चंडीगढ़, 4 अगस्त, 2026 (भारतबानी ब्यूरो) : सिखों की बड़ी आबादी वाले दुनिया के करीब 30 देशों के राष्ट्रीय सिख संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाली ग्लोबल सिख काउंसिल (जीएससी) ने श्री अकाल तख्त साहिब, अमृतसर के जत्थेदार सिंह साहिब ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज से औपचारिक अपील करते हुए कहा है कि पंजाब के राजनीतिक और सामाजिक जीवन के इस गंभीर एवं नाजुक मोड़ पर वह सिख पंथ का प्रत्यक्ष नेतृत्व अपने हाथों में लें।
हाल ही में हुई ग्लोबल सिख काउंसिल की कार्यकारी समिति की बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद स्वीकृत इस अपील में सिख राजनीतिक व्यवस्था के सैद्धांतिक आधार ‘मीरी-पीरी’, अर्थात सांसारिक जिम्मेदारी और आध्यात्मिक अधिकार के अटूट समन्वय, तथा ‘गुरु ग्रंथ-गुरु पंथ’ के सिद्धांत का उल्लेख किया गया है। इस सिद्धांत के अनुसार सैद्धांतिक मामलों में अंतिम अधिकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पास है, जबकि सामूहिक निर्णय लेने का अधिकार गुरु पंथ को सौंपा गया है।
काउंसिल ने कहा कि जब भी सिख पंथ के अस्तित्व के समक्ष गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ है, उस समय श्री अकाल तख्त साहिब ने ऐतिहासिक रूप से पंथ का नेतृत्व करने की यह भूमिका निभाई है। यह अधिकार सर्वोच्च सांसारिक तख्त के जत्थेदार द्वारा गुरु पंथ के प्रवक्ता के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है।
पंजाब और विदेशों में पंथक पक्षों द्वारा व्यक्त की जा रही बढ़ती चिंता का उल्लेख करते हुए, जिसमें विभिन्न वर्गों की ओर से हाल ही में पंथक एकता के लिए दिए गए आह्वान भी शामिल हैं, विशेष रूप से पंथक काउंसिल की चेयरपर्सन बीबी सतवंत कौर और भाई जगतार सिंह हवारा द्वारा की गई एकता की अपील का हवाला देते हुए ग्लोबल सिख काउंसिल ने पंजाब में अकाली राजनीति के बड़े पैमाने पर हुए बिखराव की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
काउंसिल ने कहा कि ‘अकाली दल’ नाम वाली 11 पंजीकृत राजनीतिक पार्टियों में से केवल शिरोमणि अकाली दल (बादल) ही 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कोई सीट जीत सका था और उसने कुल 117 विधानसभा सीटों में से महज तीन सीटें ही हासिल की थीं।
ग्लोबल सिख काउंसिल का कहना है कि अकाली राजनीति के इस विभाजन ने पंथ को ऐसे समय में प्रभावी राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित कर दिया है, जब पंजाब लगातार बढ़ती गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं, युवाओं में नशे का बढ़ता प्रचलन, नदी जल का मुद्दा, लगातार बढ़ता कर्ज तथा दूसरे राज्यों से पंजाब में बड़े पैमाने पर हो रहे प्रवासन के कारण जनसांख्यिकीय बदलाव शामिल हैं, जिसे काउंसिल ने समूचे पंजाबियों के लिए ‘अनियंत्रित जनसांख्यिकीय परिवर्तन’ करार दिया है।
इस लिखित अपील पर काउंसिल की अध्यक्ष डॉ. कंवलजीत कौर, यू.के., उपाध्यक्ष परमजीत सिंह बेदी, यू.एस.ए., सचिव एडवोकेट हरजीत सिंह ग्रेवाल और कोषाध्यक्ष हरसरन सिंह, दोनों भारत से तथा एडवोकेट जगीर सिंह, मलेशिया ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने ग्लोबल सिख काउंसिल की ओर से जत्थेदार साहिब के विचारार्थ कई ठोस कदम भी प्रस्तावित किए हैं।
