17 जुलाई 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :पंजाब में मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने से राज्य के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रही है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब में बारिश की कमी करीब 35% तक पहुंच गई है। अब मौसम विभाग और विशेषज्ञों की नजर आने वाले दिनों में मानसून की संभावित वापसी पर है।
मानसून कमजोर क्यों हुआ?
मानसून की बारिश लगातार एक जैसी नहीं रहती। इसके सक्रिय और कमजोर चरण आते-जाते रहते हैं। पंजाब में बारिश कम होने की एक बड़ी वजह यह है कि मानसून की मुख्य गतिविधि फिलहाल क्षेत्र से दूर बनी हुई है। इसके अलावा, बारिश लाने वाले निम्न दबाव वाले सिस्टम और मानसून ट्रफ की स्थिति भी बारिश की तीव्रता को प्रभावित करती है।
इस साल मानसून की शुरुआत भी कुछ असमान रही। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून 9 जुलाई तक पूरे देश में पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की गतिविधियां समान नहीं रहीं।
आगे कैसा रहेगा मौसम?
पंजाब में आने वाले दिनों में मौसम पूरी तरह शुष्क रहने की संभावना नहीं है। हालांकि, बारिश की गतिविधियां जिले-दर-जिले अलग हो सकती हैं। पड़ोसी हिमाचल प्रदेश में 18 जुलाई से मानसून के फिर सक्रिय होने का अनुमान है और 19 से 23 जुलाई के बीच भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इसका असर पंजाब के कुछ हिस्सों में भी मौसम पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश होने पर पंजाब की नदियों और निचले इलाकों में जलस्तर पर भी नजर रखना जरूरी होगा। हालांकि, किसी बड़े बाढ़ खतरे का अनुमान केवल बारिश के आधार पर नहीं लगाया जा सकता।
मानसून में उतार-चढ़ाव सामान्य
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ना सामान्य है। इसके बाद किसी नए निम्न दबाव क्षेत्र, मानसून ट्रफ के खिसकने या पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश फिर तेज हो सकती है।
इसलिए पंजाब में मौजूदा बारिश की कमी को पूरे मानसून सीजन का अंतिम रुझान नहीं माना जा सकता। आने वाले सप्ताह में मानसून की गतिविधि और नए मौसम सिस्टम राज्य में बारिश की स्थिति को बदल सकते हैं।
