25 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। पंजाब सरकार ने अनुसूचित जाति (एससी) की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी वाले राज्य के 3,763 गांवों के समग्र और समावेशी विकास के लिए 750 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने की योजना की घोषणा की है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि इस पहल का उद्देश्य लंबे समय से विकास से वंचित क्षेत्रों तक बुनियादी सुविधाएं और समान अवसर पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक विभाग इस कार्यक्रम के लिए नोडल विभाग के रूप में काम करेगा, जबकि ग्रामीण विकास और बागवानी विभाग आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे। जिला उपायुक्तों को प्रत्येक गांव की जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों की पहचान और प्राथमिकता तय करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। <Cite refs={[“turn629636search1″,”turn629636search2″,”turn629636search3”]}/>
प्रत्येक गांव को शुरुआती 20 लाख रुपये की अनटाइड राशि
सरकार की योजना के तहत प्रत्येक चिन्हित गांव को शुरुआत में 20 लाख रुपये की अनटाइड राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इस राशि का उपयोग स्थानीय जरूरतों के अनुसार किया जा सकेगा। उचित उपयोग और अतिरिक्त आवश्यकताओं के आकलन के बाद गांवों के लिए आवंटन बढ़ाने की संभावना भी रखी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों का चयन गांवों की वास्तविक जरूरतों के आधार पर किया जाना चाहिए, ताकि सरकारी धन का इस्तेमाल उन परियोजनाओं पर हो जिनसे स्थानीय निवासियों को अधिक लाभ मिल सके। इसके लिए प्रत्येक गांव का एक विशिष्ट ग्राम विकास प्लान (Village Development Plan—VDP) तैयार किया जाएगा।
इन योजनाओं का उद्देश्य विकास कार्यों को जरूरत आधारित, समन्वित और परिणामोन्मुख बनाना है। इससे अलग-अलग विभागों द्वारा किए जाने वाले कार्यों में तालमेल स्थापित करने और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में संसाधनों का इस्तेमाल करने में मदद मिलने की उम्मीद है। <Cite refs={[“turn629636search1″,”turn629636search6″,”turn629636search7”]}/>
पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर
मुख्यमंत्री के अनुसार, गांवों को मिलने वाली राशि का इस्तेमाल कई प्रकार की स्थानीय बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किया जा सकता है। इनमें रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) जल प्रणालियां, अतिरिक्त स्कूल कक्ष, पुस्तकालय, एंबुलेंस, मोहल्ला क्लीनिक और सौर ऊर्जा से संचालित स्ट्रीट लाइटें शामिल हैं।
स्थानीय जरूरतों के आधार पर अन्य नागरिक सुविधाओं को भी विकास योजनाओं में शामिल किया जा सकता है। किसी गांव में पेयजल व्यवस्था को प्राथमिकता मिल सकती है, जबकि दूसरे गांव में स्कूल भवन, स्वास्थ्य सुविधा, प्रकाश व्यवस्था या सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की जरूरत अधिक हो सकती है।
सरकार की योजना में गांव-विशेष की आवश्यकताओं को ध्यान में रखने पर जोर दिया गया है। हालांकि, प्रत्येक गांव में स्वीकृत होने वाले कार्यों, उनकी लागत और पूरा होने की समयसीमा का विवरण संबंधित ग्राम विकास योजना तथा प्रशासनिक मंजूरी के बाद स्पष्ट होगा। <Cite refs={[“turn629636search1″,”turn629636search2″,”turn629636search6”]}/>
सामाजिक न्याय को कल्याण से आगे ले जाने का दावा
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सामाजिक न्याय केवल कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका संबंध सम्मान, अवसर और सशक्तिकरण से भी है। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास में उन समुदायों और क्षेत्रों को भी समान अवसर मिलना चाहिए, जो लंबे समय से पिछड़ेपन या सुविधाओं की कमी का सामना करते रहे हैं।
सरकार के अनुसार, कार्यक्रम का लक्ष्य केवल धन खर्च करना नहीं, बल्कि गांवों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। इसके तहत स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।
यह बयान सरकार के घोषित समावेशी ग्रामीण विकास दृष्टिकोण को दर्शाता है। हालांकि, योजना के वास्तविक प्रभाव का आकलन इसके क्रियान्वयन, परियोजनाओं की गुणवत्ता, समय पर धनराशि जारी होने और स्थानीय स्तर पर निगरानी के आधार पर किया जा सकेगा।
आजीविका के लिए 50 हजार रुपये की सहायता
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने आर्थिक सशक्तिकरण से संबंधित एक अन्य पहल की भी जानकारी दी। सरकार के अनुसार, लोगों को आय अर्जित करने वाली गतिविधियां शुरू करने या मौजूदा काम को मजबूत करने के लिए 50,000 रुपये की ग्रांट-इन-एड प्रदान की जाएगी।
इस सहायता का उद्देश्य लाभार्थियों को आजीविका के अवसर विकसित करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करना है। हालांकि, इस सहायता के लिए पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, लाभार्थियों की संख्या और धनराशि जारी करने के नियमों की विस्तृत जानकारी संबंधित विभाग की आधिकारिक दिशा-निर्देशों के माध्यम से स्पष्ट होगी।
आजीविका सहायता और गांवों के बुनियादी ढांचे में निवेश को साथ लेकर चलने का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देना बताया गया है। <Cite refs={[“turn629636search3″,”turn629636search4″,”turn629636search6”]}/>
पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के भुगतान की समीक्षा
बैठक में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि छात्रवृत्ति के 97 प्रतिशत भुगतान किए जा चुके हैं। उन्होंने अधिकारियों को शेष भुगतान बिना अनावश्यक देरी के जारी करने के निर्देश दिए।
पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य पात्र अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा जारी रखने में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। भुगतान में देरी विद्यार्थियों की पढ़ाई, फीस और अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं को प्रभावित कर सकती है। इसलिए शेष मामलों के निपटारे पर जोर दिया गया है।
छात्रवृत्ति भुगतान से संबंधित वास्तविक प्रगति का आकलन करने के लिए लाभार्थियों की संख्या, लंबित मामलों और भुगतान की समयसीमा से जुड़ी विभागीय जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
अधिकारियों को प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश
बैठक में पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. रवि भगत और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को योजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय बनाए रखने तथा विकास कार्यों के लिए स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
3,763 गांवों के लिए प्रस्तावित कार्यक्रम का अगला चरण ग्राम विकास योजनाओं की तैयारी, कार्यों की पहचान, धनराशि के उपयोग और परियोजनाओं की प्रशासनिक मंजूरी से जुड़ा होगा। प्रत्येक गांव में कौन-से कार्य किए जाएंगे, इसका निर्णय स्थानीय आवश्यकताओं और संबंधित अधिकारियों के आकलन के आधार पर किया जाना है।
सरकार ने इस कार्यक्रम को सामाजिक न्याय और संतुलित ग्रामीण विकास से जोड़ा है। योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि चिन्हित गांवों में धनराशि समय पर पहुंचे, परियोजनाएं निर्धारित मानकों के अनुसार पूरी हों और स्थानीय निवासियों को उनका वास्तविक लाभ मिले।
