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09 सितम्बर 2024 : तेल और प्राकृतिक गैस  के विशाल भंडार मिलना पाकिस्तान के लिए ‘अलादीन का चिराग’ साबित हो सकता है. यदि उस चिराग को घिसकर जिन्न का सही से इस्तेमाल कर लिया गया तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा बदल जाएगी. दरअसल, पाकिस्तान के अधिकार वाले समुद्र के नीचे तेल और नेचुरल गैस का भंडार मिला है. माना जा रहा है कि यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल और गैस भंडार हो सकता है. ऐसे में, जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकटों से जूझ रहा है तो यह भंडार पूरे पाकिस्तान के लिए एक उम्मीद की किरण है. लेकिन क्या यह तेल वाकई पाकिस्तान की किस्मत बदल पाएगा या यह सिर्फ एक उम्मीद भर बनकर रह जाएगा? इस पर cnbctv18 के शीर्ष कपूर की एक रिपोर्ट पर ध्यान देना चाहिए.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के समुद्री क्षेत्र में किए गए भूगर्भीय सर्वेक्षण से इस विशाल तेल और गैस भंडार की पहचान हुई है. शुरुआती अनुमानों के अनुसार, यह भंडार दुनिया का चौथा सबसे बड़ा भंडार हो सकता है. पाकिस्तान के सरकारी विभागों ने इसकी सूचना दी है और अब इस भंडार से लाभ उठाने के लिए ‘ब्लू वाटर इकॉनमी’ के तहत प्रयास शुरू हो चुके हैं, जिसमें तेल और गैस के अलावा समुद्र से अन्य कीमती खनिजों से लाभ लेना भी शामिल है.

चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि, इस खोज के बावजूद चुनौतियां कम नहीं हैं. तेल और गैस नियामक प्राधिकरण (OGRA) के पूर्व सदस्य मुहम्मद आरिफ ने इस मामले में सावधानी बरतने की सलाह दी है. उनका कहना है कि इस खोज से मिलने वाले रिजल्ट की कोई गारंटी नहीं है. उन्होंने बताया कि तेल और गैस के दोहन के लिए लगभग 5 बिलियन डॉलर (लगभग 1.4 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये) का भारी-भरकम निवेश करना पड़ेगा और इसे निकालने में 5 साल तक का समय लग सकता है.

आर्थिक संकट में नई उम्मीद
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर संकट से गुजर रही है. 2022 की बाढ़ ने वहां पूरी तरह से सबकुछ बर्बाद कर दिया और वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका ने भी पड़ोसी मुल्क की विकास दर को 1.7% तक गिरा दिया. विदेशों से लिया गया लोन बढ़कर 126 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है. ऊंची महंगाई, घटते विदेशी भंडार और बढ़ते वित्तीय दबावों ने अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है.

अगर तेल और गैस के भंडार का सही उपयोग हो पाता है, तो यह पाकिस्तान के मौजूदा ऊर्जा संकट को काफी हद तक कम कर सकता है. विशेष रूप से गैस भंडार की खोज से महंगी LNG आयात की जरूरत कम हो सकती है, जबकि तेल भंडार देश के आयात पर निर्भरता को कम कर सकता है. हालांकि, इस खोज को लेकर जो उत्साह है, वह तब तक महज अटकलें ही हैं, जब तक कि इन भंडारों का सही तरीके से परीक्षण और दोहन शुरू नहीं हो जाता.

Bharat Baani Bureau

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