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1 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  पंजाब के किसान संगठनों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, पंजाब के पानी के अधिकार और किसानों की कर्जमाफी समेत कई मांगों को लेकर मंगलवार से सात दिवसीय मोहाली मोर्चा शुरू कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) का यह पक्का मोर्चा 1 से 7 सितंबर तक चलेगा। किसानों ने मोहाली-चंडीगढ़ सीमा के पास डेरा डालना शुरू कर दिया है, जिसके चलते इलाके में ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं।

SKM में 32 किसान संगठन शामिल हैं। इनमें भारतीय किसान यूनियन राजेवाल, BKU डकौंदा, कीर्ति किसान यूनियन, BKU शादिपुर और पंजाब किसान यूनियन जैसे संगठन शामिल हैं। संगठन ने केंद्र और पंजाब सरकार से जुड़े कई मुद्दों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। हालांकि, BKU एकता उगराहां इस मोर्चे का हिस्सा नहीं है और उसने राज्य के डिप्टी कमिश्नरों के कार्यालयों के बाहर अलग प्रदर्शन शुरू किया है।

MSP की कानूनी गारंटी प्रमुख मांग

किसानों की प्रमुख मांग सभी फसलों के लिए MSP की कानूनी गारंटी है। SKM चाहता है कि MSP को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार C2+50 प्रतिशत के फॉर्मूले पर तय किया जाए और किसानों को घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानूनी अधिकार मिले।

किसान संगठनों का कहना है कि केवल कुछ प्रमुख फसलों की सरकारी खरीद पर निर्भर रहने के बजाय MSP व्यवस्था को व्यापक बनाया जाना चाहिए। पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था लंबे समय से गेहूं और धान की खरीद व्यवस्था पर काफी निर्भर रही है। ऐसे में किसान संगठन सभी फसलों के लिए प्रभावी मूल्य सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

पंजाब के पानी के अधिकारों पर जोर

मोर्चे में पंजाब के नदी जल और भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) में राज्य के अधिकारों का मुद्दा भी प्रमुख है। SKM ने पंजाब के नदी जल बंटवारे से जुड़े पुराने समझौतों को खत्म करने और इस विषय पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।

किसान संगठनों ने BBMB में पंजाब का प्रतिनिधित्व बहाल करने की भी मांग की है। उनका तर्क है कि राज्य की कृषि और अर्थव्यवस्था जिन जल संसाधनों पर निर्भर हैं, उनके प्रबंधन में पंजाब की निर्णायक भूमिका होनी चाहिए।

पानी का मुद्दा पंजाब में लंबे समय से संवेदनशील राजनीतिक और कृषि विषय रहा है। किसान संगठन इसे केवल सिंचाई से जुड़ा सवाल नहीं मानते, बल्कि इसे राज्य के प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार से भी जोड़ते हैं।

किसानों और मजदूरों की कर्जमाफी

SKM ने किसानों के साथ-साथ खेत मजदूरों के पूरे कर्ज की माफी की मांग भी उठाई है। किसान नेताओं का कहना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कर्ज का बोझ केवल जमीन के मालिक किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि मजदूर और अन्य ग्रामीण परिवार भी इससे प्रभावित हैं।

इसके अलावा किसान और ग्रामीण मजदूरों के लिए 10,000 रुपये मासिक पेंशन की मांग की गई है। ग्रामीण कारीगरों को भी इस सामाजिक सुरक्षा योजना में शामिल करने की मांग है।

अमेरिका और यूरोप से व्यापार समझौतों का विरोध

SKM प्रस्तावित अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों का भी विरोध कर रहा है। किसान संगठनों को आशंका है कि ऐसे समझौतों के बाद सस्ते कृषि उत्पादों का आयात बढ़ सकता है, जिससे घरेलू किसानों को कीमतों और प्रतिस्पर्धा के स्तर पर नुकसान हो सकता है।

किसानों का कहना है कि कृषि क्षेत्र को विदेशी आयात से बचाने के लिए व्यापार नीति बनाते समय किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

बिजली और बीज कानूनों पर भी आपत्ति

मोर्चे में Electricity Bill 2025 और Seed Bill 2025 को वापस लेने की मांग भी शामिल है। किसान संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित कानून कृषि लागत, बिजली व्यवस्था और किसानों की इनपुट तक पहुंच को प्रभावित कर सकते हैं।

SKM ने Dam Safety Act को रद्द करने और Disaster Management Act, 2024 को वापस लेने की मांग भी रखी है। इसके अलावा गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल तय करने और निजी चीनी मिलों से भुगतान के लिए एकल काउंटर व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।

मोहाली में ही क्यों लगाया गया मोर्चा?

मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर प्रदर्शन का स्थान रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। स्वीकृत प्रदर्शन स्थल सेक्टर 48-C क्षेत्र में IISER टी-पॉइंट से ट्रिब्यून चौक की ओर जाने वाली सड़क के आसपास है। प्रदर्शन स्थल का एक हिस्सा मोहाली और दूसरा चंडीगढ़ क्षेत्र में आता है।

किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में राशन और अन्य जरूरी सामान लेकर पहुंचे हैं और 7 सितंबर तक वहीं रहने की योजना है। SKM ने पंजाब के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने की तैयारी की है।

ट्रैफिक पर लगी पाबंदियां

किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए मोहाली पुलिस ने कई मार्गों पर ट्रैफिक प्रतिबंध और डायवर्जन लागू किए हैं। IISER चौक से Bestech Mall, Phase 11 और आगे जगतपुरा होते हुए चंडीगढ़ जाने वाली सड़क को प्रदर्शन के कारण बंद किया गया है।

इसके अलावा फेदां बैरियर से चंडीगढ़ की ओर Purv Marg पर आने-जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्गों की ओर डायवर्ट किया गया है। पुलिस ने यात्रियों से प्रदर्शन प्रभावित मार्गों से बचने और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की अपील की है।

चंडीगढ़-मोहाली और एयरपोर्ट की ओर जाने वाले मार्गों पर इस प्रदर्शन का विशेष असर पड़ने की संभावना है। प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है।

सात दिनों तक जारी रहेगा आंदोलन

SKM का कहना है कि यह मोर्चा 7 सितंबर तक जारी रहेगा। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगें केवल MSP तक सीमित नहीं हैं। इनमें कृषि नीति, कर्ज, पानी, व्यापार समझौते, बिजली, बीज और ग्रामीण सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।

यह आंदोलन ऐसे समय में शुरू हुआ है जब पंजाब में कर्मचारी संगठनों की ओर से भी अलग-अलग मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। किसानों के सात दिवसीय मोर्चे से पंजाब और चंडीगढ़ के बीच यातायात और प्रशासनिक गतिविधियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है।

किसानों ने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। वहीं प्रशासन का मुख्य ध्यान प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और यातायात को सुचारु बनाए रखने पर है।

Bharat Baani Bureau

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