15 सितंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो)। भारतीय निशानेबाजी की युवा स्टार ईशा सिंह इस समय जिस शानदार फॉर्म में हैं, उसने उन्हें आगामी एशियाई खेलों में भारत की सबसे मजबूत पदक दावेदारों में शामिल कर दिया है। 21 वर्षीय ईशा ने 2026 में लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन किया है और अब उनकी नजर जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों में बड़े पदक पर है।
ईशा की मौजूदा फॉर्म का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल में विश्व नंबर-1 और 10 मीटर एयर पिस्टल में विश्व नंबर-2 के रूप में एशियाई खेलों में उतरेंगी। इससे उन पर उम्मीदों का दबाव भी बढ़ा है, लेकिन उनके हालिया प्रदर्शन बताते हैं कि वह इस चुनौती के लिए तैयार हैं।
2026 में लगातार बड़ी उपलब्धियां
ईशा के लिए 2026 का सत्र बेहद प्रभावशाली रहा है। फरवरी में नई दिल्ली में हुए एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप में उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल का व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता। फाइनल में उन्होंने 239.8 अंक के साथ चीनी ताइपे की चेंग येन-चिंग को पीछे छोड़ा। इसके अलावा ईशा ने मनु भाकर और सुरभि/सुरुचि सिंह के साथ मिलकर टीम स्पर्धा में भी स्वर्ण जीता।
इसके बाद मई में म्यूनिख ISSF वर्ल्ड कप में ईशा ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीतते हुए 43 हिट का विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह प्रदर्शन इस साल की उनकी सबसे प्रभावशाली उपलब्धियों में से एक रहा।
जुलाई में हांगझोऊ ISSF वर्ल्ड कप में भी उन्होंने 25 मीटर पिस्टल में स्वर्ण अपने नाम किया। फाइनल में ईशा ने 40 हिट दर्ज किए और चीन की झांग यूएयूए को पीछे छोड़ा। इस स्पर्धा में मनु भाकर ने कांस्य पदक जीता, जिससे भारत ने एक ही इवेंट में दो पदक हासिल किए।
10 मीटर और 25 मीटर दोनों में मजबूत
ईशा की खासियत यह है कि वह केवल एक स्पर्धा पर निर्भर नहीं हैं। वह 10 मीटर एयर पिस्टल और 25 मीटर पिस्टल, दोनों में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
नई दिल्ली में हुए एशियन चैंपियनशिप के 25 मीटर पिस्टल क्वालिफिकेशन में भी ईशा ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 589-24x का स्कोर बनाया और क्वालिफिकेशन में शीर्ष स्थान हासिल किया।
दोनों स्पर्धाओं में निरंतरता ईशा को एशियाई खेलों में भारत के लिए संभावित मल्टी-मेडल उम्मीदवार बनाती है। हालांकि एशिया में शूटिंग का स्तर बेहद ऊंचा है और किसी भी प्रतियोगिता में मामूली अंतर पदक का फैसला कर सकता है।
हांगझोऊ का अनुभव भी बनेगा ताकत
ईशा के पास एशियाई खेलों का अनुभव भी है। हांगझोऊ एशियाई खेलों में उन्होंने चार पदक—एक स्वर्ण और तीन रजत—जीते थे। उस समय वह केवल 18 वर्ष की थीं और अचानक मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान के बावजूद उन्होंने दबाव के बीच प्रभावशाली प्रदर्शन किया था।
अब तीन साल बाद ईशा अधिक अनुभवी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित खिलाड़ी हैं। इस बार उनसे केवल पदक की उम्मीद नहीं बल्कि स्वर्ण की दावेदारी की उम्मीद की जा रही है।
चुनौती भी कम नहीं
एशियाई खेलों में ईशा को मजबूत प्रतिद्वंद्वियों का सामना करना होगा। दक्षिण कोरिया की ओह ये-जिन, चीन की याओ चियानशुन और भारत की ही ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर जैसी निशानेबाज मुकाबले को बेहद कठिन बनाएंगी।
यही वजह है कि ईशा के कोच रोनक पंडित लगातार प्रशिक्षण के साथ मानसिक मजबूती पर भी जोर दे रहे हैं। शूटिंग में तकनीकी क्षमता के साथ दबाव के क्षणों में सही निर्णय और स्थिर मानसिकता बेहद महत्वपूर्ण होती है।
दबाव को प्रदर्शन में बदलने की चुनौती
ईशा ने हाल के महीनों में जिस तरह लगातार बड़े टूर्नामेंटों में प्रदर्शन किया है, उससे उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी निरंतरता और दबाव में नियंत्रण दिखाई देती है। लेकिन एशियाई खेलों का माहौल अलग होगा। यहां पदक की उम्मीद, देश की अपेक्षाएं और मजबूत एशियाई प्रतिद्वंद्वियों का दबाव एक साथ होगा।
ईशा के लिए चुनौती यही होगी कि वह अपनी मौजूदा विश्वस्तरीय रैंकिंग और शानदार रिकॉर्ड को प्रतियोगिता के दिन के प्रदर्शन में बदलें।
भारत की पदक उम्मीदों के केंद्र में ईशा
19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारत का लक्ष्य हांगझोऊ के 107 पदकों के प्रदर्शन को दोहराना या उससे आगे निकलना है। शूटिंग उन खेलों में शामिल है जिनसे भारत को इस लक्ष्य में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।
ईशा सिंह की 2026 की फॉर्म को देखते हुए उनसे विशेष उम्मीदें होंगी। विश्व रैंकिंग, वर्ल्ड कप स्वर्ण, विश्व रिकॉर्ड और एशियन चैंपियनशिप के प्रदर्शन ने उनके पक्ष में मजबूत आधार तैयार कर दिया है।
अब असली परीक्षा एशियाई खेलों के शूटिंग रेंज पर होगी। अगर ईशा अपनी मौजूदा लय और मानसिक मजबूती बरकरार रख पाती हैं, तो नागोया में भारत के लिए एक से अधिक पदक जीतने वाली निशानेबाजों में उनका नाम सबसे आगे हो सकता है।
