10 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : यह बात साल 1945-46 की है। भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति शास्त्र में एमए करने का फैसला किया। उनके पिता, पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी, जो ग्वालियर रियासत में एक स्कूल के हेडमास्टर थे और रिटायर हो चुके थे, उन्होंने भी अपने बेटे के साथ फिर से पढ़ाई करने की इच्छा जताई। उनके पिता का मानना था कि ज्ञान प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती।
इसके बाद पिता और पुत्र ने न सिर्फ एक ही कॉलेज और विषय में दाखिला लिया, बल्कि वे कॉलेज के हॉस्टल के कमरा नंबर- 92 में साथ ही रहते थे। अटल बिहारी वाजपेयी और उनके पिता कानपुर के डीएवी कॉलेज से एक साथ, एक ही क्लास में और एक ही हॉस्टल में रहते हुए कानून की पढ़ाई की। बता दें कि 1940 के दशक के नियमों के अनुसार, छात्र एक ही समय में MA और कानून (LLB) की पढ़ाई कर सकते थे। अटल जी ने इसी तरह दाखिला लिया था। उनके पिता भी उनके साथ इन्ही दोनों कोर्स में सहपाठी थे।
जब पिता बोले- तुम्हारे साथ पढ़ाई करूंगा
हुआ यूं कि अटल बिहारी वाजपेयी कानून की पढ़ाई के लिए कानपुर आना चाहते थे, तो उनके पिताजी कृष्ण बिहारी वाजपेयी ने कहा कि मैं भी तुम्हारे साथ कानून की पढ़ाई शुरू करुंगा। अटल बिहारी वाजपेयी के पिता उस वक्त राजकीय सेवा से रिटायर हो चुके थे। ऐसे में दोनों पिता-पुत्र कानून की पढ़ाई करने के लिए कानपुर पहुंच गए। और हुआ ये कि पिता-पुत्र दोनों का दाखिला भी एक ही सेक्शन में हुआ।बताया जाता है कि अटल जी अपने पिता के साथ पढ़ाई करते हुए थोड़ा शरमाते थे। जब उनके पिता क्लास में होते, तो वह क्लास नहीं जाते। जिस दिन अटल जी क्लास नहीं जाते तो टीचर उनके पिता से पूछा करते थे- आपके पुत्र कहां हैं? इसी तरह जब अटलजी के पिता क्लास नहीं पहुंचते थे, तो टीचर अटल जी से पूछते- आपके पिताजी कहां हैं? इसके बाद पूरी क्लास ठहाकों से गूंज उठती थी। अटल जी अक्सर याद करते थे कि पिता के साथ रहने की वजह उन्हें हॉस्टल में काफी अनुशासित रहना पड़ता था और वह अपने दोस्तों के साथ वैसी मौज-मस्ती नहीं कर पाते थे, जैसी एक आम छात्र करता है।
‘वाजपेयी’ नाम पुकारने पर दोनों एक साथ खड़े हो जाते
बताया तो ये भी जाता है कि क्लास में हाजिरी के वक्त जब प्रोफेसर ‘वाजपेयी’ नाम पुकारते, तो पिता-पुत्र दोनों एक साथ खड़े हो जाते थे। इस अजीबोगरीब स्थिति को संभालने के लिए बाद में शिक्षकों ने उनके नाम के आगे पिता और पुत्र जोड़ना शुरू किया। वहीं, शिक्षकों को अपने से उम्रदराज ‘छात्र’ कृष्ण बिहारी जी को पढ़ाने में संकोच होने लगा। स्थिति को सामान्य बनाने के लिए बाद में दोनों के सेक्शन बदल दिए गए; एक को ‘सेक्शन-ए’ और दूसरे को ‘सेक्शन-बी’ में भेज दिया गया। हालांकि, बाद में पारिवारिक जिम्मेदारियों और अन्य कारणों से उनके पिता को वापस ग्वालियर लौटना पड़ा और उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई। लेकिन अटल जी ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और राजनीति शास्त्र में प्रथम श्रेणी के साथ एमए की डिग्री हासिल की।
सारांश:
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के जीवन से जुड़ा एक बहुत रोचक किस्सा है। जब वे कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे, उसी समय उनके पिता Krishna Bihari Vajpayee ने भी कानून (लॉ) की पढ़ाई करने का फैसला किया। संयोग से दोनों का एडमिशन एक ही कॉलेज और एक ही कक्षा में हो गया। इतना ही नहीं, कई बार वे एक ही हॉस्टल में भी साथ रहते थे।
