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28 अक्टूबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान ने फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म यानी भाई-भतीजावाद की बहस के बीच अपने करियर और पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर खुलकर बात की है। सारा ने स्वीकार किया कि फिल्मी परिवार से होने के कारण उन्हें पहचान और अवसर मिलने में मदद मिली, लेकिन उनका कहना है कि उनके पिता सैफ अली खान ने फिल्मों में काम दिलाने के लिए उनके अनुबंधों पर बातचीत नहीं की और न ही निर्माताओं से उन्हें फिल्म में लेने की पैरवी की।

फिल्मफेयर को दिए एक हालिया इंटरव्यू में सारा ने कहा कि वह अपनी मां अमृता सिंह के साथ रही हैं और अपने करियर की शुरुआती चुनौतियों का सामना उन्हें खुद करना पड़ा। उन्होंने कहा, “मैं एक सिंगल मदर के साथ रहती हूं। मेरे पिता दफ्तरों में जाकर मेरे कॉन्ट्रैक्ट्स पर बातचीत नहीं करते थे और न ही लोगों से मुझे फिल्मों में लेने की गुहार लगाते थे।” <Cite refs={[“turn671886search3″,”turn671886search1”]}/>

‘फिल्मी परिवार से होने का फायदा मिला’

सारा ने इस बात से इनकार नहीं किया कि फिल्मी परिवार से संबंध होने के कारण उन्हें शुरुआत में बढ़त मिली। उनके अनुसार, परिवार की पहचान ने उन्हें ऐसे अवसर और लोकप्रियता दिलाई, जो किसी नए कलाकार के लिए हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

उन्होंने कहा कि इस विशेषाधिकार को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन लगातार नेपोटिज्म की चर्चा के कारण कलाकारों की अपनी मेहनत और प्रदर्शन पर ध्यान कम हो जाता है। सारा ने जाह्नवी कपूर और अनन्या पांडे जैसी अभिनेत्रियों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी ने भी यह तय नहीं किया कि वह किस परिवार में जन्म लेगा।

अभिनेत्री के मुताबिक, फिल्मी पृष्ठभूमि के कारण शुरुआती अवसर मिलना एक वास्तविकता है, लेकिन उसके बाद करियर में बने रहने और अपनी जगह बनाने के लिए मेहनत भी करनी पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि अभिनय करियर शुरू करने के आठ साल बाद भी उन्हें बार-बार अपनी पृष्ठभूमि को लेकर सफाई देनी पड़ती है, जो उन्हें उचित नहीं लगता। <Cite refs={[“turn671886search0″,”turn671886search3”]}/>

‘केदारनाथ’ के दौरान आई मुश्किलों का खुद किया सामना

सारा ने अपनी पहली फिल्म ‘केदारनाथ’ के दौरान आई परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय जब फिल्म से जुड़ी समस्याएं सामने आईं, तो उन्हें खुद ही उन्हें सुलझाना पड़ा। उनके मुताबिक, उस दौर में इंडस्ट्री में ऐसा कोई गॉडफादर नहीं था, जो उनके लिए खड़ा होकर चीजें संभालता।

सारा की बातों से यह स्पष्ट होता है कि वह फिल्मी परिवार से मिलने वाले शुरुआती लाभ और व्यक्तिगत संघर्षों के बीच अंतर करना चाहती हैं। उन्होंने अपने अनुभव को दोधारी तलवार बताते हुए कहा कि पारिवारिक पहचान से अवसर तो मिलते हैं, लेकिन इसके साथ अपेक्षाओं और आलोचनाओं का दबाव भी रहता है। <Cite refs={[“turn671886search1″,”turn671886search3”]}/>

अमृता सिंह ने अकेले की परवरिश

सारा अली खान सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी हैं। दोनों का तलाक 2004 में हुआ था। इसके बाद सारा और उनके भाई इब्राहिम अली खान की परवरिश मुख्य रूप से उनकी मां अमृता सिंह ने की।

सारा ने इंटरव्यू में यह भी स्पष्ट किया कि उनके पिता उनकी जिंदगी से पूरी तरह अनुपस्थित नहीं रहे। उन्होंने बताया कि सैफ सलाह देने के लिए हमेशा उपलब्ध रहे, लेकिन रोजमर्रा की परवरिश और फैसलों में उनकी मां की भूमिका प्रमुख रही। सारा के अनुसार, उनकी मां ने उन्हें स्वतंत्र होकर फैसले लेना सिखाया। <Cite refs={[“turn671886search3″,”turn671886search6”]}/>

‘केदारनाथ’ से शुरू हुआ फिल्मी सफर

सारा अली खान ने 2018 में सुशांत सिंह राजपूत के साथ फिल्म ‘केदारनाथ’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद वह ‘सिंबा’, ‘लव आज कल’, ‘अतरंगी रे’, ‘जरा हटके जरा बचके’ और ‘ऐ वतन मेरे वतन’ जैसी फिल्मों में नजर आईं।

सारा हाल ही में आयुष्मान खुराना के साथ स्पाई-कॉमेडी फिल्म ‘उड़ता तीर’ में दिखाई दी हैं। उनके करियर में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं रही हैं और वह अपनी अभिनय यात्रा को लेकर लगातार चर्चा में रहती हैं। <Cite refs={[“turn671886search0″,”turn671886search1”]}/>

सारा के ताजा बयान ने एक बार फिर बॉलीवुड में नेपोटिज्म और अवसरों की समानता को लेकर बहस छेड़ दी है। अभिनेत्री ने जहां अपने फिल्मी परिवार से मिले लाभ को स्वीकार किया, वहीं यह भी कहा कि उनकी उपलब्धियों को केवल पारिवारिक पहचान तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।

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