20 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  त्योहारी सीजन से पहले देश में चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी के स्टॉक रखने की सीमा और सख्त कर दी है। नए आदेश के तहत महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का कारोबार या उपयोग करने वाले डीलर अब अधिकतम 15 दिनों की जरूरत के बराबर स्टॉक रख सकेंगे। यह नई सीमा 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। पिछले एक महीने में चीनी की कीमतों में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अगस्त से नवंबर के बीच देश में त्योहारों के कारण चीनी की मांग आमतौर पर तेजी से बढ़ती है, जिससे सरकार को आपूर्ति और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उपभोक्ता है। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान मिठाइयों और कन्फेक्शनरी उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। इसके अलावा बिस्कुट, मिठाई और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियां भी त्योहारी सीजन से पहले बड़ी मात्रा में चीनी का स्टॉक तैयार करती हैं।

सरकार ने पिछले महीने भी चीनी कारोबारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा 30 दिनों तक निर्धारित की थी। लेकिन इसके बावजूद कीमतों में लगातार तेजी जारी रही। नई व्यवस्था में इस सीमा को और घटाकर 15 दिन कर दिया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगेगी तथा बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर होगी।

सरकारी आंकड़ों और बाजार रिपोर्टों के मुताबिक, चीनी की कीमतों में हालिया तेजी का एक कारण स्थानीय स्तर पर उपलब्ध स्टॉक का कम होना है। महाराष्ट्र के कोल्हापुर जैसे प्रमुख बाजारों में थोक कीमतें अगस्त की शुरुआत से करीब 20 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं। 18 अगस्त को उत्तर प्रदेश में एम-ग्रेड चीनी का एक्स-फैक्ट्री भाव करीब ₹5,400 प्रति क्विंटल बताया गया था।

कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे मौसम की स्थिति भी एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है। कुछ क्षेत्रों में कम बारिश और सूखे जैसे हालात ने गन्ने की फसल पर असर डाला है। गन्ने की खेती के लिए पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए मौसम में अनियमितता से आने वाले सीजन में उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है।

सरकार केवल स्टॉक लिमिट तक सीमित नहीं रहना चाहती। कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सीमित मात्रा में शुल्क-मुक्त चीनी आयात की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार चीनी मिलों को अक्टूबर के अंत तक लगभग 10 लाख मीट्रिक टन चीनी आयात करने की अनुमति देने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती है।

इसके अलावा बंदरगाह आधारित रिफाइनरियों से घरेलू बाजार में चीनी की अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। इससे बाजार में उपलब्धता बढ़ सकती है और त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

सरकार ने जुलाई में भी चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी पर नजर रखने के लिए स्टॉक लिमिट लागू की थी। सभी चीनी डीलरों को अपने स्टॉक की जानकारी घोषित करने और हर सप्ताह स्टॉक की स्थिति ऑनलाइन अपडेट करने के निर्देश दिए गए थे। सरकार ने कहा था कि देश में घरेलू खपत की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है।

हालांकि, बाजार में कीमतों में तेजी जारी रहने से सरकार के सामने चुनौती बढ़ गई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ शहरों में खुदरा चीनी की कीमत पिछले कुछ दिनों में तेजी से बढ़ी है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ मिठाई, बेकरी और कन्फेक्शनरी उद्योगों की लागत भी बढ़ सकती है।

चीनी भारत में एक राजनीतिक रूप से संवेदनशील वस्तु भी है। त्योहारों के दौरान इसकी मांग बढ़ने के कारण कीमतों में ज्यादा वृद्धि का सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ सकता है। यही वजह है कि सरकार बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई विकल्पों पर काम कर रही है।

आने वाले महीनों में चीनी बाजार पर सरकार की नजर बनी रहने की संभावना है। यदि स्टॉक लिमिट, संभावित आयात और अन्य आपूर्ति उपायों से बाजार में उपलब्धता बढ़ती है, तो कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद की जा सकती है। वहीं, अगर त्योहारी मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ता है, तो कीमतों पर दबाव आगे भी बना रह सकता है।

Bharat Baani Bureau

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