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5 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त ने भारत में शांति को लेकर अपने हालिया बयान पर उठे विवाद के बाद सफाई दी है। अभिनेता ने कहा कि उनके बयान को जिस तरह से लिया गया, वह उनके मूल संदर्भ से अलग था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी एक स्क्रिप्टेड, हल्के-फुल्के और हास्यपूर्ण संवाद का हिस्सा थी और उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।

संजय दत्त की यह टिप्पणी अभिनेता के शेखर सुमन के शो ‘Shekhar Tonite’ में नजर आने के बाद चर्चा में आई थी। गांधी जयंती के विशेष एपिसोड में उन्होंने देश की मौजूदा स्थिति पर बातचीत की और ‘मुन्ना भाई’ अंदाज में कई राजनीतिक तथा सामाजिक मुद्दों पर व्यंग्य किया।

‘भारत में अब वह शांति महसूस नहीं होती’

शो के दौरान संजय दत्त ने भारत के लोगों की तारीफ करते हुए कहा था कि भारतीय बड़े दिल वाले और मेहमाननवाज होते हैं। इसी बातचीत में उन्होंने कहा कि देश में शांति होनी चाहिए, लेकिन उन्हें अब भारत में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

बयान के वीडियो क्लिप सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अभिनेता की आलोचना भी हुई। कुछ प्रतिक्रियाओं में उनके बयान को राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देखा गया, जबकि अन्य लोगों ने पूरे शो के संदर्भ को देखने की जरूरत बताई।

संजय दत्त ने बताया- पूरा संवाद स्क्रिप्टेड था

विवाद बढ़ने के बाद संजय दत्त ने सोशल मीडिया पर एक स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी “scripted conversation” के संदर्भ में थी और इसे हल्के-फुल्के हास्य तथा व्यंग्य के रूप में पेश किया गया था।

अभिनेता ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति, समुदाय या संस्था का अपमान करना या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बातों को उस संदर्भ से बाहर समझा गया, जिसमें वे कही गई थीं।

‘मुन्ना भाई’ और गांधीगिरी का संदर्भ

संजय दत्त ने अपनी सफाई में अपने चर्चित किरदार ‘मुन्ना भाई’ और फिल्मों में दिखाई गई ‘गांधीगिरी’ का भी संदर्भ दिया। उनके मुताबिक, शो में उनके संवादों की भावना उसी तरह के हास्य और व्यंग्य से जुड़ी थी, जिसका उद्देश्य प्यार, अपनापन, एकता और सद्भावना का संदेश देना था।

शो में संजय दत्त ने इसी ‘मुन्ना भाई’ अंदाज में खुद को कुछ समय के लिए प्रधानमंत्री की भूमिका में कल्पना करते हुए देश के बारे में अपनी बातें रखीं। उन्होंने भाईचारे को बढ़ावा देने और महात्मा गांधी के विचारों को आगे बढ़ाने जैसे विषयों पर भी बात की।

पीएम बनने पर क्या करते ‘मुन्ना भाई’?

कार्यक्रम में संजय दत्त से पूछा गया था कि यदि उन्हें कुछ समय के लिए भारत का प्रधानमंत्री बनने का मौका मिले तो वह क्या बदलाव करेंगे। इसके जवाब में उन्होंने अपने फिल्मी किरदार की शैली में जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि वह देश से बाहर ज्यादा समय नहीं बिताएंगे और लोगों के बीच रहेंगे। उन्होंने भाईचारे को बढ़ावा देने तथा सार्वजनिक जीवन में महात्मा गांधी के विचारों को प्रमुखता देने की बात भी कही।

इसी क्रम में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी अपने ‘मुन्ना भाई’ अंदाज में टिप्पणी की और अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ‘गांधीगिरी’ अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम का बड़ा हिस्सा व्यंग्य और हास्य पर आधारित था।

सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी बहस?

संजय दत्त के ‘शांति’ वाले बयान का छोटा वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ। कई लोगों ने क्लिप के आधार पर अभिनेता के बयान की आलोचना की, जबकि रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि पूरा कार्यक्रम एक व्यंग्यात्मक और मनोरंजक प्रस्तुति के रूप में तैयार किया गया था।

यही वजह है कि संजय दत्त ने अपनी सफाई में पूरे संदर्भ पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों को उस व्यापक बातचीत से अलग करके देखा गया, जिसमें हास्य, फिल्मी किरदार और ‘गांधीगिरी’ की अवधारणा शामिल थी।

विवाद के बीच अभिनेता की सफाई

संजय दत्त की सफाई का मुख्य संदेश यही है कि ‘भारत में शांति महसूस नहीं होती’ वाली टिप्पणी को उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक या सामाजिक राय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे शो के लिए तैयार किए गए एक स्क्रिप्टेड संवाद का हिस्सा बताया है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना उनका उद्देश्य नहीं था।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल भी सामने रखा है कि मनोरंजन कार्यक्रमों में बोले गए व्यंग्यात्मक या किरदार-आधारित संवादों को सोशल मीडिया पर छोटे वीडियो क्लिप के रूप में साझा किए जाने के बाद उनका संदर्भ किस तरह बदल सकता है।

फिलहाल संजय दत्त ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है और कहा है कि उनके शब्दों का उद्देश्य प्रेम, एकता, सद्भावना और शांति का संदेश देना था, न कि किसी के खिलाफ टिप्पणी करना।

Bharat Baani Bureau

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