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28 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती कारोबार में तेज गिरावट देखने को मिली। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका-ईरान तनाव को लेकर बढ़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा पर दबाव डाला। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स करीब 730 अंक गिरकर 73,170.12 पर आ गया, जबकि निफ्टी 50 करीब 231.50 अंक फिसलकर 22,908.95 पर पहुंच गया।

बाजार में यह दबाव ऐसे समय आया है जब निवेशक पहले से ही ऊंची तेल कीमतों, विदेशी पूंजी की निकासी, कमजोर रुपये और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी को लेकर सतर्क हैं। शुक्रवार तक सेंसेक्स और निफ्टी लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए थे।

ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर के पार

बाजार में गिरावट का प्रमुख कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। सोमवार को ब्रेंट क्रूड वायदा करीब 2.27 प्रतिशत बढ़कर 106.7 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। इससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए आयात बिल और मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।

ऊंचे कच्चे तेल का असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है। विमानन, परिवहन, पेंट, रसायन और अन्य ईंधन-आधारित उद्योगों की लागत बढ़ने की आशंका बाजार में निवेशकों के लिए एक चिंता का विषय बनी हुई है।

अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता

निवेशकों की चिंता को अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने और बढ़ाया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और संघर्ष खत्म करने की दिशा में बातचीत का प्रस्ताव था।

इसके बाद बाजार में यह आशंका बढ़ी कि क्षेत्र में तनाव और लंबे समय तक जारी रह सकता है तथा तेल आपूर्ति पर दबाव बना रह सकता है। रॉयटर्स के अनुसार, इसी गतिरोध के बाद तेल कीमतों में तेजी आई और भारतीय बाजारों के लिए शुरुआती संकेत कमजोर रहे।

रुपये पर भी दबाव

कच्चे तेल की महंगाई का असर भारतीय रुपये पर भी दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में रुपया 20 पैसे कमजोर होकर 95.95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। ऊंची तेल कीमतें भारत के आयात बिल और विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

अगर तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो इससे देश के व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति पर असर पड़ने की संभावना बाजार के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बनी रहेगी।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी निवेशकों की चिंता का कारण बनी हुई हैं। उपलब्ध एक्सचेंज आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को भारतीय शेयरों में 3,693.93 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी।

विदेशी पूंजी की लगातार निकासी के साथ ऊंची तेल कीमतें और वैश्विक स्तर पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड भारतीय इक्विटी बाजार के लिए अतिरिक्त दबाव पैदा कर रही हैं।

निफ्टी 23,000 के नीचे

शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 23,000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया। बाजार विश्लेषकों की नजर अब इस स्तर के आसपास होने वाली खरीदारी और बिकवाली पर है।

सोमवार से पहले निफ्टी और सेंसेक्स लगातार सात सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए थे। हालांकि, शुक्रवार को दोनों सूचकांकों में कुछ सुधार देखने को मिला था। निफ्टी 50 शुक्रवार को 23,140.50 पर बंद हुआ था, जबकि सेंसेक्स में भी तेजी आई थी।

आगे बाजार की नजर किन कारकों पर?

आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान घटनाक्रम, रुपये की चाल, विदेशी निवेश और वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर रहेगी।

विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ा घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस मार्ग से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। वहां किसी भी लंबे व्यवधान की आशंका तेल कीमतों और वैश्विक बाजारों पर असर डाल सकती है।

इसके अलावा, अमेरिका में आने वाले आर्थिक आंकड़े और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की अपेक्षाएं भी भारतीय शेयर बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं।

फिलहाल सोमवार की शुरुआती गिरावट ने यह दिखाया है कि भारतीय शेयर बाजार भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ऊर्जा कीमतों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। हालांकि, पूरे कारोबारी दिन की दिशा शुरुआती गिरावट के बाद बाजार में होने वाली खरीदारी और वैश्विक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।

Bharat Baani Bureau

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