11 जून 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : एक समय था जब अमेरिका अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी तेल पर निर्भर था और 1973 के अरब तेल प्रतिबंध (Arab Oil Embargo) ने उसकी अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका दिया था। आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक और निर्यातक बनकर वैश्विक ऊर्जा बाजार में प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा है।
1973 में अरब देशों द्वारा लगाए गए तेल प्रतिबंध ने अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों में ईंधन संकट पैदा कर दिया था। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई थीं और ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गई थी। उस संकट ने अमेरिका को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में गंभीर कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।
पिछले दो दशकों में अमेरिका के ऊर्जा क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव shale oil और shale gas क्रांति के रूप में सामने आया। नई ड्रिलिंग तकनीकों और hydraulic fracturing (fracking) के उपयोग ने ऐसे तेल और गैस भंडारों तक पहुंच संभव बनाई, जिन्हें पहले आर्थिक रूप से निकालना मुश्किल माना जाता था।
विशेष रूप से टेक्सास और नॉर्थ डकोटा जैसे राज्यों में तेल उत्पादन में भारी वृद्धि हुई। इसके परिणामस्वरूप अमेरिका का कुल उत्पादन तेजी से बढ़ा और वह सऊदी अरब तथा रूस जैसे पारंपरिक ऊर्जा दिग्गजों को चुनौती देने लगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका ने न केवल घरेलू मांग को पूरा किया बल्कि अतिरिक्त उत्पादन को वैश्विक बाजारों में निर्यात करना भी शुरू कर दिया। आज अमेरिकी कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) दुनिया के कई देशों तक पहुंच रही है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में अमेरिका की बढ़ती भूमिका का असर भू-राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ा है। पहले जहां तेल आपूर्ति के लिए अमेरिका को मध्य पूर्व पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब वह कई देशों के लिए ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बन चुका है।
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका की ऊर्जा आत्मनिर्भरता ने उसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अधिक रणनीतिक लचीलापन प्रदान किया है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि वैश्विक तेल बाजार पूरी तरह किसी एक देश से स्वतंत्र नहीं है और अंतरराष्ट्रीय संकटों का प्रभाव अभी भी कीमतों पर पड़ता है।
हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के दौरान यूरोप सहित कई देशों ने अमेरिकी ऊर्जा निर्यात पर अधिक भरोसा किया है। इससे अमेरिका की वैश्विक ऊर्जा भूमिका और मजबूत हुई है।
इसके बावजूद पर्यावरणविद् और जलवायु विशेषज्ञ जीवाश्म ईंधनों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। उनका कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में निवेश भी उतना ही आवश्यक है।
अमेरिकी प्रशासन भी एक ओर तेल और गैस उत्पादन को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, जबकि दूसरी ओर नवीकरणीय ऊर्जा और हरित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का तेल आयातक से दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक बनने का सफर आधुनिक ऊर्जा इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और तकनीकी उपलब्धियों में से एक है।
कुल मिलाकर, 1973 के तेल संकट से प्रभावित देश से लेकर आज वैश्विक ऊर्जा बाजार के अग्रणी निर्यातक बनने तक अमेरिका ने ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। यह बदलाव तकनीकी नवाचार, निवेश और दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति का परिणाम माना जा रहा है।
