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4 सितंबर , 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) :  भारतीय क्रिकेट टीम के T20 उप-कप्तान तिलक वर्मा ने टेस्ट क्रिकेट खेलने की अपनी लंबे समय से चली आ रही इच्छा को खुलकर जाहिर किया है। सफेद गेंद क्रिकेट में तेजी से अपनी पहचान बनाने वाले 23 वर्षीय बाएं हाथ के बल्लेबाज का कहना है कि लाल गेंद क्रिकेट हमेशा से उनकी ताकत रही है और वह भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए घरेलू क्रिकेट में अधिक से अधिक मौके तलाश रहे हैं। दलीप ट्रॉफी में दक्षिण क्षेत्र के लिए उनके हालिया प्रदर्शन ने इस महत्वाकांक्षा को और मजबूत आधार दिया है।

तिलक ने उत्तर क्षेत्र के खिलाफ दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने पहली पारी में नाबाद 116 रन बनाए और दूसरी पारी में लक्ष्य का पीछा करते हुए नाबाद 51 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। उनके प्रदर्शन की बदौलत दक्षिण क्षेत्र ने उत्तर क्षेत्र को सात विकेट से हराकर दलीप ट्रॉफी के फाइनल में जगह बनाई।

‘लाल गेंद क्रिकेट हमेशा मेरी ताकत रही है’

मैच के बाद तिलक ने अपने टेस्ट क्रिकेट के सपने के बारे में बात करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा लाल गेंद क्रिकेट को पसंद किया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने भारत के लिए सफेद गेंद प्रारूप में खेलने का सपना नहीं देखा था, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें T20 और ODI क्रिकेट में पहुंचाया। इसके बावजूद उनका मानना है कि उनकी असली ताकत लाल गेंद क्रिकेट में है।

तिलक ने कहा कि उन्होंने करीब 10 साल की उम्र से क्रिकेट पर कड़ी मेहनत शुरू कर दी थी और 23 साल की उम्र तक लाल गेंद क्रिकेट में काफी समय बिताया। IPL और सफेद गेंद क्रिकेट के कारण उन्हें भारत की सीमित ओवरों की टीम में तेजी से जगह मिली, लेकिन इससे उनके लंबे प्रारूप के प्रति लगाव में कोई कमी नहीं आई।

उन्होंने यह भी कहा कि वह लाल गेंद क्रिकेट में रन बनाकर भारतीय टीम में टेस्ट स्थान हासिल करना चाहते हैं। उनके मुताबिक, पिछले तीन-चार वर्षों में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के व्यस्त कार्यक्रम के कारण उन्हें रणजी ट्रॉफी और अन्य प्रथम श्रेणी मुकाबलों में उतना खेलने का अवसर नहीं मिला, जितना वह चाहते थे।

53 T20I और पांच ODI खेल चुके हैं

तिलक वर्मा ने पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सफेद गेंद टीम में अपनी जगह मजबूत की है। वह अब तक 53 T20I और पांच ODI खेल चुके हैं। इसके अलावा उन्हें भारतीय T20I टीम का उप-कप्तान भी बनाया गया है, जो टीम प्रबंधन के उनके प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

उनका सफेद गेंद क्रिकेट में बढ़ता कद इस बात को दर्शाता है कि टीम प्रबंधन उन्हें भविष्य के महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में देख रहा है। हालांकि, तिलक का लक्ष्य केवल सीमित ओवरों तक खुद को सीमित रखना नहीं है। वह टेस्ट क्रिकेट में भी अपनी जगह बनाना चाहते हैं।

दलीप ट्रॉफी प्रदर्शन से मजबूत हुआ दावा

दलीप ट्रॉफी तिलक के लिए खुद को लाल गेंद क्रिकेट में साबित करने का महत्वपूर्ण मंच बन गई है। सेमीफाइनल में पहली पारी में दक्षिण क्षेत्र की स्थिति मुश्किल थी और टीम ने शुरुआती विकेट गंवा दिए थे। ऐसे समय में तिलक ने धैर्य के साथ बल्लेबाजी करते हुए पारी को संभाला और 116 रन की नाबाद पारी खेली।

दूसरी पारी में भी उन्होंने जिम्मेदारी संभाली और नाबाद 51 रन बनाकर टीम को लक्ष्य तक पहुंचाया। लगातार दो पारियों में नाबाद रहने से उनकी तकनीक, धैर्य और मैच की परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करने की क्षमता सामने आई।

इन पारियों के बाद उनकी टेस्ट दावेदारी पर चर्चा तेज होना स्वाभाविक है। भारतीय टेस्ट टीम में कुछ बल्लेबाजी स्थानों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और तिलक जैसे युवा खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन करके चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं।

सफेद गेंद से लाल गेंद में बदलाव आसान नहीं

तिलक का मानना है कि लाल गेंद क्रिकेट से सफेद गेंद क्रिकेट में जाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, लेकिन सफेद गेंद से लाल गेंद क्रिकेट में बदलाव अधिक चुनौतीपूर्ण है। टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज को लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखने, गेंद को छोड़ने की क्षमता और तकनीकी अनुशासन की जरूरत होती है।

उनका कहना है कि यदि किसी बल्लेबाज की लाल गेंद क्रिकेट में तकनीक अच्छी है, तो वह सभी प्रारूपों में सफल होने की बेहतर क्षमता रखता है। तिलक अपने घरेलू क्रिकेट अनुभव को इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानते हैं।

दलीप ट्रॉफी फाइनल खेलना चाहते हैं

दक्षिण क्षेत्र के फाइनल में पहुंचने के बाद तिलक ने स्पष्ट किया कि वह टीम के साथ फाइनल खेलना चाहेंगे। दलीप ट्रॉफी का फाइनल 6 से 10 सितंबर तक चेन्नई में होना है। इसके बाद भारत को अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की T20I सीरीज खेलनी है, जो 13 सितंबर से नई दिल्ली में शुरू होगी।

तिलक को अफगानिस्तान सीरीज के लिए भारतीय T20I टीम में शामिल किया गया है। इसलिए दलीप ट्रॉफी फाइनल में उनकी उपलब्धता का अंतिम फैसला चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन को करना है। तिलक ने हालांकि संकेत दिया है कि यदि अनुमति मिलती है तो वह फाइनल खेलना पसंद करेंगे।

कप्तानी की जिम्मेदारी भी पसंद

तिलक केवल बल्लेबाजी में ही नहीं, बल्कि नेतृत्व के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। दक्षिण क्षेत्र की कप्तानी करते हुए उन्होंने टीम को दलीप ट्रॉफी के फाइनल तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि उन्हें कप्तानी पसंद है क्योंकि इससे अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलती है और वह दबाव का आनंद लेते हैं। बचपन से ही उन्होंने हैदराबाद की विभिन्न आयु वर्ग की टीमों में कप्तानी की है।

भारतीय क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों के लिए टेस्ट टीम में जगह बनाना आसान नहीं है। लेकिन तिलक के लिए मौजूदा घरेलू प्रदर्शन एक मजबूत शुरुआत हो सकता है। यदि वह लगातार प्रथम श्रेणी क्रिकेट में रन बनाते रहते हैं और अपनी लाल गेंद तकनीक को साबित करते हैं, तो चयनकर्ताओं के सामने उन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल हो सकता है।

फिलहाल तिलक का संदेश साफ है—वह सफेद गेंद क्रिकेट में मिली सफलता से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी नजर भारत की टेस्ट जर्सी पर है और दलीप ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

Bharat Baani Bureau

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