26 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा की फिटनेस को लेकर होने वाली चर्चाओं के बीच टीम इंडिया के पूर्व स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच सोहम देसाई ने एक अहम खुलासा किया है। उनके मुताबिक, रोहित को 2017 में कूल्हे के आसपास ऐसी गंभीर चोट लगी थी, जिसने उनके क्रिकेट करियर पर खतरा पैदा कर दिया था। देसाई ने कहा कि इस चोट के बाद रोहित के लिए नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करना बेहद जरूरी हो गया और पिछले सात से आठ वर्षों से उनकी फिटनेस बनाए रखने के लिए यह दिनचर्या अनिवार्य रही है।
देसाई ने क्रिकेट को लेकर चर्चा करने वाले प्रशांत देसाई के पॉडकास्ट में रोहित की फिटनेस और उनके प्रशिक्षण के बारे में बात की। उन्होंने उन आलोचनाओं पर भी सवाल उठाए, जिनमें रोहित को कम मेहनत करने वाला या फिटनेस को लेकर लापरवाह बताया जाता है। पूर्व कोच के अनुसार, किसी खिलाड़ी की शारीरिक बनावट देखकर उसकी मेहनत का अंदाजा लगाना सही नहीं है, क्योंकि चोट से उबरने और लंबे समय तक उच्च स्तर पर खेलने के लिए पर्दे के पीछे लगातार काम करना पड़ता है।
2017 की चोट ने बढ़ाई थी चिंता
सोहम देसाई ने बताया कि रोहित को 2017 में कूल्हे के आसपास करियर के लिए खतरा पैदा करने वाली चोट का सामना करना पड़ा था। उन्होंने उस दौर का जिक्र करते हुए 2017 चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ भारत की हार का संदर्भ दिया। देसाई के मुताबिक, रोहित को हैमस्ट्रिंग और हिप फ्लेक्सर से जुड़ी समस्याओं के लिए सर्जरी भी करानी पड़ी थी।
हालांकि, रोहित की चोटों का इतिहास इससे पहले ही शुरू हो गया था। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने नवंबर 2016 में पुष्टि की थी कि न्यूजीलैंड के खिलाफ विशाखापत्तनम में खेले गए वनडे मैच के दौरान रोहित के दाहिने ऊपरी क्वाड्रिसेप्स टेंडन में चोट लगी थी। इसके बाद उन्हें विशेषज्ञ से सलाह लेने के लिए लंदन भेजने की योजना बनाई गई थी। मार्च 2017 में बीसीसीआई ने बताया था कि चोट और सर्जरी के बाद रोहित ने लंबे पुनर्वास कार्यक्रम से गुजरकर वापसी की तैयारी की।
हर सप्ताह दो स्ट्रेंथ सेशन जरूरी
देसाई ने कहा कि रोहित के कूल्हे का क्षेत्र उनकी शारीरिक स्थिति का संवेदनशील हिस्सा बना हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रोहित सप्ताह में कम से कम दो स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सेशन नहीं करते, तो उनकी फिटनेस को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो सकती है। इसी संदर्भ में उन्होंने रोहित के लिए ‘रेड फ्लैग’ और ‘टिकिंग बम’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
पूर्व कोच के अनुसार, पिछले सात से आठ वर्षों से रोहित की फिटनेस दिनचर्या में नियमित ताकत बढ़ाने वाले अभ्यास की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि यदि रोहित मेहनत नहीं करते या अपनी ट्रेनिंग को गंभीरता से नहीं लेते, तो उनके लिए इतने लंबे समय तक क्रिकेट के उच्च स्तर पर खेलते रहना मुश्किल होता।
देसाई की टिप्पणी का आशय यह था कि रोहित की फिटनेस को केवल उनके बाहरी रूप या मैदान पर दिखाई देने वाली गतिविधियों के आधार पर नहीं परखा जाना चाहिए। पेशेवर क्रिकेट में खिलाड़ी को अपनी जरूरतों और चोटों के इतिहास के अनुसार प्रशिक्षण करना पड़ता है। नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, मैदान पर नियंत्रित अभ्यास और रिकवरी की योजना खिलाड़ी को लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद कर सकती है।
लंबे करियर के पीछे अनुशासित तैयारी
रोहित शर्मा ने भारतीय क्रिकेट में तीनों प्रारूपों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इंडियन प्रीमियर लीग में भी कप्तान तथा बल्लेबाज के तौर पर उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनके करियर में चोटों के कारण लंबे ब्रेक भी आए, लेकिन उन्होंने वापसी करते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी जगह बनाए रखी।
देसाई ने इस बात पर जोर दिया कि रोहित की ट्रेनिंग उनके लिए कोई वैकल्पिक गतिविधि नहीं, बल्कि फिटनेस बनाए रखने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि खिलाड़ी को अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार मैदान पर अभ्यास करने का तरीका अपनाना पड़ता है। नियमित अभ्यास और ताकत बढ़ाने वाले सत्रों के बिना रोहित के लिए लंबे समय तक खेलना मुश्किल हो सकता था।
रोहित अब अपने करियर के उस चरण में हैं, जहां उनकी फिटनेस और प्रदर्शन पर चर्चा 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों के संदर्भ में भी हो रही है। हालांकि, टीम में चयन और भविष्य की भूमिका कई कारकों पर निर्भर करेगी। देसाई की बातों से इतना स्पष्ट होता है कि रोहित के लंबे करियर के पीछे नियमित शारीरिक तैयारी और चोटों को ध्यान में रखकर बनाई गई ट्रेनिंग व्यवस्था का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
पूर्व कोच का यह खुलासा खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर एक व्यापक संदेश भी देता है—अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतर प्रदर्शन केवल प्रतिभा का नतीजा नहीं होता, बल्कि चोटों से निपटने, शरीर की जरूरतों को समझने और अनुशासित प्रशिक्षण जारी रखने की प्रक्रिया भी इसमें अहम भूमिका निभाती है।