काउंसिल ने सुझाव दिया है कि जत्थेदार साहिब ‘आदेश’ जारी करके सभी सक्रिय अकाली दल गुटों को एकजुट होने के लिए औपचारिक आह्वान करें। इनमें सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाला शिरोमणि अकाली दल, ज्ञानी हरप्रीत सिंह के नेतृत्व में नवगठित शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत, सिमरनजीत सिंह मान के नेतृत्व वाला शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) और अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाला अकाली दल (वारिस पंजाब दे) शामिल किए जाएं।
काउंसिल ने प्रस्ताव दिया है कि ये सभी अकाली गुट आपसी सहमति से सीटों के बंटवारे का फार्मूला तय कर एक साझा मंच से आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ें। इसके साथ ही बोर्डों और निगमों में होने वाले नामांकन को लेकर भी पहले से ही आपसी सहमति से व्यवस्था तय की जाए।
यदि साझा नेतृत्व को लेकर सहमति बनाने में कठिनाई आती है तो काउंसिल ने पांच सदस्यीय अध्यक्षीय समिति (प्रेसिडियम) गठित करने का सुझाव दिया है। इसके विकल्प के रूप में सक्रिय राजनीति से बाहर किसी सम्मानित और योग्य पेशेवर व्यक्ति को इस साझा गठबंधन का नेतृत्व सौंपने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
काउंसिल ने इस मॉडल की तुलना डॉ. मनमोहन सिंह जी को भारत का प्रधानमंत्री नियुक्त किए जाने से की है, जिन्होंने अपने कार्यकाल की जिम्मेदारियों का बेहतरीन ढंग से निर्वहन किया।
काउंसिल ने जत्थेदार साहिब से अपील की है कि पंथक एकता का यह आह्वान केवल विभिन्न अकाली दल गुटों तक ही सीमित न रखा जाए, बल्कि दलितों और अन्य सिख राजनीतिक संगठनों को भी इस एकता अभियान में शामिल किया जाए। काउंसिल के अनुसार इस पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक व्यापक और मजबूत राजनीतिक गठबंधन कायम करना होना चाहिए, जो पंजाब के हितों के प्रति जवाबदेह सरकार बनाने में सक्षम हो।
ग्लोबल सिख काउंसिल ने मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए वरिष्ठ वकीलों की एक समिति गठित करने का भी प्रस्ताव दिया है। यह समिति राज्य चुनाव आयोग के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करे और साथ ही राज्य भर के गांवों में इस मुद्दे पर पहले से काम कर रहे जमीनी स्तर के समूहों और संगठनों के साथ भी सहयोग करे।
काउंसिल ने पंजाब में हाल के समय में आकर बसे प्रवासियों के मतदान के अधिकार, कृषि योग्य भूमि की खरीद तथा पंजाबियों के लिए सरकारी नौकरियों की पात्रता के संबंध में विधायी सुरक्षा उपाय किए जाने की भी मांग की है।
ग्लोबल सिख काउंसिल ने इन प्रस्तावों को पंजाब में जन्मे मूल निवासियों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों के रूप में प्रस्तुत किया है।
ग्लोबल सिख काउंसिल ने दुनिया भर के सिख संगठनों, सिख सोसायटियों और गैर-सरकारी संगठनों को भी इस अपील से जुड़ने का आह्वान किया है। इसके साथ ही धार्मिक संबंध या पहचान से ऊपर उठकर पंजाब के हितों के लिए कार्य कर रहे अन्य संगठनों, संस्थाओं और समूहों से भी इस पहल का समर्थन करने तथा श्री अकाल तख्त साहिब को इसी प्रकार की अपीलें भेजने का आग्रह किया गया है।
ग्लोबल सिख काउंसिल ने कहा है कि कौम इस मामले में जत्थेदार साहिब के मार्गदर्शन की प्रतीक्षा कर रही है। काउंसिल ने सिख पंथ के भीतर पुनः एकता स्थापित करने के लिए श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा की जाने वाली किसी भी पहल को पूर्ण सहयोग देने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है।

Bharat Baani Bureau

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