिरी ओवर फेंकना बहुत बड़ा रिस्क था. वह भी तब, जब सामने ऐसा बैटर (मयंक रावत) हो, जो उन्हें पहले से जानता है और साथ खेल चुका है. मयंक रावत ने आयुष बदोनी के इस ओवर में 5 छक्के जड़ दिए और जो टीम 170 रन मुश्किल से पहुंचती दिख रही थी, उनसे बोर्ड पर 183 रन टांग दिए. इस तरह मयंक रावत ने आखिरी 6 गेंद पर 30 रन ठोक दिए और अपना निजी स्कोर 78 पहुंचा दिया. उन्होंने ये रन 200 की स्ट्राइक रेट से 39 गेंद पर बनाए, जिसमें 7 चौके और 6 छक्के शामिल थे.

बता दें कि मयंक रावत भारत की अंडर-19 टीम से खेल चुके हैं. मयंक मिडिलऑर्डर में बैटिंग करने के साथ-साथ ऑफस्पिन गेंदबाजी भी करते हैं. मयंक की तरह आयुष बदोनी भी दिल्ली के क्रिकेटर हैं और एकदूसरे के खेल से बखूबी परिचित हैं.

Bharat Baani Bureau

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *