3 नवंबर 2026 (भारत बानी ब्यूरो) : भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने द्विपक्षीय निवेश बढ़ाने और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री की शीर्ष अमीराती अधिकारियों के साथ हुई मुलाकातों में आर्थिक सहयोग, निवेश, व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा को अहमियत दी गई। मिस्री 1 और 2 नवंबर को आधिकारिक दौरे पर अबू धाबी में थे। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करना और सहयोग के नए अवसर तलाशना था।
दौरे के दौरान मिस्री ने अबू धाबी के वित्त विभाग के अध्यक्ष और एल’इमाद होल्डिंग कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी जासिम मोहम्मद बु अताबा अल जाबी से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच निवेश के प्रवाह को बढ़ाने, आर्थिक भागीदारी का विस्तार करने और दीर्घकालिक व्यावसायिक साझेदारियां विकसित करने के अवसरों पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों की कोशिश है कि भारत और यूएई के बीच मजबूत राजनीतिक रिश्तों को ठोस कारोबारी सहयोग में बदला जाए।
मिस्री ने यूएई की अंतरराष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री और भारत के लिए विशेष दूत रीम अल हाशिमी से भी बातचीत की। इस दौरान दोनों देशों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा की। बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति सहित क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत और यूएई के बीच नियमित उच्चस्तरीय संवाद को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दौरे में आर्थिक और राजनीतिक सहयोग के साथ सांस्कृतिक संबंधों को भी प्रमुखता दी गई। मिस्री ने अबू धाबी के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के अध्यक्ष मोहम्मद खलीफा अल मुबारक से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने सांस्कृतिक और रचनात्मक क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग बढ़ाने, पर्यटन को प्रोत्साहन देने और प्रस्तावित ‘हाउस ऑफ इंडिया’ पहल पर चर्चा की। इस पहल के तहत भारत की कला, इतिहास और विरासत को प्रदर्शित करने की योजना है। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
भारत और यूएई के आर्थिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। मई 2022 में लागू व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) ने व्यापार और निवेश के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दोनों देशों ने वर्ष 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। सितंबर 2026 में मुंबई में आयोजित भारत-यूएई उच्चस्तरीय संयुक्त कार्यबल की 14वीं बैठक में भी निवेश बढ़ाने, संयुक्त परियोजनाओं और ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई थी।
भारत के लिए यूएई खाड़ी क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है। ऊर्जा आपूर्ति, निवेश, वित्तीय सेवाओं, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के हित जुड़े हुए हैं। यूएई में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, जो दोनों देशों के सामाजिक और आर्थिक संबंधों को भी मजबूत बनाते हैं।
मिस्री का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब भारत और यूएई के बीच हाल के महीनों में उच्चस्तरीय संपर्क लगातार बढ़े हैं। दोनों देश व्यापार और निवेश के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता तथा वैश्विक मुद्दों पर भी नियमित बातचीत कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यात्रा ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और रणनीतिक तालमेल को दोहराने तथा व्यापक साझेदारी को नई गति देने का अवसर प्रदान किया।
फिलहाल इस दौरे के दौरान किसी नए बड़े समझौते की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, निवेश बढ़ाने, दीर्घकालिक कारोबारी साझेदारी बनाने और सांस्कृतिक सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर हुई बातचीत से संकेत मिलता है कि भारत और यूएई अपने संबंधों को केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित न रखकर व्यापक रणनीतिक सहयोग में बदलना चाहते हैं। आने वाले समय में इन चर्चाओं का वास्तविक परिणाम निवेश परियोजनाओं, व्यापारिक साझेदारियों और संस्थागत सहयोग के रूप में सामने आ सकता है।
