8 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): एशियन गेम्स में 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती का स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारतीय पहलवान सुजीत कलकल के सम्मान में समारोह और कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो गया है। लेकिन 23 वर्षीय सुजीत का ध्यान अभी जश्न पर नहीं, बल्कि दोबारा रेसलिंग मैट पर लौटने और अपनी कमियों को सुधारने पर है।
सुजीत ने कहा है कि एशियन गेम्स के बाद होने वाले कार्यक्रमों और समारोहों से ज्यादा जरूरी उनके लिए आगामी विश्व कुश्ती चैंपियनशिप की तैयारी है। उन्होंने कहा कि वह जल्द से जल्द मैट पर लौटना चाहते हैं, क्योंकि कजाकिस्तान में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में मुकाबला एशियन गेम्स से भी ज्यादा कठिन होगा।
एशियन गेम्स में 2-9 से पिछड़कर जीता स्वर्ण
सुजीत कलकल ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था। फाइनल में उनका मुकाबला ताजिकिस्तान के अब्दुलमजीद कुडिएव से हुआ।
फाइनल की शुरुआत सुजीत के लिए मुश्किल रही और वह एक समय 2-9 से पीछे थे। लेकिन मुकाबले के अंतिम दौर में उन्होंने शानदार वापसी की और लगातार निर्णायक अंक हासिल करते हुए 10-9 से मुकाबला अपने नाम कर लिया।
इससे पहले सेमीफाइनल में उन्होंने जापान के मौजूदा ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियोका को हराया था। इस प्रदर्शन ने सुजीत को एशियन गेम्स में भारतीय कुश्ती के प्रमुख चेहरों में शामिल कर दिया।
जश्न के बीच सुजीत की नजर मैट पर
एशियन गेम्स की सफलता के बाद सुजीत को सम्मान समारोहों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना पड़ रहा है। लेकिन उनका कहना है कि ये कार्यक्रम उनके प्रशिक्षण के रास्ते में नहीं आने चाहिए।
सुजीत ने SAI Media के साथ बातचीत में कहा कि एशियन गेम्स के बाद समारोह और अन्य कार्यक्रम ध्यान भटका सकते हैं, इसलिए वह जल्द से जल्द मैट पर वापस जाना चाहते हैं।
उनका लक्ष्य अब विश्व चैंपियनशिप है, जो 24 अक्टूबर से कजाकिस्तान में शुरू होगी। सुजीत के लिए यह प्रतियोगिता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह इस समय 65 किलोग्राम वर्ग में शानदार फॉर्म में हैं।
लगातार 19 मुकाबलों में जीत
सुजीत की मौजूदा फॉर्म का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक मुकाबले में हार के बाद उन्होंने लगातार 19 मुकाबले जीते हैं।
वह U23 विश्व चैंपियन, एशियाई चैंपियन और अब एशियन गेम्स चैंपियन भी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी वह लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
हालांकि सुजीत खुद जानते हैं कि विश्व चैंपियनशिप में चुनौती अलग होगी। ईरान के रहमान अमूजादखलीली, जिनसे वह पिछले साल हार चुके हैं, और अमेरिका के उभरते पहलवान बोवेन बैसेट जैसे प्रतिद्वंद्वी उनके सामने बड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं।
सबसे ज्यादा ध्यान ग्राउंड गेम पर
एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बावजूद सुजीत और उनके कोच जानते हैं कि अभी कुछ तकनीकी पहलुओं में सुधार की जरूरत है।
कोच कुलदीप सिंह के अनुसार, एशियन गेम्स के फाइनल में सुजीत ने प्रतिद्वंद्वी को कुछ ऐसे ग्राउंड पोजिशन दिए, जिनसे उन्हें शुरुआती अंक गंवाने पड़े। इसलिए विश्व चैंपियनशिप से पहले टीम का ध्यान ग्राउंड रेसलिंग को मजबूत करने पर है।
सुजीत ने भी माना कि उन्हें मैट पर बेहतर पोजिशन लेने, अटैक करने और यदि अटैक की स्थिति खो जाए तो प्रभावी तरीके से डिफेंड करने पर काम करना है।
आक्रामक कुश्ती पर भी जोर
सुजीत के राष्ट्रीय कोच बेंटिनिडिस शाको ने भी उनकी कुश्ती में ज्यादा आक्रामकता लाने पर जोर दिया है। सुजीत के मुताबिक, रूस में एक प्रतियोगिता में सभी मुकाबले जीतने के बावजूद कोच शाको उनसे पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने सुजीत को ज्यादा अटैक करने की सलाह दी।
एशियन गेम्स में सुजीत ने इस सलाह पर काम किया और कई मुकाबलों में लगातार आक्रामक तकनीकों का इस्तेमाल किया। उनका मानना है कि विश्व चैंपियनशिप में भी उन्हें इसी रणनीति को जारी रखना होगा।
‘धोबी पछाड़’ ने भी दिलाई पहचान
एशियन गेम्स के दौरान सुजीत के प्रदर्शन की चर्चा जिस तकनीक के लिए हुई, उनमें पारंपरिक भारतीय कुश्ती की ‘धोबी पछाड़’ भी शामिल रही।
सुजीत ने बताया कि वह इस तकनीक का अभ्यास पहले भी करते थे, लेकिन मुकाबले में इसे प्रभावी तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाते थे। कोच शाको ने उनकी तकनीक में सुधार करवाया और लगातार अभ्यास कराया। इसके बाद सुजीत एशियन गेम्स में इसका सफल इस्तेमाल कर सके।
अब लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण
एशियन गेम्स की सफलता के बाद सुजीत के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती विश्व चैंपियनशिप है। वह जानते हैं कि वहां मुकाबला बेहद कठिन होगा और सिर्फ एशियन गेम्स की सफलता के भरोसे आगे नहीं बढ़ा जा सकता।
विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतना भारतीय कुश्ती के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। सुजीत के पास इस प्रतियोगिता में विश्व चैंपियन बनने वाले दूसरे भारतीय पहलवान बनने का मौका है।
सुजीत का संदेश फिलहाल साफ है—एशियन गेम्स का जश्न अपनी जगह, लेकिन असली काम मैट पर बाकी है। सम्मान समारोहों के बीच उनका ध्यान उन छोटी-छोटी तकनीकी कमियों पर है जिन्हें सुधारकर वह कजाकिस्तान में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पहलवानों के सामने उतरना चाहते हैं।
