4 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : भारत में शिक्षा और रोजगार के बीच मौजूद अंतर को कम करने के उद्देश्य से मेडहावी ग्रुप ने MedhaviOne नाम से एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। कंपनी के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म शिक्षा संस्थानों, उद्योगों और विद्यार्थियों को साझा मानकों के आधार पर जोड़ने की दिशा में काम करेगा, ताकि युवाओं के पास मौजूद कौशल को उद्योग की वास्तविक जरूरतों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके। इस नई पहल में अमित हरलालका को Co-Founder और Chief Executive Officer (CEO) नियुक्त किया गया है।
अमित हरलालका इससे पहले Tata Digital में Head of Growth के पद पर कार्य कर चुके हैं। उनके पास करीब दो दशकों का अनुभव है और उन्होंने अमेरिका, चीन तथा भारत में काम किया है। वह IIM Lucknow के पूर्व छात्र हैं और कंज्यूमर-टेक के साथ-साथ एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म को बड़े स्तर पर विकसित करने का अनुभव रखते हैं।
शिक्षा से रोजगार तक की खाई को पाटने की कोशिश
MedhaviOne का लॉन्च ऐसे समय हुआ है जब कंपनियों की जरूरतों और पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था से मिलने वाले कौशल के बीच अंतर एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और नए कारोबारी मॉडल तेजी से काम करने के तरीकों को बदल रहे हैं। इसके चलते कई कौशलों की उपयोगिता पहले की तुलना में तेजी से बदल रही है।
Medhavi Group के मुताबिक, पुराना मॉडल मुख्य रूप से “पहले शिक्षा, फिर नौकरी” की अवधारणा पर आधारित रहा है। MedhaviOne इसका विकल्प एक ऐसे निरंतर लर्निंग मॉडल के रूप में पेश करना चाहता है, जिसमें शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार को एक-दूसरे से लगातार जोड़ा जाए।
संस्थानों, कंपनियों और विद्यार्थियों को एक मंच पर लाने की योजना
MedhaviOne की मूल अवधारणा तीन प्रमुख पक्षों—education institutions, employers और learners—को एक साझा इकोसिस्टम में जोड़ने की है।
प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षा संस्थान अपने पाठ्यक्रमों और कार्यक्रमों को उद्योग में मौजूद मौजूदा मांग के अनुरूप तैयार कर सकेंगे। दूसरी ओर, कंपनियों को कौशल और क्षमताओं को डिजाइन तथा वैलिडेट करने की प्रक्रिया में अधिक प्रत्यक्ष भूमिका मिलेगी।
विद्यार्थियों और नौकरी तलाशने वालों के लिए इसका उद्देश्य ऐसे credentials तैयार करना है जिनका बाजार में वास्तविक मूल्य हो। यानी केवल डिग्री या प्रमाणपत्र रखने के बजाय उम्मीदवार अपनी व्यावहारिक क्षमता और उद्योग-प्रासंगिक कौशल को भी प्रदर्शित कर सकेगा।
NEP 2020 और National Credit Framework से जुड़ा मॉडल
कंपनी के अनुसार, MedhaviOne का आर्किटेक्चर भारत की National Education Policy (NEP) 2020 और National Credit Framework के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य शिक्षा और कौशल को अधिक लचीला तथा रोजगार-केंद्रित बनाना है।
यह मॉडल सरकार के व्यापक Viksit Bharat @2047 विजन के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि भारत की युवा आबादी को आर्थिक अवसरों में बदलने के लिए केवल शिक्षा तक पहुंच पर्याप्त नहीं है। युवाओं को ऐसे कौशल और अवसरों की जरूरत है जिन्हें उद्योग और नियोक्ता वास्तविक रूप से महत्व देते हों।
अमित हरलालका संभालेंगे नई कंपनी की कमान
MedhaviOne में अमित हरलालका की नियुक्ति को कंपनी की विस्तार रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हरलालका ने कहा कि मेडहावी ग्रुप ने पिछले वर्षों में youth employability के क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार किया है और उनका लक्ष्य इस संस्थागत अनुभव को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाना है।
उन्होंने MedhaviOne को “critical piece of national infrastructure” बताते हुए Skills-First India की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। नई भूमिका में वह मेडहावी ग्रुप के Co-Founders प्रवेश दुडानी और कुलदीप सरमा के साथ काम करेंगे। साथ ही, Group Chief Strategy Officer देवेंद्र सैनी भी इस मिशन में उनके साथ रहेंगे।
6.5 लाख से अधिक learners तक पहुंच
Medhavi Group की स्थापना 2012 में प्रवेश दुडानी और कुलदीप सरमा ने की थी। कंपनी के अनुसार, समूह ने grassroots skill development से शुरुआत करते हुए higher education, apprenticeships और industry partnerships तक अपना विस्तार किया है।
समूह का दावा है कि उसका इकोसिस्टम देशभर में 6.5 लाख से अधिक learners तक पहुंच चुका है और 600 से अधिक enterprise partners के साथ 30 से ज्यादा sectors में काम करता है। इसके साझेदारों में Hyundai, Mahindra, Hero Motors, Motherson Group, MRF, Daikin, Quess Corp, IHG Hotels और अन्य कंपनियां शामिल हैं। समूह भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना जैसी defence organisations के साथ भी partnerships का उल्लेख करता है।
Skills-First India की दिशा में बड़ा कदम
भारत में रोजगार के बदलते स्वरूप को देखते हुए skills-first approach तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही है। कंपनियां अब उम्मीदवारों की केवल शैक्षणिक योग्यता के बजाय उनकी practical capabilities, problem-solving skills, digital proficiency और industry readiness पर भी अधिक जोर दे रही हैं।
MedhaviOne इसी बदलाव को संस्थागत रूप देने की कोशिश कर रहा है। यदि शिक्षा संस्थानों के पाठ्यक्रम वास्तविक उद्योग मांग के साथ लगातार अपडेट होते हैं और employers स्वयं skills validation में शामिल होते हैं, तो इससे graduates की employability बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
कंपनी का दीर्घकालिक उद्देश्य एक ऐसा infrastructure तैयार करना है जहां भारत में लोग केवल शिक्षा हासिल न करें, बल्कि उस शिक्षा को रोजगार, करियर प्रगति और आर्थिक अवसरों में बदल सकें।
MedhaviOne का लॉन्च इसलिए भारत के तेजी से बदलते education और employment ecosystem में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा सकता है। आने वाले वर्षों में इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कितने संस्थानों, employers और learners को प्रभावी ढंग से जोड़ पाता है और उसके credentials को नौकरी बाजार में कितना व्यापक स्वीकार मिलता है।
