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9 सितंबर, 2026 (भारत बानी ब्यूरो): चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी फाइनल के तीसरे दिन मोहम्मद शमी ने एक बार फिर दिखा दिया कि अनुभव और गेंद पर नियंत्रण किसी भी परिस्थिति में कितना बड़ा हथियार हो सकता है। ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए शमी ने दक्षिण क्षेत्र के बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा और 11 ओवर में चार मेडन के साथ 17 रन देकर दो विकेट हासिल किए। दूसरी ओर, दक्षिण क्षेत्र के लिए खेल रहे मोहम्मद सिराज के सामने अब अपनी लय और प्रभाव को दोबारा साबित करने की बड़ी चुनौती है।

ईस्ट जोन ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके जवाब में दक्षिण क्षेत्र की टीम तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक 242/6 तक ही पहुंच सकी और 466 रन पीछे रही। ऐसे मुश्किल लक्ष्य के सामने शमी और मुकेश कुमार ने गेंद से ऐसा दबाव बनाया कि दक्षिण क्षेत्र के बल्लेबाजों के लिए रन बनाना बेहद कठिन हो गया।

शमी ने नई और पुरानी गेंद दोनों से दिखाया कमाल

लाल मिट्टी वाली चेपॉक की पिच बल्लेबाजों के लिए पूरी तरह आसान नहीं थी, लेकिन गेंदबाजों को भी लगातार मदद नहीं मिल रही थी। ऐसे में शमी ने परिस्थितियों का इंतजार करने के बजाय अपनी लाइन और लेंथ पर भरोसा किया।

शमी और मुकेश ने छोटी-छोटी स्पेल में गेंदबाजी की। गर्मी और उमस को देखते हुए गेंदबाजों ने लंबे स्पेल के बजाय छोटे स्पेल में पूरी ताकत लगाने की रणनीति अपनाई। मुकेश ने बताया कि पांच-छह ओवर के लंबे स्पेल की जगह तीन-तीन ओवर के छोटे स्पेल किए गए, ताकि हर गेंद पर अधिकतम प्रयास किया जा सके।

शमी ने गेंद को सीम पर लैंड कराने और पिच पर जोर से मारने की रणनीति अपनाई। साथ ही गेंद की चमक बनाए रखने पर भी ध्यान दिया गया। लाल मिट्टी वाली पिच पर गेंद जल्दी खराब हो सकती थी, इसलिए गेंद को लगातार पॉलिश करना महत्वपूर्ण था। यही मेहनत बाद में रिवर्स स्विंग हासिल करने में काम आई।

शमी ने रोकी दक्षिण क्षेत्र की साझेदारी

दक्षिण क्षेत्र की शुरुआत बेहद मुश्किल रही। कुछ विकेटों के बाद देवदत्त पडिक्कल और शेख रशीद ने पारी को संभालने की कोशिश की। दोनों ने कुछ समय तक ईस्ट जोन के गेंदबाजों को परेशान किया, लेकिन शमी ने इस साझेदारी को ज्यादा आगे नहीं बढ़ने दिया।

अपने दूसरे स्पेल में शमी ने रशीद को बैक-ऑफ-लेंथ गेंद फेंकी, जो तेजी से अंदर आई और बल्लेबाज के पैड से जा टकराई। अंपायर ने एलबीडब्ल्यू की अपील स्वीकार कर ली और दक्षिण क्षेत्र को महत्वपूर्ण झटका लगा। इसके तुरंत बाद मुकेश कुमार ने पडिक्कल को भी पवेलियन भेज दिया। पडिक्कल 66 रन बनाकर आउट हुए।

बाद में शमी ने रविचंद्रन स्मरण का विकेट लेकर अपना दूसरा शिकार पूरा किया। तीसरे दिन के अंत में उनके आंकड़े 11-4-17-2 रहे—ऐसे विकेट पर यह बेहद प्रभावशाली प्रदर्शन था।

