23  जुलाई  2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा है कि सरकार ने देश में खदानों को वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से बंद करने के लिए ₹40,000 करोड़ का प्रावधान किया है।

मंत्री के अनुसार, खदान बंद करने की प्रक्रिया केवल खनन गतिविधियों को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पर्यावरण संरक्षण, भूमि का पुनर्वास और स्थानीय समुदायों के हितों का ध्यान रखना भी शामिल है।

वैज्ञानिक तरीके से खदानों को बंद करने का उद्देश्य खनन के बाद भूमि और पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करना है। इसके तहत खदान क्षेत्रों का पुनर्वास, भूमि सुधार और पर्यावरणीय बहाली जैसे कार्य किए जा सकते हैं।

जी. किशन रेड्डी ने कहा कि सरकार खनन क्षेत्रों में सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दे रही है। खदानों को बंद करने की योजनाओं में वैज्ञानिक तरीकों और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

खनन गतिविधियों के बाद कई क्षेत्रों में भूमि क्षरण, जल स्रोतों पर असर और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियां सामने आती हैं। ऐसे में वैज्ञानिक माइन क्लोजर योजनाएं इन समस्याओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

सरकार का यह कदम भारत के खनन क्षेत्र में पर्यावरणीय जिम्मेदारी और दीर्घकालिक पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ₹40,000 करोड़ का आवंटन खदान बंदी और संबंधित पुनर्वास कार्यों के लिए बड़े वित्तीय समर्थन को दर्शाता है।

Bharat Baani Bureau

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