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18 अगस्त, 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : केंद्र सरकार जल्द ही ‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ को लेकर एक हाई-लेवल कमेटी का गठन करने जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि बैंकिंग सेक्टर के भविष्य और भारत की विकास जरूरतों के अनुरूप सुधारों के लिए इस हाई-पावर्ड कमेटी की घोषणा जल्द की जाएगी।

वित्त मंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय PSB Confluence को संबोधित करते हुए कहा कि बैठक में होने वाली गहन चर्चाओं से प्रस्तावित कमेटी को महत्वपूर्ण इनपुट मिलेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के विचार समिति के लिए आगे की दिशा तय करने में उपयोगी साबित होंगे।

‘बैंकिंग फॉर विकसित भारत’ कमेटी की घोषणा वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट 2026-27 में की थी। इसका उद्देश्य देश के बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करना और उसे भारत की अगली आर्थिक विकास यात्रा के अनुरूप तैयार करना है। कमेटी वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सुधारों की सिफारिश करेगी।

सरकार का मानना है कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। बैंकों को उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, युवाओं और नए आर्थिक क्षेत्रों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार करना इस व्यापक योजना का अहम हिस्सा है।

वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में भारतीय बैंकिंग सेक्टर सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत स्थिति में है। उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों यानी NPAs के ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर होने का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, यह स्थिति बैंकों को अगले चरण के सुधारों और आर्थिक विकास के लिए मजबूत आधार देती है।

PSB Confluence में बैंकिंग सेक्टर से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। बैठक के लिए सात प्रमुख विषय तय किए गए हैं, जिनमें डिपॉजिट मोबिलाइजेशन, युवाओं के लिए बैंकिंग, निवेश चक्र को समर्थन, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, कृषि एवं बागवानी मूल्य श्रृंखला के लिए वित्तीय सहायता, क्रेडिट कार्ड कारोबार में बदलाव और प्राथमिकता क्षेत्र ऋण शामिल हैं।

वित्त मंत्री ने बैंकिंग सेक्टर में युवाओं की बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया। सरकार चाहती है कि बैंकिंग सेवाएं देश की युवा आबादी की बदलती जरूरतों और आकांक्षाओं के अनुरूप विकसित हों। इसके लिए नए बैंकिंग उत्पादों, बेहतर डिजिटल सेवाओं और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने पर विचार किया जा रहा है।

इसके अलावा डिपॉजिट जुटाना भी बैंकिंग सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। आर्थिक गतिविधियों और कर्ज की मांग बढ़ने के साथ बैंकों के लिए पर्याप्त जमा राशि जुटाना जरूरी है। प्रस्तावित कमेटी इस क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

वित्तीय सेवा सचिव संजय लोहिया ने भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बदलते प्रतिस्पर्धी माहौल के अनुरूप खुद को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक बैंकिंग के कारोबारी मॉडल और ग्राहकों के अनुभव को तेजी से बदल रही है। ऐसे में सरकारी बैंकों को अपनी विशेषज्ञता, उत्पादों और कारोबारी मॉडल को लगातार बेहतर बनाना होगा।

सरकार की प्रस्तावित कमेटी केवल बैंकिंग क्षेत्र की मौजूदा स्थिति की समीक्षा तक सीमित नहीं होगी, बल्कि आने वाले वर्षों में बैंकों की भूमिका को लेकर व्यापक रोडमैप तैयार करने की दिशा में काम कर सकती है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होगा कि बैंक देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए पर्याप्त और प्रभावी वित्त उपलब्ध करा सकें।

अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार हाई-लेवल कमेटी की औपचारिक घोषणा कब करती है और इसमें किन विशेषज्ञों तथा अधिकारियों को शामिल किया जाता है। कमेटी की सिफारिशें आने वाले वर्षों में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के ढांचे, संचालन और विकास रणनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती हैं।

Bharat Baani Bureau

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