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30 सितंबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खूडियां ने केंद्र सरकार से आगामी रबी सीजन 2026-27 के लिए राज्य में खाद की पर्याप्त और समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन-रबी सीजन 2026 में हिस्सा लेते हुए खूडियां ने केंद्र से बुवाई शुरू होने से पहले पंजाब को 5.5 लाख मीट्रिक टन DAP और 15 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

कृषि मंत्री ने कहा कि गेहूं और आलू समेत प्रमुख रबी फसलों की समय पर बुवाई के लिए खाद की निर्बाध आपूर्ति जरूरी है। उन्होंने पिछले रबी सीजन में DAP और यूरिया की आपूर्ति में हुई देरी से किसानों को आई परेशानियों का भी उल्लेख किया और केंद्र से इस बार पहले से पर्याप्त व्यवस्था करने को कहा।

गेहूं और आलू की बुवाई के लिए खाद महत्वपूर्ण

पंजाब में रबी सीजन के दौरान गेहूं प्रमुख फसल है। इसके अलावा आलू और अन्य रबी फसलों की खेती भी बड़े पैमाने पर होती है। ऐसे में किसानों के लिए बुवाई के निर्धारित समय के आसपास खाद की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है।

खूडियां ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि पंजाब में DAP और यूरिया की आपूर्ति में किसी तरह का व्यवधान न आए, ताकि किसान समय पर खेत तैयार कर बुवाई पूरी कर सकें। उन्होंने कहा कि खाद की उपलब्धता में देरी का सीधा असर किसानों की कृषि गतिविधियों और फसल प्रबंधन पर पड़ सकता है।

पंजाब का खाद्यान्न उत्पादन में अहम योगदान

कृषि मंत्री ने सम्मेलन में पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में राज्य के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पंजाब में लगभग 41 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है और राज्य केंद्रीय खाद्यान्न भंडार में करीब 40 प्रतिशत गेहूं और 22 प्रतिशत धान का योगदान करता है।

उन्होंने कहा कि पंजाब के किसानों की समय पर बुवाई और बेहतर उत्पादन क्षमता का असर केवल राज्य की अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के खाद्य सुरक्षा तंत्र पर भी पड़ता है। ऐसे में रबी सीजन के दौरान जरूरी कृषि इनपुट की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

कृषि विविधीकरण पर भी जोर

राष्ट्रीय सम्मेलन में पंजाब की कृषि को पारंपरिक गेहूं-धान चक्र से आगे ले जाने के प्रयासों पर भी चर्चा हुई। खूडियां ने राज्य में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि पंजाब में कपास का रकबा वर्तमान में करीब 80,000 हेक्टेयर है। अनुकूल मौसम रहने पर इस सीजन में कपास की अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई गई। राज्य सरकार कपास के बीज पर 33 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है, जिससे किसानों को करीब 4 करोड़ रुपये का लाभ मिलने की बात कही गई।

इसके अलावा तिलहन और दलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए भी राज्य सरकार की ओर से करीब 6 करोड़ रुपये की सब्सिडी उपलब्ध कराई गई है।

पराली प्रबंधन के लिए ₹150 करोड़ की अगली किस्त मांगी

खूडियां ने पंजाब में फसल अवशेष प्रबंधन और पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता जारी करने की मांग भी रखी।

उन्होंने कहा कि राज्य में फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों के इस्तेमाल से पराली जलाने की समस्या का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा संबोधित किया जा चुका है। उन्होंने केंद्र से अगली ₹150 करोड़ की किस्त तत्काल जारी करने का आग्रह किया, ताकि किसानों को सब्सिडी पर कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनरी की उपलब्धता किसानों को खेत में पराली के प्रबंधन के विकल्प देने और अवशेष जलाने की आवश्यकता को कम करने के प्रयासों का हिस्सा है।

प्रमाणित गेहूं बीज के लिए ₹50 करोड़ जारी

सम्मेलन के दौरान पंजाब को प्रमाणित गेहूं बीज उपलब्ध कराने से संबंधित सहायता का भी उल्लेख किया गया। खूडियां ने केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा 2.5 लाख मीट्रिक टन प्रमाणित गेहूं बीज उपलब्ध कराने के लिए ₹50 करोड़ जारी किए जाने का स्वागत किया।

इस व्यवस्था के तहत किसानों को बीज पर ₹2,000 प्रति क्विंटल की सब्सिडी मिलने की जानकारी दी गई। इसके अलावा पंजाब को कृष्णोन्नति योजना के तहत लगभग ₹43 करोड़ की दूसरी किस्त मिलने की बात भी सामने आई।

रबी सीजन की तैयारियों पर फोकस

रबी सीजन की शुरुआत के साथ पंजाब में गेहूं की बुवाई की तैयारियां तेज होंगी। ऐसे में किसानों के लिए बीज, खाद, कृषि मशीनरी और अन्य इनपुट की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी।

खूडियां की मांग का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि DAP और यूरिया की आपूर्ति बुवाई के समय के अनुरूप सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि यदि खाद समय पर उपलब्ध रहती है तो किसान बिना अनावश्यक देरी के अपनी कृषि गतिविधियां पूरी कर सकते हैं।

केंद्र और राज्य सरकारों के बीच खाद की उपलब्धता को लेकर समन्वय रबी सीजन के दौरान महत्वपूर्ण रहेगा। खासकर पंजाब जैसे बड़े गेहूं उत्पादक राज्य में खाद की आपूर्ति का सीधा संबंध किसानों की बुवाई प्रक्रिया और आगे की फसल प्रबंधन व्यवस्था से है।

केंद्र से समय पर आपूर्ति की मांग

नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में पंजाब की ओर से रखी गई मांग का मुख्य उद्देश्य आगामी रबी सीजन के लिए पहले से खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। 5.5 लाख मीट्रिक टन DAP और 15 लाख मीट्रिक टन यूरिया की मांग के साथ खूडियां ने केंद्र से निर्बाध आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह किया है।

अब रबी बुवाई के नजदीक आने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पंजाब की आवश्यकता के अनुरूप DAP और यूरिया की आपूर्ति किस तरह सुनिश्चित की जाती है। किसानों के लिए समय पर खाद उपलब्ध होना आगामी फसल सीजन की तैयारियों की महत्वपूर्ण कड़ी रहेगा।

Bharat Baani Bureau

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