3 जून 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : अमेरिका में दो वैज्ञानिकों पर निष्क्रिय (deactivated) Mpox वायरस देश में लाने और संघीय अधिकारियों को कथित रूप से गलत जानकारी देने के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले ने जैविक अनुसंधान सामग्री के आयात और सुरक्षा नियमों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, वैज्ञानिकों ने अनुसंधान उद्देश्यों के लिए वायरस से संबंधित सामग्री अमेरिका में लाने की कोशिश की, लेकिन उस दौरान आवश्यक दस्तावेजों और घोषणाओं में कथित रूप से सही जानकारी नहीं दी गई। जांच एजेंसियों का आरोप है कि अधिकारियों को सामग्री की प्रकृति के बारे में भ्रामक जानकारी प्रदान की गई।
हालांकि, मामले में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि संबंधित वायरस सामग्री “deactivated” यानी निष्क्रिय अवस्था में थी। इसका अर्थ है कि वायरस को इस प्रकार संसाधित किया गया था कि वह सामान्य परिस्थितियों में संक्रमण फैलाने में सक्षम नहीं माना जाता।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिक अनुसंधान में निष्क्रिय वायरस नमूनों का उपयोग आम बात है। इनका इस्तेमाल वैक्सीन विकास, डायग्नोस्टिक परीक्षणों और वायरस की संरचना को समझने के लिए किया जाता है। लेकिन ऐसे नमूनों के आयात और परिवहन के लिए सख्त नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि मामला केवल वायरस सामग्री से जुड़ा नहीं है, बल्कि कथित तौर पर गलत या अधूरी जानकारी देने से संबंधित है। इसलिए जांच का मुख्य फोकस नियामकीय अनुपालन और दस्तावेजी प्रक्रियाओं पर है।
Mpox, जिसे पहले Monkeypox के नाम से जाना जाता था, एक वायरल बीमारी है जो संक्रमित व्यक्ति या जानवर के संपर्क से फैल सकती है। हाल के वर्षों में इसके मामलों ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया था।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़ी सामग्रियों के आयात नियमों के सख्त पालन की आवश्यकता को और रेखांकित करेगा। दूसरी ओर, बचाव पक्ष का तर्क हो सकता है कि सामग्री निष्क्रिय थी और उससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को कोई तत्काल खतरा नहीं था।
इस बीच, संबंधित संस्थानों और स्वास्थ्य एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए किसी व्यापक खतरे की जानकारी नहीं है। जांच जारी है और अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान अधिक तथ्य सामने आ सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह मामला जैविक अनुसंधान, नियामकीय अनुपालन और वैज्ञानिक सामग्री के अंतरराष्ट्रीय परिवहन से जुड़े नियमों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