सिराज के लिए बढ़ी चुनौती

इस मुकाबले में मोहम्मद सिराज की मौजूदगी ने इसे और दिलचस्प बना दिया है। भारतीय टीम के प्रमुख तेज गेंदबाजों में शामिल सिराज दक्षिण क्षेत्र के लिए खेल रहे हैं। दलीप ट्रॉफी का फाइनल उनके लिए घरेलू क्रिकेट में लय हासिल करने का महत्वपूर्ण अवसर है।

हाल के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में सिराज की गेंदबाजी को लेकर सवाल उठे हैं। श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट के बाद उनकी फॉर्म और विकेट लेने की क्षमता पर चर्चा हुई थी। दूसरे टेस्ट में भी उन्होंने 26 ओवर में दो विकेट हासिल किए थे। ऐसे में दलीप ट्रॉफी का यह मुकाबला उनके लिए खुद को फिर से साबित करने का मौका है।

यही वजह है कि चेपॉक में शमी की गेंदबाजी उनके लिए एक तरह की मास्टरक्लास बन गई। जहां शमी ने सीम, लेंथ, गेंद की चमक और रिवर्स स्विंग का बेहतरीन इस्तेमाल किया, वहीं दक्षिण क्षेत्र के गेंदबाजों को ईस्ट जोन के 708 रन के विशाल स्कोर के बाद बल्लेबाजों पर दबाव बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा।

शमी के अनुभव की एक और मिसाल

शमी के प्रदर्शन को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह अब अपने करियर के उस दौर में हैं जहां रफ्तार से ज्यादा गेंदबाजी की समझ और परिस्थितियों का इस्तेमाल उनकी ताकत बन गई है।

पूर्व भारतीय गेंदबाजी कोच भरत अरुण ने भी हाल में शमी की क्षमता और उनके लगातार क्रिकेट खेलने के जुनून की तारीफ की थी। शमी लंबे समय से भारतीय टीम से बाहर हैं, लेकिन घरेलू क्रिकेट में लगातार विकेट लेकर उन्होंने अपनी दावेदारी बनाए रखी है।

ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन भी शमी के जुनून से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा था कि शमी में अब भी भारत के लिए खेलने की भूख और प्रेरणा मौजूद है। शमी ने दलीप ट्रॉफी में अपने 100वें प्रथम श्रेणी मैच के मौके पर भी यही साबित किया कि वह अभी क्रिकेट से दूर जाने के मूड में नहीं हैं।

टीम इंडिया की नजरों में वापसी की उम्मीद

शमी के लिए घरेलू क्रिकेट में ऐसे प्रदर्शन का महत्व केवल व्यक्तिगत आंकड़ों तक सीमित नहीं है। वह भारतीय टीम में वापसी की उम्मीद बनाए हुए हैं और 2027 वनडे विश्व कप को अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के संभावित लक्ष्य के रूप में देख रहे हैं।

वहीं सिराज के लिए चुनौती अलग है। वह अभी भी भारतीय क्रिकेट की योजनाओं का हिस्सा हैं और उनके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का पर्याप्त अनुभव है। लेकिन शमी का मौजूदा प्रदर्शन यह याद दिलाता है कि भारतीय तेज गेंदबाजी में प्रतिस्पर्धा कितनी कड़ी है।

दलीप ट्रॉफी फाइनल के तीसरे दिन का संदेश साफ था—शमी ने उम्र और परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए अनुभव की ताकत दिखाई, जबकि सिराज के सामने अपनी गेंदबाजी में वही धार और निरंतरता वापस लाने की चुनौती बनी हुई है। दक्षिण क्षेत्र अभी 466 रन पीछे है और मुकाबले में दो दिन बाकी हैं। ऐसे में सिराज और उनकी टीम के लिए वापसी का रास्ता निश्चित रूप से आसान नहीं होगा।

Bharat Baani Bureau

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