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11 सितंबर, 2026 (भारत बानी ब्यूरो) रात में पार्टनर के खर्राटों को अक्सर महज एक परेशान करने वाली आदत माना जाता है, लेकिन लगातार होने वाली यह आवाज आपके स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को हर रात पार्टनर के खर्राटों के कारण बार-बार नींद टूटती है या पर्याप्त गहरी नींद नहीं मिलती, तो इसका असर अगले दिन की ऊर्जा, एकाग्रता और मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है।

कई लोगों के लिए ऐसी रात के बाद सुबह उठना कुछ-कुछ ‘हैंगओवर’ जैसा महसूस हो सकता है—भले ही उन्होंने शराब का सेवन न किया हो। इसका कारण नींद का लगातार बाधित होना है। शरीर और मस्तिष्क को स्वस्थ रहने के लिए रात में लगातार और पर्याप्त नींद की जरूरत होती है।

खर्राटे नींद को कैसे प्रभावित करते हैं?

जब कोई व्यक्ति खर्राटे लेता है, तो उसके गले और ऊपरी श्वसन मार्ग से गुजरने वाली हवा आसपास के ऊतकों में कंपन पैदा करती है। हल्के खर्राटे कभी-कभार सामान्य हो सकते हैं, लेकिन तेज और लगातार खर्राटे किसी बड़ी समस्या का संकेत भी हो सकते हैं।

पार्टनर के खर्राटों की आवाज इतनी तेज हो सकती है कि बगल में सो रहे व्यक्ति की नींद बार-बार टूट जाए। कई बार व्यक्ति पूरी तरह जागता भी नहीं, लेकिन उसकी नींद की गहराई कम हो जाती है। इसका मतलब है कि वह कई घंटों तक बिस्तर पर रहने के बावजूद वास्तव में अच्छी गुणवत्ता वाली नींद हासिल नहीं कर पाता।

सुबह थकान और चिड़चिड़ापन

नींद पूरी तरह बाधित होने पर अगले दिन थकान महसूस होना सबसे आम प्रभावों में से एक है। व्यक्ति को सुबह उठने में कठिनाई हो सकती है और दिनभर सुस्ती बनी रह सकती है।

इसके अलावा, लगातार नींद की कमी मूड को भी प्रभावित कर सकती है। व्यक्ति अधिक चिड़चिड़ा, तनावग्रस्त या भावनात्मक रूप से परेशान महसूस कर सकता है। एकाग्रता और याददाश्त पर भी असर पड़ सकता है।

यही वजह है कि लंबे समय तक पार्टनर के खर्राटों से परेशान लोगों को कभी-कभी ऐसा महसूस होता है जैसे उन्होंने रातभर आराम करने के बजाय कोई भारी काम किया हो।

‘स्लीप डिवोर्स’ का बढ़ता चलन

खर्राटों की समस्या से परेशान कुछ दंपती अलग-अलग कमरों में सोने का विकल्प चुनते हैं। इसे आम तौर पर ‘स्लीप डिवोर्स’ कहा जाता है। इसका उद्देश्य रिश्ते में दूरी पैदा करना नहीं, बल्कि दोनों पार्टनरों को बेहतर नींद दिलाना होता है।

नींद विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अलग सोने से दोनों लोगों की नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है, तो इसे रिश्ते की समस्या के रूप में देखने के बजाय स्वास्थ्य संबंधी समाधान के तौर पर देखा जा सकता है।

हालांकि, अलग सोने से पहले खर्राटे लेने वाले व्यक्ति की समस्या का कारण समझना भी महत्वपूर्ण है।

क्या खर्राटे स्लीप एपनिया का संकेत हैं?

तेज और लगातार खर्राटे कभी-कभी ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) का संकेत हो सकते हैं। इस स्थिति में नींद के दौरान सांस लेने का रास्ता बार-बार अवरुद्ध हो जाता है और कुछ समय के लिए सांस रुक सकती है।

स्लीप एपनिया से पीड़ित व्यक्ति में तेज खर्राटों के साथ रात में हांफना या घुटन महसूस होना, बार-बार जागना और सुबह सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। दिन में अत्यधिक नींद आना भी इसका एक संकेत हो सकता है।

ऐसी स्थिति में केवल पार्टनर की नींद प्रभावित नहीं होती, बल्कि खर्राटे लेने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

लंबे समय तक नींद की कमी को नजरअंदाज न करें

यदि पार्टनर के खर्राटों के कारण किसी व्यक्ति की नींद लगातार खराब हो रही है, तो इसे सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक पर्याप्त नींद न मिलने का संबंध कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा पाया गया है।

बेहतर नींद के लिए सोने का नियमित समय बनाए रखना, कमरे में शोर और रोशनी कम करना तथा सोने से पहले कैफीन और स्क्रीन का इस्तेमाल सीमित करना मददगार हो सकता है। लेकिन यदि खर्राटे बहुत तेज हैं या सांस रुकने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना अधिक महत्वपूर्ण है।

पार्टनर के स्वास्थ्य की भी करें चिंता

खर्राटों को लेकर बातचीत करते समय इसे केवल ‘शोर’ की समस्या के रूप में देखने के बजाय स्वास्थ्य के मुद्दे के तौर पर समझना चाहिए। कई बार खर्राटे लेने वाला व्यक्ति खुद इस बात से अनजान होता है कि उसकी नींद या सांस लेने की प्रक्रिया में समस्या हो रही है।

इसलिए लगातार खर्राटे, दिन में अत्यधिक नींद, सुबह सिरदर्द या नींद के दौरान सांस रुकने जैसे संकेत दिखाई दें तो डॉक्टर या स्लीप विशेषज्ञ से संपर्क करना उचित है।

आखिरकार, अच्छी नींद केवल अगले दिन तरोताजा महसूस करने के लिए जरूरी नहीं है। यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर पार्टनर के खर्राटे आपको हर सुबह ‘हैंगओवर’ जैसा महसूस करा रहे हैं, तो समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय उसके कारण का पता लगाना दोनों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर कदम हो सकता है।

Bharat Baani Bureau

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