5 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): कैंसर का खतरा केवल आनुवंशिक कारणों या किसी एक बीमारी से जुड़ा नहीं है। हमारे रोजमर्रा के जीवन में मौजूद कुछ आदतें और पर्यावरणीय जोखिम भी लंबे समय में कैंसर की संभावना बढ़ा सकते हैं। एक ऑन्कोलॉजिस्ट ने भारत के संदर्भ में खास तौर पर तंबाकू, शराब और वायु प्रदूषण को ऐसे जोखिमों के रूप में रेखांकित किया है, जिन्हें अक्सर सामान्य जीवन का हिस्सा मान लिया जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, तंबाकू, शराब, अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता और वायु प्रदूषण कैंसर के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल हैं। WHO और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के 2026 के वैश्विक विश्लेषण के मुताबिक, 2022 में दुनिया भर में कैंसर के करीब 37 प्रतिशत नए मामले ऐसे कारणों से जुड़े थे जिन्हें रोका या कम किया जा सकता था।
‘सिर्फ सिगरेट’ तक सीमित नहीं है तंबाकू का खतरा
कैंसर से बचाव की चर्चा में अक्सर सिगरेट और बीड़ी का जिक्र होता है, लेकिन तंबाकू का जोखिम इससे कहीं व्यापक है। गुटखा, खैनी और अन्य धुआं-रहित तंबाकू उत्पाद भी शरीर को कैंसरकारी रसायनों के संपर्क में ला सकते हैं। ऑन्कोलॉजिस्ट ने भारत में इन उत्पादों के इस्तेमाल को विशेष चिंता का विषय बताया है।
WHO के मुताबिक, तंबाकू दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा रोके जा सकने वाला कारण है। तंबाकू के धुएं में हजारों रसायन होते हैं, जिनमें कई हानिकारक और दर्जनों कैंसरकारी माने जाते हैं।
तंबाकू का संबंध केवल फेफड़ों के कैंसर से नहीं है। इसके इस्तेमाल से मुंह, गले, स्वरयंत्र, भोजन नली, पेट, मूत्राशय, गुर्दे और अग्न्याशय सहित कई अंगों के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
शराब का असर केवल लिवर पर नहीं
शराब को अक्सर मुख्य रूप से लिवर की बीमारी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसका कैंसर से संबंध भी अच्छी तरह स्थापित है। IARC के अनुसार, शराब के सेवन का कारणात्मक संबंध मुंह, गले, स्वरयंत्र, भोजन नली, लिवर, बड़ी आंत और मलाशय तथा महिलाओं में स्तन कैंसर से पाया गया है।
WHO के अनुसार, कैंसर के संदर्भ में शराब के सेवन का कोई पूरी तरह सुरक्षित स्तर स्थापित नहीं है। जोखिम सेवन की मात्रा के साथ बढ़ता है, लेकिन कम मात्रा में सेवन भी कुछ कैंसरों के जोखिम को बढ़ा सकता है।
शराब और तंबाकू का एक साथ इस्तेमाल विशेष रूप से चिंता का विषय है। दोनों के संयुक्त इस्तेमाल से मुंह, गले, स्वरयंत्र और भोजन नली के कुछ कैंसरों का जोखिम अकेले किसी एक पदार्थ के इस्तेमाल की तुलना में काफी अधिक हो सकता है।
हवा में मौजूद जोखिम भी नजरअंदाज नहीं किए जा सकते
कैंसर का एक ऐसा जोखिम जिसे व्यक्ति हमेशा अपने नियंत्रण में नहीं रख सकता, वह है वायु प्रदूषण। प्रदूषित हवा में लंबे समय तक रहने से फेफड़ों पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है और वायु प्रदूषण को फेफड़ों के कैंसर के जोखिम कारक के रूप में मान्यता प्राप्त है।
भारत जैसे देशों में यह मुद्दा खास महत्व रखता है, जहां कई शहरों में प्रदूषण का स्तर लंबे समय तक ऊंचा रहता है। इसके अलावा घर के भीतर धुएं और कुछ ईंधनों से होने वाला प्रदूषण भी स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
