1 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): पंजाब में खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान की खरीद गुरुवार से शुरू हो गई है। मंडियों में धान की आवक बढ़ने के साथ ही राज्य के सामने एक बार फिर खरीद के साथ-साथ अनाज के भंडारण की चुनौती खड़ी हो गई है। इस सीजन में बड़ी मात्रा में धान की खरीद होने की संभावना है, जबकि राज्य की एजेंसियों के सामने पहले से मौजूद स्टॉक को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराने की जरूरत है।
धान खरीद पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लाखों किसान अपनी उपज सरकारी खरीद केंद्रों और मंडियों में लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में खरीद प्रक्रिया सुचारू रखने के लिए मंडियों में पर्याप्त व्यवस्था के साथ-साथ खरीदे गए अनाज को गोदामों तक पहुंचाना भी जरूरी होगा।
खरीद सीजन शुरू, मंडियों में बढ़ेगी आवक
धान की कटाई शुरू होने के साथ अगले कुछ दिनों में राज्य की मंडियों में आवक तेज होने की उम्मीद है। खरीद एजेंसियां किसानों से निर्धारित मानकों के अनुसार धान खरीदेंगी और इसके बाद उसे मिलिंग के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी।
सरकारी खरीद व्यवस्था में भारतीय खाद्य निगम (FCI) के साथ राज्य की विभिन्न एजेंसियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। किसानों के लिए समय पर खरीद और भुगतान सुनिश्चित करना इस पूरी प्रक्रिया का प्रमुख हिस्सा है।
मंडियों में भीड़ और लंबी कतारों से बचने के लिए खरीद, उठान और मिलिंग की प्रक्रिया के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक होगा।
सबसे बड़ी चुनौती भंडारण क्षमता
इस बार खरीद व्यवस्था के सामने प्रमुख चुनौतियों में से एक भंडारण स्थान की उपलब्धता है। पंजाब में पहले से सरकारी खरीद के जरिए जमा अनाज का बड़ा स्टॉक मौजूद है। ऐसे में नई फसल के लिए जगह बनाना खरीद एजेंसियों और प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।
यदि खरीदा गया धान मंडियों से समय पर नहीं उठाया जाता, तो मंडियों में स्टॉक जमा होने से किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी हो सकती है। इसलिए खरीद के साथ-साथ उठान और भंडारण पर भी लगातार नजर रखनी होगी।
चावल की मिलिंग और उठान पर भी निगाह
धान खरीद के बाद उसे राइस मिलों में भेजकर मिलिंग की जाती है। मिलिंग की गति और तैयार चावल को केंद्रीय पूल के लिए भेजने की प्रक्रिया भंडारण दबाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यदि मिलिंग प्रक्रिया में देरी होती है, तो खरीदे गए धान को लंबे समय तक रखने की जरूरत पड़ सकती है। इससे भंडारण क्षमता पर दबाव और बढ़ सकता है।
इसीलिए खरीद सीजन के दौरान मंडियों से धान का उठान, मिलिंग क्षमता और तैयार चावल के भंडारण की व्यवस्था को एक साथ आगे बढ़ाना जरूरी है।
किसानों के लिए समय पर भुगतान अहम
धान खरीद के दौरान किसानों की प्रमुख चिंता उनकी उपज की समय पर खरीद और भुगतान को लेकर रहती है। सरकारी खरीद व्यवस्था में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के आधार पर भुगतान किया जाता है, बशर्ते उपज निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करती हो।
इस सीजन में भी किसानों के लिए खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध रखना महत्वपूर्ण होगा। मंडियों में धान की गुणवत्ता जांच, तौल, भुगतान और उठान के बीच किसी भी स्तर पर देरी का असर पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।
केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की जरूरत
पंजाब में धान खरीद और उसके बाद चावल के केंद्रीय पूल में योगदान की प्रक्रिया में केंद्र और राज्य दोनों की एजेंसियों की भूमिका रहती है। इसलिए भंडारण क्षमता, खरीद लक्ष्य, मिलिंग और अनाज की आवाजाही को लेकर दोनों स्तरों पर समन्वय जरूरी है।
राज्य में धान की बड़ी मात्रा की खरीद होने के कारण अतिरिक्त भंडारण व्यवस्था तैयार करना या मौजूदा क्षमता का तेजी से उपयोग करना इस सीजन में महत्वपूर्ण रहेगा।
मंडियों में व्यवस्थाओं की निगरानी
खरीद सीजन शुरू होने के साथ जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को मंडियों में बुनियादी सुविधाओं की निगरानी करनी होगी। किसानों के लिए पेयजल, बैठने की व्यवस्था, तिरपाल, सफाई और अन्य सुविधाओं के अलावा धान की त्वरित तौल और उठान भी महत्वपूर्ण है।
मौसम में बदलाव की स्थिति में खरीदी गई उपज को सुरक्षित रखना भी चुनौती हो सकता है। इसलिए मंडियों में खुले में पड़े स्टॉक को कम से कम समय में सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना जरूरी होगा।
पराली प्रबंधन भी समानांतर चुनौती
धान खरीद के साथ पंजाब में फसल अवशेष प्रबंधन का मुद्दा भी सामने आएगा। धान की कटाई के बाद बड़ी मात्रा में पराली निकलती है और किसानों के लिए इसके प्रबंधन की व्यवस्था करना जरूरी होता है।
सरकार और प्रशासन के लिए खरीद व्यवस्था के साथ पराली प्रबंधन पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा, ताकि किसानों को वैकल्पिक समाधान उपलब्ध कराए जा सकें और खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को कम किया जा सके।
सुचारू खरीद के लिए उठान सबसे अहम
पंजाब में धान खरीद शुरू होने के साथ अब आने वाले सप्ताहों में मंडियों में आवक लगातार बढ़ने की संभावना है। ऐसे में केवल खरीद शुरू करना पर्याप्त नहीं होगा; खरीदे गए धान का समय पर उठान, मिलिंग और भंडारण भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा।
भंडारण क्षमता की कमी के बीच इस सीजन की खरीद व्यवस्था की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य और केंद्रीय एजेंसियां उपलब्ध जगह का कितनी तेजी से उपयोग करती हैं और मंडियों से स्टॉक की आवाजाही कितनी सुचारू रहती है।
