12 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो : भारत में बिजली की मांग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने का अनुमान है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2035-36 (FY36) तक देश में बिजली की अधिकतम मांग 459 गीगावाट (GW) तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही, गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन की हिस्सेदारी बढ़कर 48 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। यह रुझान देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते बदलाव को दर्शाता है।
बिजली की मांग में संभावित वृद्धि के पीछे औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार, शहरीकरण, इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता इस्तेमाल, एयर कंडीशनर और अन्य विद्युत उपकरणों की मांग तथा डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार जैसे कारक महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इस बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए बिजली उत्पादन क्षमता के साथ-साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क, वितरण व्यवस्था और ऊर्जा भंडारण सुविधाओं को मजबूत करना भी जरूरी होगा।
459 GW तक पहुंच सकती है बिजली की अधिकतम मांग
बिजली की अधिकतम मांग यानी पीक पावर डिमांड उस समय की सबसे अधिक बिजली जरूरत को दर्शाती है, जब किसी अवधि में बिजली की खपत अपने उच्चतम स्तर पर होती है। यह आंकड़ा बिजली व्यवस्था की क्षमता और आपूर्ति की तैयारी का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यदि FY36 तक भारत की पीक पावर डिमांड 459 GW तक पहुंचती है, तो बिजली कंपनियों और नीति निर्माताओं को मांग के अनुरूप पर्याप्त उत्पादन क्षमता उपलब्ध कराने की जरूरत होगी। इसके लिए पारंपरिक बिजली संयंत्रों के साथ सौर, पवन, जलविद्युत और अन्य ऊर्जा स्रोतों के बेहतर समन्वय पर ध्यान देना होगा।
इसके अलावा, गर्मियों के दौरान एयर कंडीशनिंग की बढ़ती मांग, औद्योगिक उत्पादन में विस्तार और विभिन्न राज्यों में बिजली की खपत के बदलते पैटर्न को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक योजना बनाना महत्वपूर्ण होगा।
गैर-जीवाश्म ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद
रिपोर्ट के अनुसार, FY36 तक गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन की हिस्सेदारी 48 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। गैर-जीवाश्म ऊर्जा में मुख्य रूप से सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं। इन स्रोतों से बिजली उत्पादन बढ़ने पर कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सौर और पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है। बड़े सौर पार्क, रूफटॉप सोलर परियोजनाएं और पवन ऊर्जा संयंत्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
हालांकि, गैर-जीवाश्म ऊर्जा की स्थापित क्षमता और वास्तविक बिजली उत्पादन में अंतर होता है। सौर ऊर्जा का उत्पादन धूप और मौसम पर निर्भर करता है, जबकि पवन ऊर्जा का उत्पादन हवा की उपलब्धता के अनुसार बदलता रहता है। इसलिए इन स्रोतों की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ बिजली भंडारण और ग्रिड प्रबंधन की जरूरत भी बढ़ेगी।
ऊर्जा भंडारण और ट्रांसमिशन नेटवर्क की अहम भूमिका
नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं और मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क महत्वपूर्ण होंगे। इन व्यवस्थाओं से अधिक उत्पादन के समय बिजली को संग्रहित करके जरूरत के समय इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में सौर और पवन ऊर्जा की उपलब्धता अलग-अलग होती है। ऐसे में एक क्षेत्र में उत्पादित बिजली को दूसरे क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार जरूरी होगा।
बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति और तकनीकी क्षमता भी इस बदलाव को प्रभावित करेगी। वितरण नेटवर्क में सुधार से बिजली की हानि कम करने और उपभोक्ताओं तक अधिक विश्वसनीय आपूर्ति पहुंचाने में सहायता मिल सकती है।
उद्योग और निवेश के लिए खुल सकते हैं अवसर
बिजली की मांग बढ़ने से ऊर्जा क्षेत्र में नए निवेश की संभावनाएं बन सकती हैं। इनमें नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं, ट्रांसमिशन लाइनें, ऊर्जा भंडारण, स्मार्ट मीटरिंग और बिजली वितरण के आधुनिकीकरण से जुड़े क्षेत्र शामिल हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों, डेटा सेंटर और ऊर्जा-आधारित उद्योगों के विस्तार से भी बिजली की जरूरत बढ़ सकती है। इसके परिणामस्वरूप बिजली उत्पादन और ऊर्जा प्रबंधन से जुड़ी कंपनियों के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा हो सकते हैं।
हालांकि, इन अवसरों का वास्तविक आकार सरकारी नीतियों, परियोजनाओं की लागत, वित्तपोषण, तकनीकी विकास और बिजली की मांग की वास्तविक वृद्धि पर निर्भर करेगा।
भारत के ऊर्जा क्षेत्र के सामने चुनौतियां
बिजली की मांग में तेज वृद्धि और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव के साथ कई चुनौतियां भी सामने आएंगी। इनमें समय पर नई उत्पादन क्षमता स्थापित करना, बिजली की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना, ऊर्जा भंडारण की लागत कम करना और सभी क्षेत्रों तक विश्वसनीय बिजली पहुंचाना शामिल है।
इसके अलावा, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता, पर्यावरणीय मंजूरियां और ट्रांसमिशन ढांचे का समय पर निर्माण भी महत्वपूर्ण होगा।
कुल मिलाकर, FY36 तक 459 GW की संभावित पीक पावर डिमांड और गैर-जीवाश्म स्रोतों से 48 प्रतिशत बिजली उत्पादन का अनुमान भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव की ओर संकेत करता है। आने वाले वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ बिजली उत्पादन और मजबूत बिजली नेटवर्क के बीच संतुलन बनाना देश की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