इसलिए कैंसर की रोकथाम केवल व्यक्तिगत आदतों को बदलने तक सीमित नहीं है। स्वच्छ हवा, सुरक्षित कार्यस्थल और प्रदूषण नियंत्रण जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियां भी महत्वपूर्ण हैं।
खान-पान और वजन भी महत्वपूर्ण
तंबाकू, शराब और प्रदूषण के अलावा शरीर का वजन, शारीरिक गतिविधि और खान-पान भी कैंसर के जोखिम को प्रभावित करते हैं। WHO के अनुसार, अधिक वजन और मोटापा कई प्रकार के कैंसर से जुड़े हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित आहार जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।
2026 के WHO-IARC विश्लेषण में भी उच्च बॉडी मास इंडेक्स, शारीरिक निष्क्रियता और अन्य परिवर्तनीय कारणों को कैंसर की रोकथाम के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
कुछ कैंसर संक्रमण से भी जुड़े
कैंसर की रोकथाम में संक्रमणों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। HPV, हेपेटाइटिस B और C तथा Helicobacter pylori जैसे संक्रमण कुछ कैंसरों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। WHO के अनुसार, 2022 में वैश्विक स्तर पर लगभग 10 प्रतिशत कैंसर मामलों को कैंसरकारी संक्रमणों से जोड़ा गया था।
HPV टीकाकरण और हेपेटाइटिस-B टीकाकरण, जहां चिकित्सकीय दिशानिर्देशों के अनुसार उपयुक्त हों, कैंसर की रोकथाम की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। समय पर जांच और संक्रमण का उपचार भी महत्वपूर्ण है।
रोकथाम में रोजमर्रा के फैसलों की भूमिका
कैंसर के सभी मामलों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन कई जोखिमों को कम किया जा सकता है। WHO और IARC के 2026 विश्लेषण के अनुसार, 2022 में लगभग 7.1 मिलियन नए कैंसर मामले ऐसे कारणों से जुड़े थे जिन्हें रोकने की क्षमता मौजूद थी।
व्यक्तिगत स्तर पर तंबाकू से पूरी तरह बचना, शराब का सेवन कम करना या न करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित आहार लेना और प्रदूषण के संपर्क को जहां संभव हो कम करना महत्वपूर्ण कदम हैं।
इसके साथ ही आयु और जोखिम के अनुसार चिकित्सकीय सलाह से उचित कैंसर स्क्रीनिंग कराना भी जरूरी है।
कैंसर का मतलब हमेशा लाइलाज बीमारी नहीं
कैंसर का निदान जीवन बदल देने वाला हो सकता है, लेकिन इसे हमेशा लाइलाज बीमारी समझना सही नहीं है। WHO के अनुसार, कई कैंसरों में जल्दी पहचान और उचित उपचार से इलाज की संभावना काफी अधिक होती है।
इसलिए लगातार बने रहने वाले असामान्य लक्षणों, शरीर में नई गांठ, बिना कारण वजन कम होने, लंबे समय तक खांसी, असामान्य रक्तस्राव या अन्य चिंताजनक बदलावों को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर, कैंसर का जोखिम केवल अस्पताल या क्लिनिक से जुड़ा विषय नहीं है। हम क्या सांस में लेते हैं, क्या चबाते हैं, क्या पीते हैं और हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली कैसी है—इन सभी का दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। हालांकि व्यक्तिगत कैंसर जोखिम उम्र, आनुवंशिकता, जीवनशैली और अन्य कारकों पर निर्भर करता है; इसलिए किसी व्यक्ति के जोखिम का आकलन डॉक्टर ही बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
स्वास्थ्य संबंधी अस्वीकरण: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी लक्षण, व्यक्तिगत कैंसर जोखिम या स्क्रीनिंग की जरूरत के बारे में निर्णय लेने के लिए योग्य डॉक्टर या ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह लें।
