25 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो)। कोलेस्ट्रॉल को लंबे समय से हृदय रोग के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल किया जाता रहा है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार केवल एक कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट देखकर किसी व्यक्ति के हृदय स्वास्थ्य का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता। 2026 में जारी अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (ACC) और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) की नई डिस्लिपिडेमिया गाइडलाइंस ने कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन के तरीके में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।
नई गाइडलाइंस ने 2018 की ब्लड कोलेस्ट्रॉल गाइडलाइन को प्रतिस्थापित किया है। इसमें LDL कोलेस्ट्रॉल के साथ-साथ ट्राइग्लिसराइड्स, लिपोप्रोटीन(a) यानी Lp(a), ApoB, रक्तचाप, ब्लड शुगर और किडनी स्वास्थ्य जैसे कारकों को भी हृदय रोग के जोखिम के आकलन में महत्व दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य जोखिम की पहचान पहले करना और जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत उपचार शुरू करना है। <Cite refs={[“turn894196search0″,”turn894196search2″,”turn894196search15”]}/>
केवल LDL नहीं, पूरे हृदय जोखिम का आकलन
LDL को आमतौर पर “खराब” कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है, क्योंकि इसका बढ़ा हुआ स्तर धमनियों में प्लाक जमा होने और एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (ASCVD) के जोखिम से जुड़ा है। नई गाइडलाइंस LDL को कम करने के महत्व को बनाए रखती हैं, लेकिन यह भी बताती हैं कि अन्य लिपोप्रोटीन और स्वास्थ्य संबंधी कारक भी जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।
इस दृष्टिकोण के तहत डॉक्टरों को किसी व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक इतिहास, रक्तचाप, मधुमेह, किडनी की स्थिति, पहले से मौजूद हृदय रोग और अन्य जोखिम कारकों को साथ लेकर निर्णय लेने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी व्यक्ति का LDL स्तर सामान्य सीमा के आसपास होने पर भी अन्य जोखिम कारकों के कारण उसका हृदय रोग का खतरा बढ़ा हो सकता है। इसलिए कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट को व्यक्ति के पूरे स्वास्थ्य संदर्भ में समझना जरूरी है। <Cite refs={[“turn894196search1″,”turn894196search3”]}/>
30 वर्ष की उम्र से जोखिम का आकलन
नई गाइडलाइंस में PREVENT-ASCVD रिस्क इक्वेशन को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। यह मॉडल हृदय रोग के जोखिम का आकलन करने के लिए पहले इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों की तुलना में अधिक व्यापक जानकारी का उपयोग करता है।
PREVENT मॉडल को 30 वर्ष की उम्र से जोखिम आकलन में इस्तेमाल करने की सिफारिश की गई है। इसमें ब्लड शुगर और किडनी स्वास्थ्य से जुड़े संकेतकों को भी शामिल किया जाता है। इसका उद्देश्य केवल निकट भविष्य के जोखिम का अनुमान लगाना नहीं, बल्कि समय रहते जीवनशैली में बदलाव और उपचार संबंधी निर्णय लेने में मदद करना है। <Cite refs={[“turn894196search1″,”turn894196search3″,”turn894196search7”]}/>
कार्डियोलॉजिस्टों का कहना है कि उच्च कोलेस्ट्रॉल का प्रभाव लंबे समय तक जमा हो सकता है। इसलिए जोखिम की पहचान केवल अधेड़ उम्र में नहीं, बल्कि जीवन के शुरुआती चरणों में भी महत्वपूर्ण है।
