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21 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी अस्मिता चलिहा ने फ्रेंच ओपन में शानदार प्रदर्शन करते हुए चीन की हान कियान शी को सीधे गेमों में हराकर अपनी प्रतिभा का दमदार प्रदर्शन किया। अस्मिता ने 21-18, 24-22 से मुकाबला जीतकर दिखाया कि आक्रामक शॉट्स, कोर्ट पर बेहतर मूवमेंट और सटीक कोणों का इस्तेमाल करके ऊंची रैंकिंग वाली खिलाड़ियों को भी चुनौती दी जा सकती है। इस जीत ने उनके आत्मविश्वास को मजबूती दी है और 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने की उनकी कोशिशों को भी अहम गति दी है।

आक्रामक अंदाज बना जीत की सबसे बड़ी ताकत

विश्व रैंकिंग में 36वें स्थान पर मौजूद अस्मिता ने मुकाबले की शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनाई। बाएं हाथ से खेलने वाली भारतीय शटलर ने शक्तिशाली स्मैश और कोर्ट के अलग-अलग कोनों में शटल पहुंचाने वाले शॉट्स से चीनी खिलाड़ी पर दबाव बनाए रखा।

बैडमिंटन में तेज स्मैश के साथ शॉट्स का कोण भी अहम भूमिका निभाता है। यदि खिलाड़ी प्रतिद्वंद्वी को बार-बार कोर्ट के अलग-अलग हिस्सों में जाने के लिए मजबूर कर दे, तो उसके लिए संतुलन बनाए रखना और प्रभावी वापसी करना मुश्किल हो जाता है। अस्मिता ने इसी रणनीति का इस्तेमाल किया।

उनके कोच पार्क ताए-सांग के अनुसार, अस्मिता की सबसे बड़ी ताकत उनका आक्रामक खेल है। बाएं हाथ से खेलने के कारण वह ऐसे कोण बना सकती हैं, जिनसे प्रतिद्वंद्वी को शटल तक पहुंचने में परेशानी होती है। कोच के मुताबिक, उनकी ताकत को और निखारने के लिए लगातार मेहनत की गई है।

दूसरे गेम में पिछड़ने के बावजूद नहीं खोया धैर्य

मुकाबले का दूसरा गेम अस्मिता के लिए बड़ी परीक्षा साबित हुआ। वह एक समय 7-14 से पीछे चल रही थीं। इस स्थिति में प्रतिद्वंद्वी को बढ़त मिल चुकी थी और मुकाबले को निर्णायक गेम तक ले जाने का दबाव भी बढ़ गया था।

लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने जल्दबाजी करने के बजाय अपने आक्रामक खेल पर भरोसा बनाए रखा। उन्होंने सटीक शॉट्स और शक्तिशाली स्मैश के जरिए अंक जुटाने शुरू किए। लगातार संघर्ष करते हुए उन्होंने मुकाबले में वापसी की और दबाव के क्षणों में बेहतर नियंत्रण दिखाया।

दूसरा गेम 24-22 से जीतना इस बात का संकेत था कि अस्मिता केवल आक्रामक शॉट्स पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में मानसिक मजबूती भी दिखा सकती हैं। बैडमिंटन में करीबी स्कोर पर एक छोटी-सी गलती भी मैच का रुख बदल सकती है। ऐसे में लगातार दो गेम जीतना उनके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।

डिफेंस में सुधार पर भी काम

अस्मिता की खेल शैली में आक्रामकता पहले से उनकी पहचान रही है, लेकिन अब उनके प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा डिफेंस को बेहतर बनाना भी है। कोच पार्क ताए-सांग के मार्गदर्शन में वह मल्टी-शटल अभ्यास और कोर्ट पर तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता पर काम कर रही हैं।

अच्छे डिफेंस का फायदा यह होता है कि खिलाड़ी प्रतिद्वंद्वी के मजबूत हमलों को लौटाने के साथ-साथ अगले शॉट के लिए सही स्थिति में पहुंच सकता है। इससे अनावश्यक गलतियां कम होती हैं और लंबे रैली के दौरान ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।

कोच का मानना है कि अस्मिता की आक्रामक क्षमता के साथ यदि निरंतरता और रक्षात्मक मजबूती भी बढ़ती है, तो वह शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ अधिक प्रभावी साबित हो सकती हैं।

चोट से वापसी के बाद बढ़ा आत्मविश्वास

अस्मिता के लिए पिछला दौर आसान नहीं रहा। चोट के कारण उन्हें कुछ समय तक प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन से दूर रहना पड़ा था। वापसी के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपनी लय हासिल की और इस साल कोरिया मास्टर्स में अपने करियर का पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीता।

कोरिया मास्टर्स के फाइनल में भी उन्होंने चीन की हान कियान शी को हराया था। उस मुकाबले में पहला गेम गंवाने के बाद अस्मिता ने शानदार वापसी करते हुए 14-21, 21-14, 21-14 से जीत दर्ज की थी। यह खिताब उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है। <Cite refs={[“turn656080search4″,”turn656080search13”]}/>

फ्रेंच ओपन में मिली जीत से यह संकेत मिलता है कि अस्मिता अपनी वापसी के बाद प्रदर्शन में निरंतरता लाने की कोशिश कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छे नतीजे हासिल करना उनके लिए विश्व रैंकिंग में सुधार और बड़े टूर्नामेंटों में जगह बनाने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।

ओलंपिक क्वालीफिकेशन पर नजर

अस्मिता का दीर्घकालिक लक्ष्य 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में जगह बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है। ओलंपिक क्वालीफिकेशन की दौड़ में उन्हें विश्व रैंकिंग, बड़े टूर्नामेंटों में प्रदर्शन और लगातार अच्छे नतीजों पर ध्यान देना होगा।

शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ जीत हासिल करने से उनका आत्मविश्वास बढ़ सकता है। साथ ही, बड़े टूर्नामेंटों में बेहतर प्रदर्शन से उन्हें मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ खेलने के अधिक अवसर मिल सकते हैं।

भारतीय महिला बैडमिंटन में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अस्मिता के लिए जरूरी होगा कि वह अपनी आक्रामक शैली को बरकरार रखते हुए डिफेंस, फिटनेस और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता को और बेहतर बनाएं।

फ्रेंच ओपन में उनकी जीत केवल एक मुकाबले का नतीजा नहीं, बल्कि चोट से वापसी के बाद बेहतर प्रदर्शन की दिशा में एक और सकारात्मक कदम है। अब उनकी नजर अगले दौर में मजबूत चुनौती का सामना करने और इस लय को आगे भी बनाए रखने पर होगी।

Bharat Baani Bureau

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