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26 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आशंकाओं में हालिया कमी ने वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार को भी राहत दी है। पिछले कुछ हफ्तों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था, लेकिन अब स्थिति कुछ हद तक स्थिर होती नजर आ रही है।

जब मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा था, तब भारतीय बाजार पर इसका सीधा असर देखने को मिला। निवेशकों में घबराहट बढ़ी और उन्होंने बड़े पैमाने पर बिकवाली शुरू कर दी। इसका परिणाम यह हुआ कि सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट आई। एक समय पर सेंसेक्स में 5,000 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी।

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण था कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक अनिश्चितता। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे अर्थव्यवस्था और बाजार दोनों पर दबाव डालती है।

हालांकि अब हालात में कुछ सुधार देखने को मिल रहा है। युद्ध की आशंकाएं कम होने और कूटनीतिक बातचीत की उम्मीद बढ़ने से बाजार में स्थिरता लौट रही है। वैश्विक संकेतों में सुधार के साथ निवेशकों का भरोसा भी धीरे-धीरे वापस आ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब भू-राजनीतिक जोखिम कम होते हैं, तो बाजार में “रिस्क-ऑन” भावना लौटती है। यानी निवेशक फिर से शेयर बाजार में निवेश करने लगते हैं, जिससे बाजार में तेजी आती है।

तेल की कीमतों में भी कुछ नरमी देखने को मिली है, जो भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। जब तेल सस्ता होता है, तो कंपनियों की लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ने की संभावना रहती है। इससे बाजार को समर्थन मिलता है।

इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख भी महत्वपूर्ण होता है। तनाव के दौरान FIIs ने भारी बिकवाली की थी, जिससे बाजार पर दबाव पड़ा। लेकिन अब हालात सामान्य होने पर उनके निवेश वापस आने की संभावना बढ़ गई है।

सेक्टर की बात करें तो, तेल की कीमतों में नरमी से एविएशन, पेंट्स, केमिकल और FMCG सेक्टर को राहत मिल सकती है। वहीं, पहले जो सेक्टर युद्ध के दौरान बेहतर प्रदर्शन कर रहे थे, जैसे डिफेंस और ऑयल कंपनियां, उनमें थोड़ी नरमी आ सकती है।

विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि इस तरह के वैश्विक घटनाक्रमों का असर आमतौर पर अल्पकालिक होता है। लंबे समय में बाजार फिर से अपने फंडामेंटल्स पर लौट आता है।

हालांकि, पूरी तरह राहत की स्थिति अभी नहीं कही जा सकती। मध्य पूर्व में स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी समय तनाव फिर से बढ़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। ऐसे समय में गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश करना बेहतर विकल्प माना जाता है।

इसके साथ ही, विविधीकरण (diversification) भी महत्वपूर्ण है। अलग-अलग सेक्टर में निवेश करने से जोखिम कम किया जा सकता है।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स मजबूत बने हुए हैं। घरेलू मांग, सरकारी निवेश और सुधारों के चलते बाजार को दीर्घकालिक समर्थन मिल रहा है।

निष्कर्ष के तौर पर, US-ईरान युद्ध की आशंकाओं में कमी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और बाजार में स्थिरता लौट रही है, हालांकि सतर्कता अभी भी जरूरी बनी हुई है।

सारांश:

US-ईरान तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार को राहत मिली है, निवेशकों का भरोसा लौटा है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के चलते सतर्कता अभी भी जरूरी बनी हुई है।

Bharat Baani Bureau

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