30 मार्च 2026 (भारत बानी ब्यूरो ) : विदेशी मुद्रा बाजार में बड़ी हलचल के बीच Indian Rupee ने मजबूत वापसी करते हुए अपने ऑल-टाइम लो से 128 पैसे की छलांग लगाई है। यह अब US Dollar के मुकाबले 93.57 पर पहुंच गया है, जो हाल के दिनों में आई भारी गिरावट के बाद एक राहत भरी खबर मानी जा रही है।
पिछले सत्र में Indian Rupee रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया था, जिससे बाजार में चिंता बढ़ गई थी। लेकिन ताजा कारोबारी सत्र में इसमें तेज सुधार देखा गया, जिससे निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक बहाल हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस रिकवरी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे अहम कारण डॉलर में हल्की कमजोरी और वैश्विक बाजारों में स्थिरता के संकेत माने जा रहे हैं। इसके अलावा, कुछ विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजारों में फिर से निवेश करने से भी रुपये को समर्थन मिला है।
Reserve Bank of India की संभावित हस्तक्षेप भूमिका को भी इस सुधार का एक कारण माना जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन बाजार में यह धारणा है कि केंद्रीय बैंक ने रुपये को स्थिर करने के लिए कदम उठाए हैं।
हाल के दिनों में Indian Rupee पर भारी दबाव बना हुआ था। इसके पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, खासकर मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे कारण शामिल थे।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे Indian Rupee कमजोर होता है। लेकिन जैसे ही तेल कीमतों में कुछ स्थिरता आई, रुपये को राहत मिली।
शेयर बाजार में भी सकारात्मक संकेत देखने को मिले हैं। निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता (risk appetite) बढ़ने से उभरते बाजारों में निवेश फिर से आकर्षित होने लगा है, जिसका फायदा Indian Rupee को मिला।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिकवरी अभी स्थायी नहीं कही जा सकती। वैश्विक परिस्थितियां अभी भी अनिश्चित बनी हुई हैं, और किसी भी नए तनाव या आर्थिक झटके से रुपये पर फिर से दबाव आ सकता है।
Reserve Bank of India और सरकार की नीतियां आगे चलकर रुपये की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। मुद्रास्फीति, ब्याज दरें और विदेशी निवेश जैसे कारक भी इसमें अहम होंगे।
कुल मिलाकर, Indian Rupee की यह 128 पैसे की रिकवरी बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन स्थिरता बनाए रखने के लिए अभी और मजबूत आर्थिक संकेतों की जरूरत होगी।
सारांश:
रुपया ऑल-टाइम लो से 128 पैसे उछलकर 93.57 प्रति डॉलर पर पहुंचा, डॉलर कमजोरी और बाजार सुधार से राहत मिली, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।
