8 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को शुरुआती कारोबार में दबाव देखने को मिला। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ब्याज दर बढ़ाने और आगे भी मौद्रिक सख्ती के संकेत देने, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने निवेशकों की धारणा पर असर डाला। शुरुआती कारोबार में Sensex करीब 265 अंक और Nifty करीब 88 अंक नीचे आ गया।
बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब RBI ने एक दिन पहले यानी 7 अक्टूबर को लगभग चार साल में पहली बार रेपो रेट बढ़ाया। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया और अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। इससे बाजार में यह आशंका बढ़ी है कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की गुंजाइश बनी हुई है।
शुरुआती कारोबार में Sensex-Nifty फिसले
गुरुवार को शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला BSE Sensex 264.97 अंक गिरकर 72,408.15 पर आ गया। वहीं NSE Nifty 87.50 अंक की गिरावट के साथ 22,507.65 पर कारोबार कर रहा था।
बाजार की शुरुआत में कई प्रमुख शेयरों पर दबाव रहा। Sensex की प्रमुख कंपनियों में ITC, Adani Ports, Bharat Electronics, Bajaj Finance, Bajaj Finserv और InterGlobe Aviation कमजोर शेयरों में शामिल रहे।
दूसरी ओर, TCS, HCL Technologies, Tech Mahindra और Infosys में खरीदारी देखने को मिली, जिससे IT शेयरों ने व्यापक बाजार की गिरावट को कुछ हद तक संतुलित किया।
RBI की ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ से बढ़ी चिंता
RBI ने बुधवार को रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। यह करीब चार वर्षों में पहली बढ़ोतरी है। इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बाजार के लिए केंद्रीय बैंक का नीति रुख रहा।
RBI ने अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। इसका अर्थ है कि केंद्रीय बैंक अब मुद्रास्फीति और अन्य आर्थिक जोखिमों को देखते हुए वित्तीय परिस्थितियों को और सख्त करने की दिशा में कदम उठा सकता है।
हालांकि, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि भविष्य में किसी भी अतिरिक्त बढ़ोतरी का समय और आकार वास्तविक मुद्रास्फीति तथा आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
महंगा कच्चा तेल भी बाजार के लिए चिंता
शेयर बाजार पर दूसरा बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का है। गुरुवार को Brent crude करीब 2 प्रतिशत बढ़कर 102.2 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। Reuters के अनुसार, बाद के कारोबार में Brent करीब 102.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए तेल की कीमतों में तेजी से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। बाजार में यह चिंता भी है कि लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें RBI के लिए महंगाई नियंत्रण को और चुनौतीपूर्ण बना सकती हैं।
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
बाजार की धारणा पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का भी असर पड़ा है। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को भारतीय शेयरों से 6,121.37 करोड़ रुपये की निकासी की।
ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कमजोर रुपये, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने घरेलू बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
बुधवार को भी बाजार में आई थी गिरावट
इससे पहले बुधवार को भी भारतीय शेयर बाजार कमजोर बंद हुआ था। Sensex 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत गिरकर 72,638.70 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत गिरकर 22,603.05 पर आ गया था।
इस तरह गुरुवार की शुरुआती गिरावट ने बाजार पर लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में दबाव को दिखाया।
ब्याज दरों का असर किन क्षेत्रों पर?
ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर खासतौर पर उन कंपनियों और क्षेत्रों पर पड़ सकता है जो कर्ज और ब्याज लागत के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं। महंगे कर्ज से कंपनियों की वित्तीय लागत बढ़ सकती है और कुछ क्षेत्रों में मांग पर भी असर पड़ सकता है।
बाजार में बुधवार को ऑटो शेयरों में भी कमजोरी देखी गई थी। Tata Motors, Maruti Suzuki, Mahindra & Mahindra और Ashok Leyland जैसे शेयर RBI के सख्त रुख के बाद दबाव में रहे।
दूसरी ओर, मजबूत बैलेंस शीट वाले बैंक और कुछ अन्य वित्तीय संस्थानों को बदलते ब्याज दर माहौल में अपेक्षाकृत अलग प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इसका असर प्रत्येक कंपनी की फंडिंग संरचना और कारोबारी मॉडल पर निर्भर करेगा।
रुपये और वैश्विक बाजार भी दबाव में
भारतीय बाजार की कमजोरी केवल घरेलू कारकों तक सीमित नहीं है। एशियाई बाजारों में भी गुरुवार को कमजोरी रही। जापान का Nikkei, दक्षिण कोरिया का Kospi और हांगकांग का Hang Seng जैसे प्रमुख सूचकांक दबाव में कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार भी बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।
इसी बीच भारतीय रुपया भी दबाव में है। Reuters के अनुसार, बुधवार को रुपया पांच महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया था। RBI की दर बढ़ोतरी के बावजूद मुद्रा बाजार में दबाव बना रहा।
आगे बाजार की नजर किन संकेतों पर?
अब निवेशकों की नजर RBI के अगले कदमों के साथ-साथ महंगाई के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल, विदेशी निवेश और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी।
खास तौर पर RBI के ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ रुख ने बाजार के लिए ब्याज दरों में तत्काल राहत की उम्मीदों को कमजोर किया है। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता और 100 डॉलर से ऊपर कच्चे तेल की कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं।
फिलहाल शुरुआती कारोबार का संकेत यही है कि निवेशक आक्रामक खरीदारी के बजाय सावधानी बरत रहे हैं और RBI की अगली नीति दिशा तथा वैश्विक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
