Notice: Trying to get property 'post_content' of non-object in /home/bharatbaani/htdocs/bharatbaani.com/wp-content/plugins/custom-css-js/custom-css-js.php on line 203

21 जनवरी 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस तरह का रुख अपना रहे हैं, उसे देखते हुए लग रहा है कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर वे नाटो की किसी जिरह को मानने वाले नहीं हैं. उन्होंने तो दावा किया है कि नाटो अगर आज मौजूद है, तो उसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति ही हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर वह सत्ता में नहीं आए होते, तो नाटो कब का खत्म हो चुका होता. उनका ये बयान इसिलए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इस वक्त नाटो और अमेरिकी राष्ट्रपति में जंग छिड़ी हुई है.

ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर यूरोपीय देश कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और दावोस में जुटे यूरोपीय नेताओं ने इसका डटकर जवाब देने की बात कही है. यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप यूरोपीय देशों से और भी ज्यादा चिढ़ गए हैं. उन्होंने इसका जवाब अपने चिर-परिचित अंदाज में ट्रुथ सोशल पर दिया है और लिखा है कि अगर वो न होते, तो नाटो कब का खत्म हो गया होता.

‘मैं न होता, तो कूड़ेदान में चला जाता नाटो’

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा- ‘कोई भी व्यक्ति या राष्ट्रपति नाटो के लिए उतना नहीं कर पाया जितना मैंने किया है. अगर मैं नहीं आता, तो आज नाटो होता ही नहीं. यह इतिहास के कूड़ेदान में चला गया होता. यह बेहद दुखद है, लेकिन सच है.’

डोनाल्ड ट्रंप ने यह पोस्ट उस समय की, जब वह विश्व आर्थिक मंच में हिस्सा लेने के लिए वे स्विट्जरलैंड जाने वाले हैं. व्हाइट हाउस में अपने दूसरे कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर हुई ब्रीफिंग में भी ट्रंप ने यही बात दोहराई. उन्होंने कहा कि खुद उन्होंने किसी भी अन्य नेता से ज्यादा नाटो के लिए काम किया है. साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या नाटो के देश संकट की घड़ी में अमेरिका की मदद करेंगे?

ट्रंप ने कहा कि हम जानते हैं कि अमेरिका नाटो देशों की मदद करेगा, लेकिन मुझे सच में शक है कि वे हमारी मदद करेंगे या नहीं. उन्होंने यह भी जोड़ा कि नाटो को अमेरिका के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि अमेरिका इस गठबंधन पर बहुत ज्यादा खर्च करता है.

क्यों नाटो गठबंधन को तोड़ने पर तुले हैं ट्रंप?

ट्रंप के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब ग्रीनलैंड को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है. नाटो के कई सदस्य देशों ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की ट्रंप की इच्छा का खुलकर विरोध किया है. दावोस में मौजूद यूरोपीय नेताओं ने चेतावनी दी है कि कोई भी एकतरफा कदम ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकता है. दावोस यात्रा से पहले ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और नाटो महासचिव मार्क रुटे के कुछ निजी मैसेज शेयर करके हलचल मचा दी थी. इन संदेशों में ग्रीनलैंड को लेकर उनकी बात हुई थी.

सारांश:
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर विवादित बयान देकर सुर्खियां बटोरी हैं। उन्होंने कहा कि अगर वह राष्ट्रपति न होते तो NATO “कूड़े में चला गया होता”। ट्रंप ने दावा किया कि उनके दबाव की वजह से ही यूरोपीय देशों ने रक्षा खर्च बढ़ाया और गठबंधन मजबूत बना।
हालांकि, इस बयान के बाद यूरोपीय देशों के साथ अमेरिका के रिश्तों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयानों से ट्रांस-अटलांटिक सहयोग पर असर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं।

Bharat Baani Bureau

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *