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12 जनवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : टैटू इन दिनों फैशन स्टेटमेंट बन चुका है। यादें, कभी प्यार, कभी विद्रोह बच्चा हो या बुजुर्ग, महिला हो या पुरुष, टैटू अब ट्रेंड बन चुका है। लेकिन सवाल ये है जो दिख रहा है, क्या वो ही पूरी कहानी है ? या इस स्याही के पीछे कुछ ऐसा भी है जो चुपचाप शरीर के अंदर काम कर रहा है ? दिलचस्प बात ये है कि टैटू कोई नई चीज नहीं है। हजारों साल पहले जब फैशन शब्द पैदा भी नहीं हुआ था तब भी इंसान अपने शरीर पर निशान बनाता था, मिस्र की ममीज पर मिले टैटू नवपाषाण काल के निशान ये बताते हैं कि टैटू पहचान और आस्था का प्रतीक था। और अगर हिंदुस्तान की बात करें तो यहां टैटू को कहते थे ‘गोदना’। छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार-झारखंड की महिलाएं चेहरे और हाथों पर गोदना गुदवाती थीं। कहीं पति का नाम, कहीं नजर उतारने का ताबीज, तो कहीं सामाजिक पहचान। लेकिन उस दौर में काजल, हल्दी, इंडिगो यानि नील और मिट्टी से बनी स्याही का इस्तेमाल होता था। बिल्कुल नेचुरल शरीर और सेहत से तालमेल बैठाते हुए।

लेकिन आज का टैटू गोदना से बिल्कुल अलग है आज सुई मशीन से चलती है और स्याही आती है केमिकल फैक्ट्री से आज की टैटू इंक में ब्लैक कार्बन, हैवी मैटल, प्लास्टिक जैसे कण होते हैं यही फर्क है जहां गोदना संस्कृति था वहीं टैटू अब केमिकल से बनता है। और यहीं से शुरू होती है टैटू और सेहत की असली कहानी। जब टैटू बनता है तो सुई स्किन को चीरती है, खून निकलता है और दरवाजा खुल जाता है बैक्टीरिया के लिए। अगर सुई साफ न हो तो हेपेटाइटिस-बी, सी यहां तक कि HIV तक का खतरा बन जाता है।

लेकिन सबसे बड़ा खतरा बाद में सामने आता है। टैटू की स्याही के माइक्रो पार्टिकल्स ‘लिम्फ सिस्टम’ के जरिए ‘लिम्फ नोड्स’ में जमा हो जाते हैं यानि वही जगह जो बॉडी के डिफेंस का कंट्रोल रूम है। नतीजा क्रॉनिक इनफ्लेमेशन, गांठें, एलर्जी और कुछ मामलों में गंभीर बीमारियों की शुरुआत। इतना ही नहीं टैटू के हर रंग का खतरा अलग है। काली स्याही, इम्यून बीमारियों से जुड़ी होती है। तो लाल स्याही सबसे ज्यादा एलर्जी वाली। नीली स्याही आंखों पर असर डालती है। धूप, लेजर या MRI में ये स्याही टूटकर और जहरीले केमिकल छोड़ती है जो वाइटल ऑर्गन्स तक को डैमेज करती है। तो चलिए आज बॉडी को डिटॉक्स करने के साथ, सेहत का ख्याल रखना है योगगुरु बाबा रामदेव से जानते हैं।

सारांश:
टैटू बनवाने से त्वचा संक्रमण, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। बाबा रामदेव के अनुसार, सही जानकारी, साफ-सफाई और आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर इन जोखिमों से बचा जा सकता है और सेहत का ध्यान रखा जा सकता है।

Bharat Baani Bureau

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