Bihar Chunav 07 जुलाई 2025 (भारत बानी ब्यूरो ) : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान ने सियासी माहौल गर्मा दिया है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद और वरिष्ठ नेता डॉ मनोज झा ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उनका आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया न केवल पक्षपातपूर्ण है, बल्कि बिहार की सामाजिक-राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करने वाली है.
डॉ झा के अलावा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) जैसी संस्थाएं व दल भी चुनाव आयोग के 24 जून के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुकी हैं.
क्या है मामला?
चुनाव आयोग ने 1 जुलाई से 31 जुलाई तक बिहार में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू किया है. जिन लोगों का नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, उन्हें खुद को नागरिक साबित करने के लिए 11 प्रकार के दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना होगा. आयोग के अनुसार, लगभग 2.94 करोड़ लोगों को इस प्रक्रिया से गुजरना होगा.
चेतावनी यह है कि अगर कोई नागरिक यह प्रमाणपत्र नहीं दे पाता, तो उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है. यही बात विपक्ष को खटक रही है.
क्या है विपक्ष की आपत्ति?
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी संख्या में मतदाता सूची की समीक्षा करना संदेहास्पद है. उनका कहना है कि यह कदम मतदाता सूची से कुछ समुदायों के नाम हटाने का तरीका बन सकता है. यह लोकतंत्र और मतदान के अधिकार का सीधा उल्लंघन है.
डॉ मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि यह प्रक्रिया चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए.
चुनाव आयोग की सफाई
चुनाव आयोग का कहना है कि यह अभियान बिहार तक सीमित नहीं, बल्कि देशभर में चल रहा है. आयोग ने साफ किया कि यह केवल सूची को अद्यतन और साफ करने के लिए किया जा रहा है. आयोग ने यह भी कहा कि आधार कार्ड, नागरिकता का प्रमाण नहीं, बल्कि पहचान का दस्तावेज है.
अब फैसला सुप्रीम कोर्ट के हाथ में
सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई जल्द शुरू कर सकता है. अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि क्या अदालत इस विशेष पुनरीक्षण पर रोक लगाएगी या आयोग के फैसले को वैध मानेगी. चुनाव से पहले यह मामला आने वाले दिनों की सियासत को नया मोड़ दे सकता है.
सारांश:
चुनाव से पहले वोटर लिस्ट की सफाई को लेकर सियासत गरमा गई है। RJD नेताओं ने इसे साजिश बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने चुनाव आयोग पर निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और जांच की मांग की है।