LDL के लिए अब स्पष्ट उपचार लक्ष्य
2026 की गाइडलाइंस में कुछ जोखिम श्रेणियों के लिए LDL और नॉन-HDL कोलेस्ट्रॉल के विशिष्ट लक्ष्य फिर से शामिल किए गए हैं। उपचार का लक्ष्य व्यक्ति के अनुमानित हृदय जोखिम और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों के आधार पर तय किया जाना चाहिए।
ACC की व्याख्या के अनुसार, उच्च जोखिम वाले प्राथमिक रोकथाम समूह में LDL-C को 70 mg/dL से कम और नॉन-HDL-C को 100 mg/dL से कम रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बॉर्डरलाइन या इंटरमीडिएट जोखिम वाले कुछ लोगों में LDL-C का लक्ष्य 100 mg/dL से कम और नॉन-HDL-C का लक्ष्य 130 mg/dL से कम हो सकता है।
हालांकि, ये लक्ष्य सभी लोगों के लिए एक जैसे नहीं हैं। जिन लोगों को पहले से हृदय रोग है या जिनका जोखिम बहुत अधिक है, उनके लिए उपचार के लक्ष्य और दवाओं की जरूरत अलग हो सकती है। दवा शुरू करने या उसकी खुराक बदलने का निर्णय डॉक्टर द्वारा किया जाना चाहिए। <Cite refs={[“turn894196search5″,”turn894196search7”]}/>
Lp(a) की जांच पर बढ़ा जोर
नई गाइडलाइंस में लिपोप्रोटीन(a), जिसे Lp(a) कहा जाता है, की जांच को अधिक महत्व दिया गया है। यह एक प्रकार का लिपोप्रोटीन है, जिसका स्तर काफी हद तक आनुवंशिक कारकों से प्रभावित होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, Lp(a) का बढ़ा हुआ स्तर कुछ लोगों में हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम से जुड़ा हो सकता है। नई सिफारिशों में प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कम से कम एक बार Lp(a) की जांच पर जोर दिया गया है।
यदि किसी व्यक्ति का Lp(a) स्तर अधिक पाया जाता है, तो डॉक्टर अन्य जोखिम कारकों—जैसे LDL, रक्तचाप, मधुमेह और पारिवारिक इतिहास—को ध्यान में रखते हुए रोकथाम की रणनीति तैयार कर सकते हैं। <Cite refs={[“turn894196search0″,”turn894196search5″,”turn894196search15”]}/>
ApoB जांच से मिल सकती है अतिरिक्त जानकारी
नई गाइडलाइंस में ApoB यानी एपोलिपोप्रोटीन B की चुनिंदा परिस्थितियों में जांच का भी उल्लेख है। यह जांच उन कणों के बारे में अतिरिक्त जानकारी दे सकती है जो धमनियों में प्लाक बनने की प्रक्रिया से जुड़े होते हैं।
विशेष रूप से ट्राइग्लिसराइड्स बढ़े होने, टाइप-2 डायबिटीज, कार्डियोवैस्कुलर-किडनी-मेटाबोलिक समस्याओं या पहले से मौजूद हृदय रोग वाले मरीजों में ApoB की जांच उपचार संबंधी निर्णयों को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
हालांकि, हर व्यक्ति को नियमित रूप से सभी अतिरिक्त जांच कराने की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री और मौजूदा रिपोर्ट के आधार पर तय करते हैं कि कौन-सी जांच उपयोगी होगी। <Cite refs={[“turn894196search0″,”turn894196search10”]}/>
कैल्शियम स्कोरिंग से जोखिम की नई पहचान
नई गाइडलाइंस में कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम (CAC) स्कोरिंग की भूमिका को भी मजबूत किया गया है। यह जांच हृदय की धमनियों में जमा कैल्शियमयुक्त प्लाक की मात्रा का आकलन करने के लिए विशेष सीटी स्कैन के माध्यम से की जाती है।
जिन मरीजों में दवा शुरू करने का निर्णय स्पष्ट नहीं है, उनमें CAC स्कोर अतिरिक्त जानकारी दे सकता है। कुछ कम या मध्यम जोखिम वाले लोगों में शून्य CAC स्कोर उपचार संबंधी निर्णय को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति को भविष्य में हृदय रोग का कोई जोखिम नहीं है।
