10 जून  2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : वैज्ञानिकों ने फेफड़ों के कैंसर (Lung Cancer) की शुरुआती पहचान की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ऐसी blood test तकनीक विकसित की है, जो बीमारी के स्पष्ट लक्षण सामने आने से कई वर्ष पहले ही फेफड़ों के कैंसर के संकेतों का पता लगाने में सक्षम हो सकती है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह परीक्षण रक्त में मौजूद विशेष जैविक संकेतकों (biomarkers) की पहचान करता है। ये संकेतक शरीर में होने वाले उन सूक्ष्म बदलावों को दर्शाते हैं, जो कैंसर विकसित होने की प्रक्रिया के दौरान दिखाई देते हैं।

फेफड़ों का कैंसर दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अधिकांश मामलों में बीमारी का पता तब चलता है जब यह काफी आगे बढ़ चुकी होती है। ऐसे में शुरुआती पहचान मरीजों की जीवन रक्षा की संभावना को काफी बढ़ा सकती है।

अध्ययन में वैज्ञानिकों ने हजारों लोगों के रक्त नमूनों का विश्लेषण किया और पाया कि कुछ विशिष्ट जैविक संकेत कैंसर के निदान से कई वर्ष पहले ही दिखाई देने लगते हैं। इन संकेतों की मदद से भविष्य में उच्च जोखिम वाले लोगों की पहचान की जा सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक लागू किया जाता है तो यह कैंसर स्क्रीनिंग के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। इससे डॉक्टर बीमारी का पता शुरुआती चरण में लगाकर समय पर उपचार शुरू कर सकेंगे।

शोधकर्ताओं का मानना है कि वर्तमान में फेफड़ों के कैंसर की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली कई विधियां महंगी या सीमित पहुंच वाली हैं। इसके मुकाबले blood test अपेक्षाकृत आसान और कम आक्रामक विकल्प हो सकता है।

हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि इस परीक्षण को अभी व्यापक उपयोग के लिए और अधिक परीक्षणों तथा क्लिनिकल अध्ययन की आवश्यकता है। इसके बावजूद शुरुआती परिणाम उत्साहजनक माने जा रहे हैं।

Cancer specialists का कहना है कि शुरुआती पहचान से सर्जरी, रेडियोथेरेपी और अन्य उपचारों की सफलता दर बढ़ सकती है। यही कारण है कि कैंसर अनुसंधान में early detection को सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गिना जाता है।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि धूम्रपान, वायु प्रदूषण, पारिवारिक इतिहास और कुछ पेशागत जोखिम कारक फेफड़ों के कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं। ऐसे लोगों के लिए भविष्य में यह blood test विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगे के अध्ययन भी सफल रहते हैं तो यह तकनीक नियमित स्वास्थ्य जांच का हिस्सा बन सकती है और लाखों लोगों को समय रहते उपचार का अवसर प्रदान कर सकती है।

अध्ययन ने एक बार फिर यह दिखाया है कि आधुनिक चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में नई संभावनाएं खोल रही हैं। आने वाले वर्षों में इस तरह की तकनीकों से कैंसर की पहचान और उपचार के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

Bharat Baani Bureau

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *