6 जुलाई 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भारतीय रुपया बुधवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10 पैसे कमजोर होकर 95.28 के स्तर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मजबूती और वैश्विक निवेशकों की सतर्कता के कारण रुपये पर दबाव देखने को मिला।
मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में डॉलर इंडेक्स में मजबूती और विदेशी पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव ने रुपये की चाल को प्रभावित किया। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में हलचल भी भारतीय मुद्रा के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है।
विश्लेषकों का कहना है कि जब वैश्विक स्तर पर डॉलर मजबूत होता है, तो उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ जाता है। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर की मांग का सीधा असर रुपये पर पड़ता है।
हाल के दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और ब्याज दरों को लेकर बाजार में बनी अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क रखा है। इसका असर विदेशी मुद्रा बाजारों में भी दिखाई दे रहा है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी संकेतक, पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और दीर्घकालिक निवेश प्रवाह रुपये को अत्यधिक कमजोरी से बचाने में मदद कर सकते हैं।
बाजार की नजर अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, वैश्विक ब्याज दरों और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यही कारक रुपये की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