CAC स्कोर की व्याख्या उम्र, लक्षण, पारिवारिक इतिहास और अन्य स्वास्थ्य परिस्थितियों के साथ की जानी चाहिए। <Cite refs={[“turn894196search5″,”turn894196search7”]}/>
जीवनशैली में बदलाव अब भी सबसे महत्वपूर्ण
नई गाइडलाइंस में दवाओं के साथ स्वस्थ जीवनशैली को भी प्राथमिकता दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण के लिए केवल दवा पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। खान-पान, शारीरिक गतिविधि, वजन, नींद और अन्य जोखिम कारकों पर ध्यान देना भी जरूरी है।
हृदय स्वास्थ्य के लिए सुझाए गए प्रमुख उपायों में शामिल हैं:
- सब्जियों, फलों, साबुत अनाज, दालों, मेवों और बीजों से भरपूर आहार लेना।
- संतृप्त वसा, अतिरिक्त चीनी, अत्यधिक नमक और अल्ट्राप्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना।
- नियमित शारीरिक गतिविधि करना।
- धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों से बचना।
- रक्तचाप, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित निगरानी करना।
- स्वस्थ वजन बनाए रखना और पर्याप्त नींद लेना। <Cite refs={[“turn894196search14″,”turn894196search15”]}/>
क्या हर व्यक्ति को कोलेस्ट्रॉल की दवा लेनी होगी?
नई गाइडलाइंस का उद्देश्य हर व्यक्ति को कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा देना नहीं है। उपचार का निर्णय व्यक्ति के कुल हृदय जोखिम, LDL स्तर, पहले से मौजूद बीमारियों, पारिवारिक इतिहास और संभावित लाभ-हानि के आधार पर किया जाता है।
मधुमेह, गंभीर किडनी रोग, बहुत अधिक LDL या पहले से मौजूद हृदय रोग वाले लोगों के लिए दवा संबंधी सिफारिशें अलग हो सकती हैं। कुछ मामलों में जीवनशैली में बदलाव पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि अन्य लोगों को दवाओं की आवश्यकता पड़ सकती है।
किसी भी व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह के बिना स्टैटिन या अन्य कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए।
भारतीय मरीजों के लिए क्या मायने हैं?
2026 की ACC/AHA गाइडलाइन मुख्य रूप से अमेरिकी चिकित्सा व्यवस्था और उपलब्ध जोखिम आकलन मॉडल पर आधारित है। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों के लिए इसके सभी जोखिम प्रतिशत या उपचार लक्ष्य सीधे लागू मान लेना उचित नहीं होगा।
भारतीय मरीजों में पारिवारिक इतिहास, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, जीवनशैली, उम्र, धूम्रपान और अन्य स्थानीय स्वास्थ्य कारकों को ध्यान में रखना जरूरी है। भारत में उपचार संबंधी निर्णय स्थानीय चिकित्सकीय दिशानिर्देशों और डॉक्टर के व्यक्तिगत आकलन के अनुसार लिए जाने चाहिए।
फिर भी, नई गाइडलाइन का व्यापक संदेश उपयोगी है: हृदय रोग की रोकथाम के लिए जोखिम की पहचान जल्दी करें, नियमित जांच कराएं और जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत उपचार अपनाएं।
निष्कर्ष
2026 की नई कोलेस्ट्रॉल गाइडलाइंस हृदय स्वास्थ्य को केवल एक LDL रिपोर्ट तक सीमित नहीं रखतीं। इनमें शुरुआती जोखिम आकलन, व्यक्तिगत उपचार लक्ष्य, Lp(a) और ApoB जैसे अतिरिक्त संकेतकों की भूमिका, CAC स्कोरिंग और जीवनशैली में बदलाव पर जोर दिया गया है।
कोलेस्ट्रॉल बढ़ना अक्सर बिना स्पष्ट लक्षणों के हो सकता है। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर से समय पर परामर्श महत्वपूर्ण है। नई सिफारिशों का उद्देश्य हृदय रोग होने के बाद उपचार करने के बजाय जोखिम की पहचान कर पहले से रोकथाम के प्रयासों को मजबूत करना है।
