9 अक्टूबर 2026 (भारत बाणी ब्यूरो): पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना के तहत पात्र महिला लाभार्थियों के बैंक खातों में अब तक करीब 3,722 करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर किए जा चुके हैं। पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने 8 अक्टूबर को यह जानकारी देते हुए कहा कि सरकार प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से महिलाओं तक आर्थिक सहायता पहुंचा रही है। उनके अनुसार, इस योजना का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी को मजबूत करना है। <Cite refs={[“turn403254search0″,”turn403254search4”]}/>
पहले चरण में 75 लाख से अधिक महिलाओं को मिली सहायता
डॉ. बलजीत कौर के मुताबिक, योजना के पहले चरण में जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए 2,602.46 करोड़ रुपये 75.16 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में जमा किए गए।
इसके बाद दूसरे चरण की पहली किस्त के रूप में 32 लाख से अधिक महिलाओं को 1,118.93 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। मंत्री ने बताया कि इन दोनों भुगतानों को मिलाकर कुल वितरण करीब 3,722 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। <Cite refs={[“turn403254search1″,”turn403254search3”]}/>
सरकार का कहना है कि DBT व्यवस्था के जरिए सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने में मदद मिलती है।
सामान्य वर्ग की महिलाओं को ₹1,000, SC महिलाओं को ₹1,500 प्रतिमाह
योजना के तहत 18 वर्ष और उससे अधिक आयु की पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। घोषित दरों के अनुसार:
- सामान्य वर्ग की पात्र महिलाएं: ₹1,000 प्रतिमाह।
- अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की पात्र महिलाएं: ₹1,500 प्रतिमाह।
राज्य सरकार के अनुसार, इस सहायता का उद्देश्य महिलाओं को घरेलू खर्चों, बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यकताओं के लिए आर्थिक सहारा देना है। हालांकि, लाभ प्राप्त करने के लिए योजना की पात्रता और लागू नियमों को पूरा करना जरूरी है। <Cite refs={[“turn403254search0″,”turn403254search11”]}/>
79 लाख से अधिक महिलाओं ने कराया पंजीकरण
डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि योजना के तहत 79 लाख से अधिक महिलाएं पंजीकरण करा चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य एक करोड़ से अधिक महिलाओं तक योजना का लाभ पहुंचाना है।
मंत्री के अनुसार, योजना का दायरा पंजाब की बड़ी संख्या में महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से तय किया गया है। राज्य सरकार ने अनुमान जताया है कि इसके दायरे में पंजाब की करीब 97 प्रतिशत महिलाएं आ सकती हैं। यह आंकड़ा सरकार का अनुमान है; वास्तविक लाभार्थियों की संख्या पात्रता और पंजीकरण के आधार पर निर्धारित होगी। <Cite refs={[“turn403254search2″,”turn403254search4”]}/>
सालाना करीब ₹12,000 करोड़ खर्च करने का अनुमान
राज्य सरकार ने योजना के लिए सालाना करीब 12,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान जताया है। इस राशि के माध्यम से पात्र महिलाओं को नियमित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की योजना है।
डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि योजना केवल आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से अधिक स्वतंत्र बनाना और समाज में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करना भी है। <Cite refs={[“turn403254search0″,”turn403254search5”]}/>
हालांकि, योजना पर वास्तविक खर्च और इसके दीर्घकालीन प्रभाव का आकलन करने के लिए लाभार्थियों की संख्या, नियमित भुगतान और सरकारी बजट पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे पहलुओं पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
DBT के जरिए सीधे खातों में पहुंच रही राशि
प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी DBT के तहत सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है। इस व्यवस्था में भुगतान का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज होता है, जिससे लाभार्थियों तक राशि पहुंचने की प्रक्रिया को ट्रैक करना आसान होता है।
पंजाब सरकार का कहना है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रही है कि कोई भी पात्र महिला योजना के लाभ से वंचित न रहे। इसके लिए पंजीकरण और भुगतान प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। <Cite refs={[“turn403254search1″,”turn403254search4”]}/>
महिला आर्थिक सुरक्षा पर सरकार का जोर
मावां-धीयां सत्कार योजना पंजाब में महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की राज्य सरकार की पहल है। इसके तहत सामान्य और अनुसूचित जाति वर्ग की पात्र महिलाओं के लिए अलग-अलग मासिक सहायता निर्धारित की गई है।
डॉ. बलजीत कौर के ताजा बयान के अनुसार, योजना के अंतर्गत अब तक करीब 3,722 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं और पंजीकरण का आंकड़ा 79 लाख से अधिक हो गया है। अब योजना के आगे के चरणों में भुगतान की निरंतरता, पात्र महिलाओं तक पहुंच और सरकारी खर्च की निगरानी महत्वपूर्ण रहेगी।
